चक्र और कुंडलिनी

सात चक्र, तीन नाड़ियाँ और कुंडलिनी: शिव संहिता और हठयोग प्रदीपिका के अनुसार

संक्षेप में

शिव संहिता सुषुम्ना नाड़ी में छह चक्र बताती है: मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध और आज्ञा, और उनके ऊपर हज़ार पंखुड़ियों वाला सहस्रार। इसी से "सात चक्र" की बात आती है। ये सूक्ष्म शरीर की पारंपरिक अवधारणाएँ हैं, शरीर-रचना नहीं।

सात चक्र कौन-से हैं?

ग्रंथ में

शिव संहिता कहती है कि सुषुम्ना में छह अवस्थाएँ, छह शक्तियाँ और छह कमल हैं। फिर पाँचवें अध्याय में वह छह चक्रों का एक-एक करके वर्णन करती है, और उनके ऊपर सहस्रार का।

शिव संहिता के अनुसार चक्र
चक्रस्थानपंखुड़ियाँसिद्ध और देवीस्रोत
मूलाधारगुदा से दो अंगुल ऊपर और जननेंद्रिय से दो अंगुल नीचे4द्विरण्ड, डाकिनीशिव संहिता (Vasu अनु.), 5.56, 5.63–64
स्वाधिष्ठानजननेंद्रिय के मूल में6बाल, राकिणीशिव संहिता (Vasu अनु.), 5.75
मणिपुरनाभि के पास10रुद्र, लाकिनीशिव संहिता (Vasu अनु.), 5.79–80
अनाहतहृदय में12पिनाकी, काकिनीशिव संहिता (Vasu अनु.), 5.83, 5.85
विशुद्धकंठ में16छगलाण्ड, शाकिनीशिव संहिता (Vasu अनु.), 5.90
आज्ञादोनों भौंहों के बीच2शुक्ल महाकाल, हाकिनीशिव संहिता (Vasu अनु.), 5.96
सहस्रारतालु के मूल पर, ब्रह्मरंध्र में1000महेश (कैलास)शिव संहिता (Vasu अनु.), 5.103, 5.120, 5.152

चक्रों को कैसे समझें?

चक्र सूक्ष्म शरीर की पारंपरिक अवधारणा है। इसे शरीर की किसी हड्डी, ग्रंथि या नस की तरह मापा या सिद्ध नहीं किया गया है। इस पृष्ठ पर ग्रंथ का वर्णन है, शरीर-विज्ञान नहीं।

अलग-अलग परंपराओं में चक्रों के रंग, देवता और अक्षर अलग मिलते हैं। हर चक्र-पृष्ठ पर दो ग्रंथों का वर्णन है: शिव संहिता का, और तांत्रिक ग्रंथ षट्चक्र निरूपण का, जिससे तत्व, बीज मंत्र (लं, वं, रं, यं, हं, ॐ) और वाहन आते हैं। जहाँ दोनों अलग हैं, वहाँ दोनों दिए गए हैं; जैसे विशुद्ध का रंग शिव संहिता में सुनहरा है और षट्चक्र निरूपण में धुएँ जैसा बैंगनी।

हर चक्र-पृष्ठ पर शिव संहिता के बताए ध्यान के सारे फल ग्रंथ के क्रम में दिए गए हैं। वे ग्रंथ के कथन हैं; इन्हें चिकित्सा की सलाह न समझें।

चक्र-ध्यान में सावधानी

तुरंत "चक्र जागरण" के दावों से बचें

ग्रंथ चक्रों पर ध्यान के फल बताते हैं, पर उन्हें गुरु के मार्गदर्शन और लंबी साधना से जोड़ते हैं; हठयोग प्रदीपिका कुंडलिनी के जागरण को गुरु की कृपा से जोड़ती है। "कुछ दिनों में चक्र खोलिए" जैसे दावों पर भरोसा न करें।

ध्यान में बेचैनी, घबराहट या असामान्य अनुभव बढ़ें तो रुकिए, और किसी अनुभवी से बात कीजिए। यह किसी रोग का इलाज नहीं है।

कुंडलिनी और नाड़ी

सात चक्र

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  • कुंडलिनी योग — हठ ग्रंथों की कुंडलिनी: आधार, जागरण और सावधानी
  • शिव संहिता — शिव और पार्वती के संवाद में योग: आसन, प्राणायाम और चक्र
  • हठ योग — शरीर और प्राण से मन तक पहुँचने वाला मार्ग

चक्र और कुंडलिनी — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न