गोत्र-कथा

गोत्र परंपरा की उत्पत्ति, सप्तर्षि, ऋषियों की वंशावलियाँ, प्राचीन व्यवस्था, वेद से संबंध और विकास — बौधायन, प्रवरमञ्जरी, मत्स्य पुराण, महाभारत, उपनिषद और विष्णु पुराण से, हर तथ्य के पृष्ठ सहित।

संक्षेप में

गोत्र की कथा ऋषियों की कथा है। बौधायन के अनुसार गोत्र सात ऋषियों और आठवें अगस्त्य की संतान हैं; बृहदारण्यक उपनिषद और विष्णु पुराण वही सात नाम सप्तर्षि के रूप में देते हैं। इन लेखों में हर बात उसी ग्रंथ से है जिसका पृष्ठ साथ दिया गया है, और जहाँ ग्रंथ आपस में अलग हैं, वहाँ दोनों रूप लिखे हैं।

लेख (7)

इन पृष्ठों पर ग्रंथों की तिथियाँ और इतिहासकारों के अनुमान नहीं हैं — केवल वह जो मूल पाठ कहते हैं।

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