पतंजलि योगसूत्र

चार पाद, 195 सूत्र: मूल संस्कृत पाठ और सरल अर्थ

संक्षेप में

पतंजलि योगसूत्र योग दर्शन का मूल ग्रंथ है। इसके चार पाद हैं, समाधि, साधन, विभूति और कैवल्य, और जिस पाठ पर यह पृष्ठ आधारित है उसमें कुल 195 सूत्र हैं। इसका दूसरा सूत्र ही पूरे ग्रंथ का केंद्र है: चित्त की वृत्तियों का निरोध योग है।

एक नज़र में

रचयिता
परंपरा से महर्षि पतंजलि; व्यक्ति और काल पर मतभेद
पाद
4
सूत्र
195 (आनंदाश्रम 1904 का पाठ)
प्रमुख भाष्य
व्यास के नाम से प्रसिद्ध भाष्य
टीका
वाचस्पति मिश्र की तत्त्ववैशारदी

योगसूत्र क्या है?

ग्रंथ में

सूत्र का अर्थ है बहुत कम शब्दों में कही गई बात, जिसे याद रखा जा सके और गुरु के मुख से खोला जा सके। योगसूत्र की शुरुआत ही तीन शब्दों से होती है: अब योग का अनुशासन। "अनुशासन" कहने का भाव यह है कि विद्या नई नहीं रची जा रही, पहले से चली आती विद्या को क्रम दिया जा रहा है।

सूत्रों की परंपरा, उनकी कथा और अष्टांग योग की सरल व्याख्या हमारे ऋषि-खंड के लेख में है। यह पृष्ठ ग्रंथ के ढाँचे और उसके मूल पाठ पर केंद्रित है।

योगसूत्र में कितने पाद और सूत्र हैं?

ग्रंथ में

चार पाद (आनंदाश्रम 1904 का पाठ)
पादसूत्रमुख्य विषयस्रोत
समाधि पाद51योग की परिभाषा, वृत्तियाँ, अभ्यास और वैराग्यपतंजलि योगसूत्र, 1.1–1.51
साधन पाद55क्रिया योग, क्लेश, अष्टांग के पहले पाँच अंगपतंजलि योगसूत्र, 2.1–2.55
विभूति पाद55धारणा, ध्यान, समाधि और उनसे होने वाली विभूतियाँपतंजलि योगसूत्र, 3.1–3.55
कैवल्य पाद34चित्त, कर्म और कैवल्यपतंजलि योगसूत्र, 4.1–4.34

योगसूत्र के प्रमुख सूत्र और उनके अर्थ

ग्रंथ में

नीचे के सूत्र मूल पाठ से लिए गए हैं, और हर सूत्र दो स्रोतों से मिलाया गया है। अर्थ हमारे अपने सरल शब्दों में है।

अथ योगानुशासनम्॥

अब योग का अनुशासन आरंभ होता है।

— पातञ्जलयोगसूत्राणि (Ānandāśrama Sanskrit Series 47), GRETIL पाठ, योगसूत्र 1.1
योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः॥

चित्त की वृत्तियों को रोक लेना ही योग है।

— पातञ्जलयोगसूत्राणि (Ānandāśrama Sanskrit Series 47), GRETIL पाठ, योगसूत्र 1.2
अभ्यासवैराग्याभ्यां तन्निरोधः॥

उन वृत्तियों का निरोध अभ्यास और वैराग्य से होता है।

— पातञ्जलयोगसूत्राणि (Ānandāśrama Sanskrit Series 47), GRETIL पाठ, योगसूत्र 1.12
तपःस्वाध्यायेश्वरप्रणिधानानि क्रियायोगः॥

तप, स्वाध्याय और ईश्वर-प्रणिधान क्रिया योग हैं।

— पातञ्जलयोगसूत्राणि (Ānandāśrama Sanskrit Series 47), GRETIL पाठ, योगसूत्र 2.1
अविद्यास्मितारागद्वेषाभिनिवेशाः क्लेशाः॥

अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष और अभिनिवेश, ये पाँच क्लेश हैं।

— पातञ्जलयोगसूत्राणि (Ānandāśrama Sanskrit Series 47), GRETIL पाठ, योगसूत्र 2.3
यमनियमासनप्राणायामप्रत्याहारधारणाध्यानसमाधयोऽष्टावङ्गानि॥

यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि, ये योग के आठ अंग हैं।

— पातञ्जलयोगसूत्राणि (Ānandāśrama Sanskrit Series 47), GRETIL पाठ, योगसूत्र 2.29
स्थिरसुखमासनम्॥

जो स्थिर भी हो और सुखद भी, वही आसन है।

— पातञ्जलयोगसूत्राणि (Ānandāśrama Sanskrit Series 47), GRETIL पाठ, योगसूत्र 2.46

धारणा, ध्यान और समाधि में क्या अंतर है?

ग्रंथ में

विभूति पाद के पहले तीन सूत्र इन तीनों को एक-एक वाक्य में अलग कर देते हैं। अंतर गहराई का है: पहले मन को एक जगह रखना है, फिर वहाँ मन का टिके रहना है, और अंत में केवल विषय का रह जाना है।

देशबन्धश्चित्तस्य धारणा॥

चित्त को किसी एक स्थान पर बाँधना धारणा है।

— पातञ्जलयोगसूत्राणि (Ānandāśrama Sanskrit Series 47), GRETIL पाठ, योगसूत्र 3.1
तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम्॥

वहीं ज्ञान का एक-सा प्रवाह बने रहना ध्यान है।

— पातञ्जलयोगसूत्राणि (Ānandāśrama Sanskrit Series 47), GRETIL पाठ, योगसूत्र 3.2
तदेवार्थमात्रनिर्भासं स्वरूपशून्यमिव समाधिः॥

जब वही ध्यान केवल विषय के रूप में भासे, और मानो अपने स्वरूप से शून्य हो जाए, तब वह समाधि है।

— पातञ्जलयोगसूत्राणि (Ānandāśrama Sanskrit Series 47), GRETIL पाठ, योगसूत्र 3.3

योगसूत्र की भाष्य-परंपरा

परंपरा

छोटे सूत्र बिना व्याख्या के खुलते नहीं, इसलिए यह ग्रंथ अकेला नहीं पढ़ा जाता। सूत्रों पर व्यास के नाम से प्रसिद्ध भाष्य है, और उस पर वाचस्पति मिश्र की टीका तत्त्ववैशारदी है। James Woods का 1914 का अंग्रेज़ी अनुवाद इन तीनों को साथ देता है।

पतंजलि कौन थे? रचयिता और काल पर मतभेद

विद्वानों में मतभेद

परंपरा में एक मान्यता है कि योगसूत्र, व्याकरण-महाभाष्य और चरक का संशोधन, तीनों एक ही पतंजलि के हैं। Woods के अनुसार इस मान्यता का सबसे पुराना प्रमाण दसवीं सदी से पहले का नहीं मिलता, और दोनों ग्रंथों की तुलना से यह एकता सिद्ध नहीं होती।

काल के बारे में भी कोई एक उत्तर नहीं है। Woods सूत्रों को ईसा की चौथी-पाँचवीं सदी का मानते हैं, पर यह उनका मत है और दूसरे विद्वान अलग मानते हैं। इसलिए हम ग्रंथ की कोई पक्की तिथि नहीं दे रहे।

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पतंजलि योगसूत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न