इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ी

सूक्ष्म शरीर की तीन मुख्य नाड़ियाँ: शिव संहिता और हठयोग प्रदीपिका

संक्षेप में

योग ग्रंथों में नाड़ियाँ सूक्ष्म शरीर में प्राण के मार्ग हैं। शिव संहिता के अनुसार इनमें 14 प्रमुख हैं और तीन मुख्य: इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना। इड़ा बाईं ओर, पिंगला दाहिनी ओर, और सुषुम्ना दोनों के बीच है। नाड़ियों की कुल संख्या पर ग्रंथ अलग-अलग बात कहते हैं।

एक नज़र में

मुख्य नाड़ियाँ
इड़ा, पिंगला, सुषुम्ना (शिव संहिता 2.15)
कुल नाड़ियाँ (शिव संहिता)
3,50,000; उनमें 14 प्रमुख (2.13)
कुल नाड़ियाँ (प्रदीपिका)
72,000
सुषुम्ना के पर्याय (प्रदीपिका)
शून्य पदवी, ब्रह्मरंध्र, महापथ, श्मशान, शांभवी, मध्य मार्ग (3.4)

नाड़ियाँ क्या हैं?

ग्रंथ में

शिव संहिता के अनुसार मनुष्य के शरीर में 3,50,000 नाड़ियाँ हैं, उनमें 14 प्रमुख हैं, और उन 14 में इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना मुख्य हैं।

हठयोग प्रदीपिका अलग संख्या देती है: वह कहती है कि उसके बताए अभ्यास 72,000 नाड़ियों की अशुद्धि साफ़ करते हैं। यानी कुल संख्या पर ग्रंथ एकमत नहीं।

तीन मुख्य नाड़ियाँ (शिव संहिता)
नाड़ीस्थानस्रोत
इड़ाबाईं ओर; बाईं नासिका तक जाती हैशिव संहिता (Vasu अनु.), अध्याय 2, इड़ा
पिंगलादाहिनी ओर; दाहिनी नासिका तक जाती हैशिव संहिता (Vasu अनु.), अध्याय 2, पिंगला
सुषुम्नाइड़ा और पिंगला के बीच; इसमें छह कमलशिव संहिता (Vasu अनु.), 2.27

सुषुम्ना नाड़ी

ग्रंथ में

शिव संहिता कहती है कि इड़ा और पिंगला के बीच की नाड़ी निश्चित ही सुषुम्ना है, और उसमें छह अवस्थाएँ, छह शक्तियाँ और छह कमल हैं।

हठयोग प्रदीपिका सुषुम्ना के कई नाम एक साथ देती है: शून्य पदवी, ब्रह्मरंध्र, महापथ, श्मशान, शांभवी और मध्य मार्ग। ग्रंथ के अनुसार कुंडलिनी के जागने पर सुषुम्ना प्राण का मुख्य मार्ग बन जाती है।

नाड़ियों को कैसे समझें?

नाड़ियाँ सूक्ष्म शरीर की पारंपरिक अवधारणा हैं, शरीर की नसें या रक्त-वाहिनियाँ नहीं। अनुवादक Sinh अपनी टिप्पणी में सुषुम्ना को मेरुदंड के भीतर के मार्ग से जोड़ते हैं; वह अनुवादक की व्याख्या है, ग्रंथ का शब्द नहीं।

नासिका और नाड़ी

परंपरा

परंपरा में बाईं नासिका को चंद्र (इड़ा) और दाहिनी को सूर्य (पिंगला) से जोड़ा जाता है। अनुलोम-विलोम और सूर्यभेदन जैसे अभ्यासों के नाम इसी से जुड़े हैं।

चक्र-ध्यान में सावधानी

तुरंत "चक्र जागरण" के दावों से बचें

ग्रंथ चक्रों पर ध्यान के फल बताते हैं, पर उन्हें गुरु के मार्गदर्शन और लंबी साधना से जोड़ते हैं; हठयोग प्रदीपिका कुंडलिनी के जागरण को गुरु की कृपा से जोड़ती है। "कुछ दिनों में चक्र खोलिए" जैसे दावों पर भरोसा न करें।

ध्यान में बेचैनी, घबराहट या असामान्य अनुभव बढ़ें तो रुकिए, और किसी अनुभवी से बात कीजिए। यह किसी रोग का इलाज नहीं है।

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इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ी — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न