गण 36 — गविष्ठिराः
गविष्ठिराः गण अत्रि ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आत्रेय, गाविष्ठिर, पौर्वातिथ। सूत्रों में इसके 1 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 29 नाम दर्ज किए हैं।
संक्षेप में
गविष्ठिराः गण अत्रि ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आत्रेय, गाविष्ठिर, पौर्वातिथ। सूत्रों में इसके 1 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 29 नाम दर्ज किए हैं।
प्रवर
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आत्रेय · गाविष्ठिर · पौर्वातिथ | 3 | आश्वलायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
| आत्रेय · आर्चनानस · गाविष्ठिर | 3 | आपस्तम्ब, बौधायन | इस ग्रंथ का मुख्य |
इस गण में दर्ज नाम (29)
गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।
- 1अवरोधकृत्का
- 2उर्णनाभिःका
- 3ऊर्णनाभिःम
- 4और्णनाभिःका
- 5गविष्ठिरःम
- 6गविष्ठिराःआश्व, आप, बो, का
- 7दक्षःका
- 8दाक्षिःम
- 9दार्णकृत्का
- 10नालन्दनःका
- 11पार्णलिःम
- 12पार्णविःम
- 13बलिःम
- 14बीजवापीम
- 15भलन्दनःम
- 16भालवनिःका
- 17मौञ्जकाशिःका
- 18मौञ्जकेशःका
- 19मौञ्जकेशःम
- 20लाक्षिःका
- 21वैजवापनःका
- 22वैजवापिःका
- 23वैतकिःका
- 24व्याणिःका
- 25व्यालिखःका
- 26शिरीषःम
- 27शिलार्दनिःम
- 28श्रिमिश्वः ?का
- 29सुपिः ?का
संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।
अत्रि-कुल के अन्य गण
स्रोत
पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 250 (archive.org leaf 290)।
