भार्गव गोत्र

भार्गव नाम भृगु-कुल का है। गोत्र-प्रवर ग्रंथों में भृगु-कुल के 11 गण हैं, और लगभग सबके प्रवर में पहला नाम "भार्गव" आता है। जानिए हर गण का प्रवर और अपना गण कैसे पहचानें।

संक्षेप में

"भार्गव" का अर्थ है भृगु के वंश का। गोत्र-प्रवर ग्रंथों में भार्गव नाम का कोई एक गण नहीं है — यह पूरे भृगु-कुल का नाम है, जिसमें 11 गण हैं। लगभग सब गणों के प्रवर में पहला ऋषि भार्गव है। इसलिए भार्गव परिवार को अपना गण अलग से पहचानना पड़ता है।

मुख्य जानकारी

गोत्रभार्गव (Bhargav)
अन्य नाम / वर्तनीभृगु, भार्गव, Bhargava, Bhrigu
ऋषि-कुलभृगु
गोत्रकार ऋषिमहर्षि जमदग्नि
गणभृगु-कुल के सभी 11 गण (गण 1–11)
मुख्य प्रवरभार्गव, च्यावन, आप्नवान, और्व, जामदग्न्य (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण)

भार्गव — एक कुल, कई गण

ग्रंथ की तालिका में भृगु-कुल के 11 गण हैं — जामदग्न्य वत्स, अजामदग्न्य वत्स, आर्ष्टिषेण, बिद, यस्क-वीतहव्य, श्यैत, मित्रयु, शुनक और तीन छोटे गण। हर गण का प्रवर अलग है।

दो गण अपवाद हैं। मित्रयु गण में आश्वलायन और आपस्तम्ब केवल "वाध्र्यश्व" बोलते हैं, और शुनक गण में चारों सूत्र केवल "गार्त्समद"। पर इन दोनों गणों के दूसरे रूपों में भी पहले भार्गव आता है।

अपना गण कैसे पहचानें

अगर परिवार में केवल "भार्गव" गोत्र बोला जाता है, तो प्रवर से गण पहचाना जा सकता है। परिवार जो प्रवर बोलता है, उसे नीचे की तालिकाओं से मिलाइए।

प्रवर याद न हो तो घर के बड़ों, कुल-पुरोहित या पुराने विवाह-पत्रों से पूछें।

प्रवर — गण 1 (जामदग्न्या वत्साः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · च्यावन · आप्नवान · और्व · जामदग्न्य5आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
भार्गव · और्व · जामदग्न्य3आपस्तम्बविकल्प

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Chyavana, Apnuvana, Aurva, Jamadagni”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

प्रवर — गण 2 (अजामदग्न्या वत्साः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · च्यावन · आप्नवान3आश्वलायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

प्रवर — गण 3 (आर्ष्टिषेणाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · च्यावन · आप्नवान · आर्ष्टिषेण · आनूप5आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
भार्गव · आर्ष्टिषेण · आनूप3आपस्तम्बविकल्प

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Chyavana, Apnuvana, Arshtishena, Rupi”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।

प्रवर — गण 4 (बिदाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · च्यावन · आप्नवान · और्व · बैद5आश्वलायन, बौधायनतालिका का मुख्य
भार्गव · और्व · जामदग्न्य3कात्यायनइस ग्रंथ का मुख्य
भार्गव · च्यावन · आप्नवान3मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Chyavana, Apnuvana”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

प्रवर — गण 5 (यस्काः वीतहव्याः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · वैतहव्य · सावेदस3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Vitahavya, Raivasa, Vaivasa”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।

प्रवर — गण 6 (श्यैताः अथवा वैन्याः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · वैन्य · पार्थ3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायनतालिका का मुख्य

प्रवर — गण 7 (मित्रयुवाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वाध्र्यश्व1आश्वलायन, आपस्तम्बतालिका का मुख्य
भार्गव · वाध्र्यश्व · दैवोदास3बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य
भार्गव · दैवोदास · वाध्र्यश्व3आश्वलायनविकल्प

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Badhryashva, Divodasa”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

प्रवर — गण 8 (शुनकाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
गार्त्समद1आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायनतालिका का मुख्य
भार्गव · शौनहोत्र · गार्त्समद3आश्वलायनविकल्प
शौनक1बौधायनविकल्प
भार्गव · गार्त्समद2कात्यायन, मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Gritsamada”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

प्रवर — गण 9 (वत्सपुरोधसौ)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · च्यावन · आप्नवान · वात्स · पौरोधस5प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)तालिका का मुख्य
भार्गव · वात्स · पौरोधस3प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)विकल्प

प्रवर — गण 10 (वैजवनैमथितौ)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · च्यावन · आप्नवान · वैजव · नैमथित5प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)तालिका का मुख्य

प्रवर — गण 11 (वेदविश्वज्योतिषः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · शाठर · माठर3प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)तालिका का मुख्य

पूजा, संकल्प और विवाह में भार्गव गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। भार्गव गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह भार्गवआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — जो इस कुल में गण के अनुसार अलग है (ऊपर की तालिका देखें)।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

भार्गव गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न