योग वासिष्ठ क्या है?
ग्रंथ में
योग वासिष्ठ उन ग्रंथों में है जिनमें "योग" शब्द ज्ञान के अर्थ में आता है। इसमें महर्षि वसिष्ठ श्रीराम को उपदेश देते हैं, और पूरा ग्रंथ प्रश्न-उत्तर और कथाओं के रूप में चलता है। Mitra के अंग्रेज़ी अनुवाद का शीर्षक इसे "वाल्मीकि का योग वासिष्ठ महारामायण" कहता है।
योग वासिष्ठ के छह प्रकरण
ग्रंथ में
| क्रम | प्रकरण | स्रोत |
|---|---|---|
| 1 | वैराग्य | योग वासिष्ठ (Mitra अनु.), प्रकरण-सूची |
| 2 | मुमुक्षु | योग वासिष्ठ (Mitra अनु.), प्रकरण-सूची |
| 3 | उत्पत्ति | योग वासिष्ठ (Mitra अनु.), Book III, Utpatti Khanda |
| 4 | स्थिति | योग वासिष्ठ (Mitra अनु.), Book IV, Sthiti Khanda |
| 5 | उपशम | योग वासिष्ठ (Mitra अनु.), Book V, Upasama Khanda |
| 6 | निर्वाण | योग वासिष्ठ (Mitra अनु.), Book VI, Nirvana Khanda |
इस ग्रंथ में योग का अर्थ
हठ ग्रंथों से उलट, योग वासिष्ठ में शरीर के अभ्यासों का स्थान बहुत कम है। इसके प्रकरणों के नाम ही बताते हैं कि यात्रा वैराग्य से शुरू होकर मुक्ति की इच्छा, संसार की उत्पत्ति और स्थिति की समझ, मन की शांति (उपशम) और अंत में निर्वाण तक जाती है।
आगे पढ़ें
- ज्ञान योग — भगवद्गीता का ज्ञान का मार्ग: श्रद्धा, गुरु और विवेक
- योग के प्राचीन ग्रंथ — योगसूत्र से हठयोग प्रदीपिका तक: कौन-सा ग्रंथ क्या सिखाता है
- अभ्यास और वैराग्य — मन को थामने की दो चाबियाँ: योगसूत्र और गीता दोनों में
- महर्षि वसिष्ठ — ऋषि-खंड में उनका जीवन-परिचय
FAQ
योग वासिष्ठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महर्षि वसिष्ठ और श्रीराम का।
परंपरा इसे वाल्मीकि के नाम से जोड़ती है; Mitra के अनुवाद का शीर्षक भी "Yoga-Vasistha-Maharamayana of Valmiki" है।
छह: वैराग्य, मुमुक्षु, उत्पत्ति, स्थिति, उपशम और निर्वाण।
नहीं। यह ज्ञान और वैराग्य का ग्रंथ है, जिसमें योग का अर्थ मुख्यतः मन की शांति और मुक्ति से है।
इसे "योग वासिष्ठ महारामायण" भी कहा जाता है, जैसा Mitra के अनुवाद के शीर्षक में है।
