योग वासिष्ठ

महर्षि वसिष्ठ और श्रीराम का संवाद: छह प्रकरणों का ज्ञान-ग्रंथ

संक्षेप में

योग वासिष्ठ महर्षि वसिष्ठ और श्रीराम के संवाद का एक बड़ा ग्रंथ है, जो परंपरा में वाल्मीकि के नाम से जुड़ा है। इसके छह प्रकरण हैं: वैराग्य, मुमुक्षु, उत्पत्ति, स्थिति, उपशम और निर्वाण। यह आसन या प्राणायाम का नहीं, ज्ञान और वैराग्य का ग्रंथ है।

एक नज़र में

संवाद
महर्षि वसिष्ठ और श्रीराम
परंपरा में रचयिता
वाल्मीकि
प्रकरण
6: वैराग्य, मुमुक्षु, उत्पत्ति, स्थिति, उपशम, निर्वाण
पढ़ा गया संस्करण
V. L. Mitra का अनुवाद, 1891

योग वासिष्ठ क्या है?

ग्रंथ में

योग वासिष्ठ उन ग्रंथों में है जिनमें "योग" शब्द ज्ञान के अर्थ में आता है। इसमें महर्षि वसिष्ठ श्रीराम को उपदेश देते हैं, और पूरा ग्रंथ प्रश्न-उत्तर और कथाओं के रूप में चलता है। Mitra के अंग्रेज़ी अनुवाद का शीर्षक इसे "वाल्मीकि का योग वासिष्ठ महारामायण" कहता है।

योग वासिष्ठ के छह प्रकरण

ग्रंथ में

छह प्रकरण
क्रमप्रकरणस्रोत
1वैराग्ययोग वासिष्ठ (Mitra अनु.), प्रकरण-सूची
2मुमुक्षुयोग वासिष्ठ (Mitra अनु.), प्रकरण-सूची
3उत्पत्तियोग वासिष्ठ (Mitra अनु.), Book III, Utpatti Khanda
4स्थितियोग वासिष्ठ (Mitra अनु.), Book IV, Sthiti Khanda
5उपशमयोग वासिष्ठ (Mitra अनु.), Book V, Upasama Khanda
6निर्वाणयोग वासिष्ठ (Mitra अनु.), Book VI, Nirvana Khanda

इस ग्रंथ में योग का अर्थ

हठ ग्रंथों से उलट, योग वासिष्ठ में शरीर के अभ्यासों का स्थान बहुत कम है। इसके प्रकरणों के नाम ही बताते हैं कि यात्रा वैराग्य से शुरू होकर मुक्ति की इच्छा, संसार की उत्पत्ति और स्थिति की समझ, मन की शांति (उपशम) और अंत में निर्वाण तक जाती है।

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योग वासिष्ठ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न