भार्गव — एक कुल, कई गण
ग्रंथ की तालिका में भृगु-कुल के 11 गण हैं — जामदग्न्य वत्स, अजामदग्न्य वत्स, आर्ष्टिषेण, बिद, यस्क-वीतहव्य, श्यैत, मित्रयु, शुनक और तीन छोटे गण। हर गण का प्रवर अलग है।
दो गण अपवाद हैं। मित्रयु गण में आश्वलायन और आपस्तम्ब केवल "वाध्र्यश्व" बोलते हैं, और शुनक गण में चारों सूत्र केवल "गार्त्समद"। पर इन दोनों गणों के दूसरे रूपों में भी पहले भार्गव आता है।
अपना गण कैसे पहचानें
अगर परिवार में केवल "भार्गव" गोत्र बोला जाता है, तो प्रवर से गण पहचाना जा सकता है। परिवार जो प्रवर बोलता है, उसे नीचे की तालिकाओं से मिलाइए।
प्रवर याद न हो तो घर के बड़ों, कुल-पुरोहित या पुराने विवाह-पत्रों से पूछें।
प्रवर — गण 1 (जामदग्न्या वत्साः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| भार्गव · च्यावन · आप्नवान · और्व · जामदग्न्य | 5 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
| भार्गव · और्व · जामदग्न्य | 3 | आपस्तम्ब | विकल्प |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Chyavana, Apnuvana, Aurva, Jamadagni”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
प्रवर — गण 2 (अजामदग्न्या वत्साः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| भार्गव · च्यावन · आप्नवान | 3 | आश्वलायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
प्रवर — गण 3 (आर्ष्टिषेणाः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| भार्गव · च्यावन · आप्नवान · आर्ष्टिषेण · आनूप | 5 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
| भार्गव · आर्ष्टिषेण · आनूप | 3 | आपस्तम्ब | विकल्प |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Chyavana, Apnuvana, Arshtishena, Rupi”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।
प्रवर — गण 4 (बिदाः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| भार्गव · च्यावन · आप्नवान · और्व · बैद | 5 | आश्वलायन, बौधायन | तालिका का मुख्य |
| भार्गव · और्व · जामदग्न्य | 3 | कात्यायन | इस ग्रंथ का मुख्य |
| भार्गव · च्यावन · आप्नवान | 3 | मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Chyavana, Apnuvana”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
प्रवर — गण 5 (यस्काः वीतहव्याः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| भार्गव · वैतहव्य · सावेदस | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Vitahavya, Raivasa, Vaivasa”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।
प्रवर — गण 6 (श्यैताः अथवा वैन्याः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| भार्गव · वैन्य · पार्थ | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन | तालिका का मुख्य |
प्रवर — गण 7 (मित्रयुवाः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वाध्र्यश्व | 1 | आश्वलायन, आपस्तम्ब | तालिका का मुख्य |
| भार्गव · वाध्र्यश्व · दैवोदास | 3 | बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
| भार्गव · दैवोदास · वाध्र्यश्व | 3 | आश्वलायन | विकल्प |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Badhryashva, Divodasa”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
प्रवर — गण 8 (शुनकाः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| गार्त्समद | 1 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन | तालिका का मुख्य |
| भार्गव · शौनहोत्र · गार्त्समद | 3 | आश्वलायन | विकल्प |
| शौनक | 1 | बौधायन | विकल्प |
| भार्गव · गार्त्समद | 2 | कात्यायन, मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Gritsamada”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
प्रवर — गण 9 (वत्सपुरोधसौ)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| भार्गव · च्यावन · आप्नवान · वात्स · पौरोधस | 5 | प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) | तालिका का मुख्य |
| भार्गव · वात्स · पौरोधस | 3 | प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) | विकल्प |
प्रवर — गण 10 (वैजवनैमथितौ)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| भार्गव · च्यावन · आप्नवान · वैजव · नैमथित | 5 | प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) | तालिका का मुख्य |
प्रवर — गण 11 (वेदविश्वज्योतिषः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| भार्गव · शाठर · माठर | 3 | प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) | तालिका का मुख्य |
पूजा, संकल्प और विवाह में भार्गव गोत्र
संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। भार्गव गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह भार्गवआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — जो इस कुल में गण के अनुसार अलग है (ऊपर की तालिका देखें)।
ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।
