विश्वामित्र — प्रवर में "वैश्वामित्र" वाले 17 गण
| गण 41 — औदलाः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, दैवरात, औदल (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण) |
|---|---|
| गण 42 — दैवतरसाः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, दैवश्रवस, दैवतरस (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन) |
| गण 43 — धानञ्जयाः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, माधुच्छन्दस, धानञ्जय (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन) |
| गण 44 — आजाः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, माधुच्छन्दस, आज (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन) |
| गण 45 — रौहिणाः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, माधुच्छन्दस, रौहिण (आश्वलायन) |
| गण 46 — आष्टकाः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, माधुच्छन्दस, आष्टक (आश्वलायन) |
| गण 47 — पौरणाः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, दैवरात, पौरण (आश्वलायन) |
| गण 48 — आक्षीलाः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, कात्य, आक्षील (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन) |
| गण 49 — कौशिकाः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, आघमर्षण, कौशिक (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन) |
| गण 50 — रैवणाः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, गाधिन, रैवण (आश्वलायन) |
| गण 51 — क्रथकाः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, रौत्थक, रैवण (बौधायन) |
| गण 52 — वैणवाः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, गाथिन, वैणव (आश्वलायन) |
| गण 53 — शालङ्कायनाः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, शालङ्कायन, कौशिक (आश्वलायन) |
| गण 54 — इन्द्रकौशिकाः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, ऐन्द्र, कौशिक (आश्वलायन) |
| गण 55 — साहुलाः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, साहुल, माहुल (प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)) |
| गण 56 — हिरण्यरेतसः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, हैरण्यरेतस (प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)) |
| गण 57 — सुवर्णरेतसः | विश्वामित्र-कुल · वैश्वामित्र, कापातरस (प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)) |
गोत्र-पृष्ठ: विश्वामित्र, कौशिक, गालव, धनञ्जय, लोहित, कात्यायन
जमदग्नि — प्रवर में "जामदग्न्य" वाले 2 गण
| गण 1 — जामदग्न्या वत्साः | भृगु-कुल · भार्गव, च्यावन, आप्नवान, और्व, जामदग्न्य (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण) |
|---|---|
| गण 4 — बिदाः | भृगु-कुल · भार्गव, च्यावन, आप्नवान, और्व, बैद (आश्वलायन, बौधायन) · यह ऋषि केवल किसी विकल्प-रूप में |
गोत्र-पृष्ठ: वत्स, शौनक, माण्डव्य, मार्कण्डेय, सावर्णि, गालव, पुलस्त्य, जमदग्नि
भरद्वाज — प्रवर में "भारद्वाज" वाले 5 गण
| गण 23 — मातवचसः | भारद्वाज (आङ्गिरस)-कुल · आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, वान्दन, मातवचस (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन) |
|---|---|
| गण 24 — भारद्वाजाः | भारद्वाज (आङ्गिरस)-कुल · आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण) |
| गण 25 — शैन्याः | भारद्वाज (आङ्गिरस)-कुल · आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, गार्ग्य, शैन्य (आश्वलायन, बौधायन, मत्स्य पुराण) |
| गण 27 — आत्मभुवः | भारद्वाज (आङ्गिरस)-कुल · आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, मान्त्रवर, आत्मभुव (मत्स्य पुराण) |
| गण 28 — शौङ्गशैशिरयः | भारद्वाज (आङ्गिरस)-कुल · आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, कात्य, आत्कील (आश्वलायन, आपस्तम्ब) |
गौतम — प्रवर में "गौतम" वाले 11 गण
| गण 12 — आयास्या गौतमाः | गौतम (आङ्गिरस)-कुल · आङ्गिरस, आयास्य, गौतम (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन) |
|---|---|
| गण 13 — उचथ्या गौतमाः | गौतम (आङ्गिरस)-कुल · आङ्गिरस, औचथ्य, गौतम (आश्वलायन, आपस्तम्ब, कात्यायन) |
| गण 14 — रहूगणाः शरद्वन्ताः | गौतम (आङ्गिरस)-कुल · आङ्गिरस, राहूगण्य, गौतम (आश्वलायन) |
| गण 15 — सोमराजकाः | गौतम (आङ्गिरस)-कुल · आङ्गिरस, सौमराज्य, गौतम (आश्वलायन) |
| गण 16 — वामदेवाः | गौतम (आङ्गिरस)-कुल · आङ्गिरस, वामदेव्य, गौतम (आश्वलायन) |
| गण 17 — बृहदुक्थाः | गौतम (आङ्गिरस)-कुल · आङ्गिरस, बार्हदुक्थ, गौतम (आश्वलायन, आपस्तम्ब) |
| गण 18 — कक्षीवन्तः | गौतम (आङ्गिरस)-कुल · आङ्गिरस, औचथ्य, औशिज, गौतम, काक्षीवत (आश्वलायन) |
| गण 19 — दीर्घतमसः | गौतम (आङ्गिरस)-कुल · आङ्गिरस, औचथ्य, दैर्घतमस (आश्वलायन) · यह ऋषि केवल किसी विकल्प-रूप में |
| गण 20 — औशनसाः | गौतम (आङ्गिरस)-कुल · आङ्गिरस, गौतम, औशनस (बौधायन) |
| गण 21 — कारेणुपालाः | गौतम (आङ्गिरस)-कुल · आङ्गिरस, गौतम, कारेणुपाल (बौधायन) |
| गण 22 — राघवाः | गौतम (आङ्गिरस)-कुल · आङ्गिरस, राघव, गौतम (प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)) |
गोत्र-पृष्ठ: गौतम
अत्रि — प्रवर में "आत्रेय" वाले 7 गण
| गण 35 — श्यावाश्वाः | अत्रि-कुल · आत्रेय, आर्चनानस, श्यावाश्व (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण) |
|---|---|
| गण 36 — गविष्ठिराः | अत्रि-कुल · आत्रेय, गाविष्ठिर, पौर्वातिथ (आश्वलायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण) |
| गण 37 — अतिथयः | अत्रि-कुल · आत्रेय, आर्चनानस, पौर्वातिथ (बौधायन) |
| गण 38 — वाग्भूतकाः | अत्रि-कुल · आत्रेय, आर्चनानस, वाग्भूतक (बौधायन) |
| गण 39 — पुत्रिकापुत्राः | अत्रि-कुल · आत्रेय, वामरथ्य, पौत्रिक (कात्यायन, मत्स्य पुराण) |
| गण 40 — सुमङ्गलाः | अत्रि-कुल · आत्रेय, सौमङ्गल, श्यावाश्व (प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)) |
| गण 67 — जातूकर्ण्याः | वसिष्ठ-कुल · वासिष्ठ, आत्रेय, जातूकर्ण्य (मत्स्य पुराण) |
गोत्र-पृष्ठ: अत्रि, कृष्णात्रेय, जातूकर्ण्य
वसिष्ठ — प्रवर में "वासिष्ठ" वाले 6 गण
| गण 62 — लौगाक्षयः | कश्यप-कुल · काश्यप, आवत्सार, वासिष्ठ (बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण) |
|---|---|
| गण 63 — वासिष्ठाः | वसिष्ठ-कुल · वासिष्ठ (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण) |
| गण 64 — उपमन्यवः | वसिष्ठ-कुल · वासिष्ठ, आभरद्वसव्य, ऐन्द्रप्रमद (आश्वलायन, कात्यायन) |
| गण 65 — पराशराः | वसिष्ठ-कुल · वासिष्ठ, शाक्त्य, पाराशर्य (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण) |
| गण 66 — कुण्डिनाः | वसिष्ठ-कुल · वासिष्ठ, मैत्रावरुण, कौण्डिन्य (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण) |
| गण 67 — जातूकर्ण्याः | वसिष्ठ-कुल · वासिष्ठ, आत्रेय, जातूकर्ण्य (मत्स्य पुराण) |
गोत्र-पृष्ठ: वशिष्ठ, जातूकर्ण्य, आलम्भायन, उपमन्यु, शाक्त्य, पराशर, कौण्डिन्य
कश्यप — प्रवर में "काश्यप" वाले 5 गण
| गण 58 — कश्यपाः | कश्यप-कुल · काश्यप, आवत्सार, आसित (आश्वलायन) |
|---|---|
| गण 59 — शण्डिलाः | कश्यप-कुल · शाण्डिल, आसित, दैवल (आश्वलायन, कात्यायन) · यह ऋषि केवल किसी विकल्प-रूप में |
| गण 60 — रेभाः | कश्यप-कुल · काश्यप, आवत्सार, रैभ्य (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन) |
| गण 61 — निध्रुवाः | कश्यप-कुल · काश्यप, आवत्सार, नैध्रुव (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण) |
| गण 62 — लौगाक्षयः | कश्यप-कुल · काश्यप, आवत्सार, वासिष्ठ (बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण) |
अगस्त्य — प्रवर में "आगस्त्य" वाले 6 गण
| गण 68 — सौमवाहाः | अगस्त्य-कुल · आगस्त्य, दार्ढ्यच्युत, ऐध्मवाह (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन) |
|---|---|
| गण 69 — साम्भवाहाः | अगस्त्य-कुल · आगस्त्य, दार्ढ्यच्युत, साम्भवाह (बौधायन) |
| गण 70 — याज्ञवाहाः | अगस्त्य-कुल · आगस्त्य, दार्ढ्यच्युत, याज्ञवाह (बौधायन) |
| गण 71 — मायोभुवाः | अगस्त्य-कुल · आगस्त्य, माहेन्द्र, मायोभुव (कात्यायन, मत्स्य पुराण) |
| गण 72 — पौरणाः | अगस्त्य-कुल · आगस्त्य, पौर्णमास, पौरण (कात्यायन, मत्स्य पुराण) |
| गण 73 — पाणिकाः | अगस्त्य-कुल · आगस्त्य, हैमवर्च, हैमोदक (प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)) |
FAQ
ऋषि से गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बौधायन के अनुसार आठ: विश्वामित्र, जमदग्नि, भरद्वाज, गौतम, अत्रि, वसिष्ठ, कश्यप और अगस्त्य। यह वचन प्रवरमञ्जरी (पृष्ठ 136) में उद्धृत है।
बौधायन की सूची में वे नहीं हैं। प्रवरमञ्जरी (पृष्ठ 15) बताती है कि जमदग्नि-भिन्न भृगु और गौतम-भरद्वाज-भिन्न आङ्गिरस इन आठ की संतान में नहीं गिने जाते, इसीलिए सगोत्र-नियम उन पर अलग है।
प्रवर में एक से अधिक ऋषि होते हैं। जैसे लौगाक्षि गण के प्रवर में काश्यप और वासिष्ठ दोनों हैं, इसलिए वह गण कश्यप और वसिष्ठ — दोनों की सूची में दिखता है।
बौधायन की सूची के सात ऋषि गोत्रकार हैं। पुराणों में सप्तर्षियों की दूसरी सूचियाँ भी मिलती हैं, जिनमें पुलस्त्य, पुलह, क्रतु जैसे नाम हैं — वे अलग परंपराएँ हैं।
नहीं। एक ही उपनाम के परिवार अलग-अलग गोत्र के हो सकते हैं, और एक ही गोत्र अलग-अलग उपनामों में मिलता है। अपना गोत्र पक्का करने के लिए घर के बड़ों, कुल-पुरोहित या पुराने विवाह और पूजा के लेखों से पूछें।
