गोत्र — ऋषि, प्रवर और गण

गोत्र, प्रवर और गण का अर्थ, बौधायन के वचन सहित। 9 ऋषि-कुल, 73 गण, 3,140 गोत्र-नाम और 42 प्रमुख गोत्रों के पृष्ठ — गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900) से, पृष्ठ-संख्या सहित।

गोत्र क्या है?

गोत्र का अर्थ है ऋषि-वंश। बौधायन सूत्र के अनुसार विश्वामित्र, जमदग्नि, भरद्वाज, गौतम, अत्रि, वसिष्ठ और कश्यप — इन सात ऋषियों और आठवें अगस्त्य की संतान को गोत्र कहा जाता है। हर गोत्र के साथ उसका प्रवर बोला जाता है, यानी उन ऋषियों के नाम जिनसे वह वंश जुड़ा है।

ग्रंथ का वचन

सप्तानां सप्तऋषीणामगस्त्याष्टमानां यदपत्यं तद्गोत्रमित्युच्यते।

सात ऋषियों और आठवें अगस्त्य की जो संतान है, उसे गोत्र कहा जाता है।

— गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (The Principles of Pravara and Gotra), द्वितीय संस्करण, पृष्ठ 136 (प्रवरमञ्जरी, बौधायन का वचन) (archive.org leaf 176)

एक नज़र में

मूल गोत्रकार ऋषि (बौधायन)विश्वामित्र, जमदग्नि, भरद्वाज, गौतम, अत्रि, वसिष्ठ, कश्यप और आठवें अगस्त्य
बौधायन के अनुसार प्रवर49
ऋषि-कुल (ग्रंथ की तालिका)9
गण73 (इनमें 9 केवल प्रवरदर्पण में)
गण-सूचियों में दर्ज नाम3,140
प्रवर के सभी रूप (सूत्र-वार)141 — 1 ऋषि वाले 5, 2 ऋषि वाले 6, 3 ऋषि वाले 114, 5 ऋषि वाले 16
आधार-ग्रंथगोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900) — आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण और प्रवरदर्पण एक जगह

हिंदू धर्म में कितने गोत्र हैं?

गोत्राणां तु सहस्राणि प्रयुतान्यर्बुदानि च। ऊनपञ्चाशदेवैषां प्रवरा ऋषिदर्शनात्॥

गोत्र तो हज़ारों, लाखों, करोड़ों हैं; पर उनके प्रवर उनचास (49) ही हैं।

— गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (The Principles of Pravara and Gotra), द्वितीय संस्करण, पृष्ठ 136 (प्रवरमञ्जरी, बौधायन का वचन) (archive.org leaf 176)

इसका कोई एक अंक नहीं है, और यह बात स्वयं ग्रंथ कहते हैं। बौधायन का वचन है कि गोत्र तो हज़ारों, लाखों, करोड़ों हैं, पर उनके प्रवर उनचास ही हैं।

इसीलिए गोत्र-प्रवर ग्रंथ गोत्रों को गिनते नहीं, उन्हें "गणों" में बाँटते हैं — एक गण के सब गोत्रों का प्रवर एक होता है। इस पृष्ठ का आधार-ग्रंथ पाँच सूत्र-ग्रंथों और मत्स्य पुराण को मिलाकर नीचे दी गई संख्या तक पहुँचता है।

प्रवर क्या होता है?

एकं वृणीते द्वौ वृणीते त्रीन्वृणीते न चतुरो वृणीते पञ्च वृणीते न पञ्चातिवृणीते।

प्रवर में एक, दो, तीन या पाँच ऋषि बोले जाते हैं — चार नहीं, और पाँच से अधिक नहीं।

— गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (The Principles of Pravara and Gotra), द्वितीय संस्करण, पृष्ठ 26 (प्रवरमञ्जरी, श्रुति-वचन) (archive.org leaf 64)

प्रवरमञ्जरी के अनुसार प्रवर का अर्थ है "प्रार्थना"। यज्ञ में होता और अध्वर्यु यजमान के गोत्र-ऋषियों के नाम लेकर अग्नि का आह्वान करते हैं — होता एक क्रम में और अध्वर्यु उसके उलटे क्रम में।

प्रवर में ऋषियों की संख्या भी तय है। श्रुति कहती है कि एक, दो, तीन या पाँच ऋषि बोले जाते हैं — चार कभी नहीं, और पाँच से अधिक नहीं।

सगोत्र किसे कहते हैं?

एक एव ऋषिर्यावत्प्रवरेष्वनुवर्तते। तावत्समानगोत्रत्वमन्यत्र भृग्वङ्गिरसां गणात्॥

सात ऋषियों और आठवें अगस्त्य में से कोई एक ऋषि जब तक दो प्रवरों में साझा हो, तब तक वे समान गोत्र माने जाते हैं — भृगु और आङ्गिरस के गणों को छोड़कर।

— गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (The Principles of Pravara and Gotra), द्वितीय संस्करण, पृष्ठ 26 (प्रवरमञ्जरी, बौधायन का वचन) (archive.org leaf 64)

बौधायन का नियम है: सात ऋषियों (विश्वामित्र, जमदग्नि, भरद्वाज, गौतम, अत्रि, वसिष्ठ, कश्यप) और अगस्त्य में से कोई एक ऋषि अगर दो परिवारों के प्रवरों में साझा हो, तो वे समान गोत्र माने जाते हैं। प्रवरमञ्जरी के अनुसार जमदग्नि को छोड़कर बाक़ी भृगु-गण, और गौतम-भरद्वाज को छोड़कर बाक़ी आङ्गिरस-गण इस नियम से बाहर हैं, क्योंकि उनके प्रवर में इन आठ में से कोई ऋषि नहीं आता।

परंपरा में समान गोत्र और समान प्रवर वालों के बीच विवाह वर्जित माना गया है। यह धार्मिक परंपरा है; हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 गोत्र या प्रवर के आधार पर विवाह नहीं रोकता।

अपना गोत्र कैसे पक्का करें

गोत्र परिवार की परंपरा से आता है, इसलिए सबसे पक्का स्रोत घर के बड़े, कुल-पुरोहित और पुराने विवाह या पूजा के लेख हैं। केवल उपनाम (surname) से गोत्र तय नहीं होता — एक ही उपनाम के परिवार अलग-अलग गोत्र के हो सकते हैं।

गोत्र के साथ परिवार का प्रवर भी पूछ लें। एक ही गोत्र-नाम कई गणों में मिलता है, और प्रवर से ही पता चलता है कि आपका परिवार किस गण का है।

कुल → प्रवर → गण → गोत्र

ग्रंथ की तालिका इसी क्रम में चलती है: पहले ऋषि-कुल, फिर हर कुल के प्रवर, हर प्रवर का एक गण, और हर गण में दर्ज गोत्र-नाम। उदाहरण: कश्यप-कुल → प्रवर “काश्यप, आवत्सार, नैध्रुव” → निध्रुव गण → उसमें दर्ज 382 नाम।

सभी गणों और उनके प्रवरों की पूरी सूची: प्रवर — सभी 73 गण, सूत्र-वार

लेख और tools

9 ऋषि-कुल

प्रमुख गोत्र (42)

हर पृष्ठ पर गोत्र का गण, सूत्र-वार प्रवर, ग्रंथों के मतभेद और उसी गण के बाक़ी नाम दिए गए हैं।

स्रोत

गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न