महर्षि पतंजलि

योगसूत्र के रचयिता: परंपरा क्या कहती है, और विद्वान क्या

संक्षेप में

महर्षि पतंजलि योगसूत्र के रचयिता माने जाते हैं, जो योग दर्शन का मूल ग्रंथ है। परंपरा उन्हें व्याकरण के महाभाष्य और चरक संहिता के संशोधन से भी जोड़ती है। पर विद्वानों के अनुसार यह एकता सिद्ध नहीं है, और उनके जीवन और काल के बारे में पक्का बहुत कम ज्ञात है।

एक नज़र में

मुख्य रचना
पतंजलि योगसूत्र
परंपरा में
योगसूत्र, महाभाष्य और चरक के संशोधन के कर्ता
Woods का मत
तीनों की एकता सिद्ध नहीं; प्रमाण दसवीं सदी से पहले का नहीं
काल
विवादित

महर्षि पतंजलि कौन थे?

परंपरा

पतंजलि का नाम योग के साथ ऐसे जुड़ा है कि बहुत लोग योग को ही "पतंजलि योग" कहते हैं। फिर भी उनके जीवन के बारे में ग्रंथों से बहुत कम पता चलता है। हमारे पास जो पक्का है, वह उनकी रचना है: चार पादों और 195 सूत्रों का योगसूत्र।

योगसूत्र का भाष्य सर्पों के स्वामी की वंदना से शुरू होता है, जिन्हें योग देने वाला कहा गया है। इस वंदना को पढ़कर ही समझ आता है कि यह परंपरा योग को किसी दिव्य स्रोत से आई विद्या मानती है।

क्या योगसूत्र और महाभाष्य के पतंजलि एक हैं?

विद्वानों में मतभेद

परंपरा में एक श्लोक प्रसिद्ध है, जिसमें पतंजलि को योग से मन के, व्याकरण से वाणी के और चिकित्सा से शरीर के दोष दूर करने वाला कहा गया है। James Woods ने ऐसे श्लोकों की जाँच की। उनके अनुसार इस एकता की परंपरा का सबसे पुराना प्रमाण दसवीं सदी से पहले का नहीं मिलता।

Woods दोनों ग्रंथों के विचारों की तुलना करके कहते हैं कि इससे भी दोनों पतंजलियों की एकता सिद्ध नहीं होती। यह एक विद्वान का मत है। परंपरा अपनी मान्यता रखती है, और हम दोनों को अलग-अलग बता रहे हैं।

पतंजलि का काल क्या था?

विद्वानों में मतभेद

Woods योगसूत्र को ईसा की चौथी-पाँचवीं सदी का मानते हैं, और भाष्य को उसके बाद का। दूसरे विद्वान अलग तिथियाँ देते हैं। इसलिए हम पतंजलि की कोई पक्की तिथि नहीं दे रहे।

पतंजलि की देन

ग्रंथ में

पतंजलि की सबसे बड़ी देन योग को एक व्यवस्थित रूप देना है: योग की परिभाषा, मन की वृत्तियाँ, दुख की जड़ में क्लेश, आठ अंगों का मार्ग, और कैवल्य का लक्ष्य। यह सब उन्होंने बहुत कम शब्दों में कहा, और इसी कारण उन पर भाष्य और टीकाएँ लिखी गईं।

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महर्षि पतंजलि — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न