प्रमुख ऋषियों की वंश परंपराएँ — आठ कुलों की वंशावली

गोत्र-कुलों के ऋषियों की वंश परंपरा — भृगु से परशुराम, वसिष्ठ से व्यास, कुशिक से विश्वामित्र, अंगिरा से बृहस्पति और भरद्वाज — महाभारत, मत्स्य पुराण और सर्वानुक्रमणी से, हर कड़ी के स्रोत सहित।

संक्षेप में

गोत्र-कुलों की वंशावलियाँ महाभारत, मत्स्य पुराण और ऋग्वेद की सर्वानुक्रमणी में बिखरी हुई मिलती हैं। जैसे भृगु से च्यवन, और्व, ऋचीक, जमदग्नि और परशुराम; वसिष्ठ से शक्ति, पराशर और व्यास; कुशिक से गाधि और विश्वामित्र। इस पृष्ठ पर हर कड़ी के साथ उसका स्रोत है, और जहाँ ग्रंथ अलग हैं वहाँ यह लिखा है।

भृगु-वंश: भृगु से परशुराम

महाभारत (आदि पर्व, Section LXVI): भृगु के पुत्र च्यवन; च्यवन की पत्नी मनु-पुत्री आरुषी से और्व; और्व के ऋचीक; ऋचीक के जमदग्नि; जमदग्नि के चार पुत्रों में सबसे छोटे राम (परशुराम)। भृगु के एक और पुत्र शुक्र (असुरों के पुरोहित) थे।

वन पर्व (Section CXV–CXVI) इसमें एक कड़ी जोड़ता है: ऋचीक की पत्नी सत्यवती कान्यकुब्ज के राजा गाधि की पुत्री थीं, और उन्हीं से जमदग्नि जन्मे। जमदग्नि ने राजा प्रसेनजित की पुत्री रेणुका से विवाह किया; उनके पुत्र रुमण्वान, सुषेण, वसु, विश्वावसु और सबसे छोटे राम।

कुशिक-वंश: विश्वामित्र

सर्वानुक्रमणी (p. 14) के अनुसार कुशिक के पुत्र गाथी, और गाथी के विश्वामित्र — ऋग्वेद के तीसरे मण्डल के ऋषि। महाभारत (आदि पर्व, Section CLXXV) भी यही कहता है: कान्यकुब्ज के राजा गाधि कुशिक के पुत्र थे, और गाधि के पुत्र विश्वामित्र।

दोनों वंश यहाँ मिलते हैं: गाधि की पुत्री सत्यवती जमदग्नि की माता थीं, यानी महाभारत के अनुसार विश्वामित्र जमदग्नि के मामा थे। गोत्र में दोनों अलग गोत्रकार हैं — एक भृगु-कुल, दूसरे विश्वामित्र-कुल।

वसिष्ठ-वंश: वसिष्ठ से व्यास

मत्स्य पुराण (अध्याय 201): वसिष्ठ का विवाह अरुन्धती से; पुत्र शक्ति; शक्ति के पुत्र पराशर; और इसी वंश में वेदव्यास। महाभारत (उद्योग पर्व, Section CXVII) शक्ति की पत्नी अदृश्यन्ती बताता है, और सभा पर्व (Section XLV) व्यास को "पराशर का पुत्र" कहता है।

यही तीन पीढ़ियाँ पराशर गण के प्रवर में हैं: वासिष्ठ, शाक्त्य, पाराशर्य।

आङ्गिरस-वंश: बृहस्पति और भरद्वाज

महाभारत (आदि पर्व, Section LXVI) के अनुसार अंगिरा के तीन पुत्र हैं: बृहस्पति, उतथ्य और संवर्त। सर्वानुक्रमणी (p. 22) ऋग्वेद के छठे मण्डल के ऋषि को "बार्हस्पत्य भरद्वाज", यानी बृहस्पति के पुत्र भरद्वाज, कहती है। भरद्वाज गण का प्रवर "आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज" यही तीन पीढ़ियाँ हैं।

गौतम-शाखा के लिए सर्वानुक्रमणी वामदेव गौतम (मण्डल 4), नोधा गौतम (1.58) और गोतम राहूगण (1.74 से) के नाम देती है। प्रवरमञ्जरी (p. 3) गौतम-गणों में आयास्य, औचथ्य, औशिज, राहूगण, सोमराजकि, वामदेव और बृहदुक्थ गौतम गिनाती है।

कश्यप, अत्रि और अगस्त्य

  • कश्यप: महाभारत (आदि LXV–LXVI) के अनुसार मरीचि के पुत्र; सर्वानुक्रमणी (p. 29) ऋग्वेद 8.29 का एक ऋषि "कश्यप मारीच" बताती है।
  • अत्रि: महाभारत (आदि LXV) में ब्रह्मा के मानस-पुत्र; सर्वानुक्रमणी (p. 19) के अनुसार पाँचवाँ मण्डल "भौम अत्रि" का।
  • अगस्त्य: सर्वानुक्रमणी (p. 12) ऋग्वेद 1.166 पर मित्र-वरुण से कुंभ में अगस्त्य और वसिष्ठ के जन्म की कथा देती है। मत्स्य पुराण (अ. 202) के अनुसार उनके पुत्र इध्मवाह और दृढास्य क्रतु और पुलह ने गोद लिए।

सारांश तालिका

ये वंशावलियाँ अलग-अलग ग्रंथों से जोड़ी गई हैं। किसी एक ग्रंथ में यह पूरी तालिका एक साथ नहीं है, और कुछ कड़ियाँ (जैसे अत्रि के वंशज) हमें दो स्रोतों में नहीं मिलीं, इसलिए छोड़ी गई हैं।

कुलवंश की कड़ियाँस्रोत
भृगुभृगु → च्यवन → और्व → ऋचीक → जमदग्नि → राममहाभारत आदि LXVI; वन CXV–CXVI
विश्वामित्रकुशिक → गाधि → विश्वामित्रसर्वानुक्रमणी p. 14; महाभारत आदि CLXXV
वसिष्ठवसिष्ठ → शक्ति → पराशर → व्यासमत्स्य 201; महाभारत सभा XLV
आङ्गिरस (भरद्वाज)अंगिरा → बृहस्पति → भरद्वाजमहाभारत आदि LXVI; सर्वानुक्रमणी p. 22
कश्यपमरीचि → कश्यपमहाभारत आदि LXV; सर्वानुक्रमणी p. 29
अगस्त्यअगस्त्य → इध्मवाह, दृढास्य (गोद)मत्स्य 202

स्रोत

प्रमुख ऋषियों की वंश परंपराएँ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न