केवल-आङ्गिरस-कुल के गण और प्रवर

गोत्र-प्रवर ग्रंथों की तालिका में केवल-आङ्गिरस ऋषि-कुल के 6 गण हैं (गण 29–34)। हर गण का अपना प्रवर है, और कई गणों में अलग-अलग सूत्र प्रवर के अलग रूप बताते हैं। नीचे हर गण का प्रवर, ग्रंथ के अनुसार, दिया गया है।

संक्षेप में

गोत्र-प्रवर ग्रंथों की तालिका में केवल-आङ्गिरस ऋषि-कुल के 6 गण हैं (गण 29–34)। हर गण का अपना प्रवर है, और कई गणों में अलग-अलग सूत्र प्रवर के अलग रूप बताते हैं। नीचे हर गण का प्रवर, ग्रंथ के अनुसार, दिया गया है।

एक नज़र में

गण 29 — रथीतराःआङ्गिरस, पार्षदश्व, वैरूप · 24 नाम
गण 30 — मुद्गलाःआङ्गिरस, भार्म्यश्व, मौद्गल्य · 25 नाम
गण 31 — विष्णुवृद्धाःआङ्गिरस, पौरुकुत्स, त्रासदस्यव · 42 नाम
गण 32 — यौवनाश्वाःआङ्गिरस, आम्बरीष, यौवनाश्व · 42 नाम
गण 33 — काण्वाःआङ्गिरस, आजमीढ, काण्व · 41 नाम
गण 34 — संकृतयःआङ्गिरस, साङ्कृत्य, गौरुवीत · 42 नाम

गण 29 — रथीतराः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · पार्षदश्व · वैरूप3आश्वलायनतालिका का मुख्य
आष्टादंष्ट्र · पार्षदश्व · वैरूप3आश्वलायनविकल्प
आङ्गिरस · वैरूप · पार्षदश्व3आपस्तम्ब, बौधायन, मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य
आङ्गिरस · पार्षदश्व · राथीतर3कात्यायनइस ग्रंथ का मुख्य
आष्टादंष्ट्र · वैरूप · पार्षदश्व3आपस्तम्बविकल्प
आङ्गिरस · वैरूप · राथीतर3बौधायन, मत्स्य पुराणविकल्प

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Virupa, Rathitara”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

आश्वलायन मुख्य प्रवर "पृषदश्व" परिवारों के लिए देते हैं, और बाक़ी ग्रंथ रथीतरों के लिए.

इस गण में ग्रंथ ने 24 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

गण 30 — मुद्गलाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · भार्म्यश्व · मौद्गल्य3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
तार्क्ष्य · भार्म्यश्व · मौद्गल्य3आश्वलायन, आपस्तम्बविकल्प
आङ्गिरस · ताण्डि · मौद्गल्य3मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य
आङ्गिरस · मत्स्यदग्ध · मौद्गल्य3मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Matsyadagdha, Mudgala · Angira, Tandya, Maudgalya”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।

मत्स्य पुराण के दो रूप हैं: हंसजिह्व आदि के लिए "आङ्गिरस, ताण्डि, मौद्गल्य" (ग्रंथ में छपाई अस्पष्ट, "ताव्य" जैसी; अनुवादों में ताण्डि/Tandya), और सत्यमुग्रि आदि के लिए — जहाँ यह ग्रंथ "भार्म्यश्व" पढ़ता है, पर मत्स्य के अंग्रेज़ी और हिन्दी दोनों अनुवाद "मत्स्यदग्ध" पढ़ते हैं.

इस गण में ग्रंथ ने 25 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · मौद्गल्य गोत्र

गण 31 — विष्णुवृद्धाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · पौरुकुत्स · त्रासदस्यव3आश्वलायन, बौधायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

इस गण में ग्रंथ ने 42 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

गण 32 — यौवनाश्वाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · आम्बरीष · यौवनाश्व3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
मान्धात्र · आम्बरीष · यौवनाश्व3आश्वलायन, आपस्तम्बविकल्प
आङ्गिरस · मान्धात्र · कौत्स3आपस्तम्बइस ग्रंथ का मुख्य

आपस्तम्ब "आङ्गिरस, मान्धात्र, कौत्स" कुत्स परिवारों के लिए बताते हैं.

इस गण में ग्रंथ ने 42 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · कुत्स गोत्र · हरित गोत्र

गण 33 — काण्वाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · आजमीढ · काण्व3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
आङ्गिरस · घौर · काण्व3आश्वलायनविकल्प

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Ajamidha, Kanva”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में ग्रंथ ने 41 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · कण्व गोत्र · मार्कण्डेय गोत्र

गण 34 — संकृतयः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · साङ्कृत्य · गौरुवीत3आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
आङ्गिरस · गौरुवीत · साङ्कृत्य3आश्वलायनइस ग्रंथ का मुख्य
शाक्त्य · गौरुवीत · साङ्कृत्य3आश्वलायनविकल्प

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Samkriti, Gauraviti”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में ग्रंथ ने 42 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · सांकृत्य गोत्र

केवल-आङ्गिरस-कुल के गोत्र-पृष्ठ

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 240–247 (archive.org leaf 280–287)। मत्स्य पुराण से मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (1917).