कुत्स गोत्र

कुत्स गोत्र आङ्गिरस-परंपरा के यौवनाश्व गण में है। इसका प्रवर आङ्गिरस, आम्बरीष, यौवनाश्व है; आपस्तम्ब कुत्सों के लिए "आङ्गिरस, मान्धात्र, कौत्स" देते हैं। हरित गोत्र भी इसी गण में है।

संक्षेप में

कुत्स गोत्र आङ्गिरस-परंपरा का गोत्र है। ग्रंथ की तालिका में यह यौवनाश्व गण में है, जिसका प्रवर आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन और मत्स्य के अनुसार है — आङ्गिरस, आम्बरीष, यौवनाश्व। आपस्तम्ब कुत्स परिवारों के लिए अलग प्रवर भी देते हैं: आङ्गिरस, मान्धात्र, कौत्स।

मुख्य जानकारी

गोत्रकुत्स (Kutsa)
अन्य नाम / वर्तनीकौत्स, कुत्स, Kutsa, Kautsa
ऋषि-कुलकेवल-आङ्गिरस
ऋषि-पृष्ठमहर्षि कुत्स
गणगण 32 — यौवनाश्वाः
मुख्य प्रवरआङ्गिरस, आम्बरीष, यौवनाश्व (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, मत्स्य पुराण)
ग्रंथ-सूची मेंगण 32: "कुत्सः" (आश्वलायन); गण 32: "कुत्साः" (आपस्तम्ब)

कुत्स गोत्र — परिचय

ग्रंथ की तालिका में "कुत्सः" आश्वलायन की सूची में और "कुत्साः" आपस्तम्ब की सूची में है। दोनों यौवनाश्व गण में हैं, जिसमें 42 नाम दर्ज हैं।

इसी गण में हरित, मान्धाता, दर्भ और शङ्ख जैसे नाम भी हैं। प्रवर में आम्बरीष और यौवनाश्व (मान्धाता) के नाम इस गण की पहचान हैं।

प्रवर — गण 32 (यौवनाश्वाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · आम्बरीष · यौवनाश्व3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
मान्धात्र · आम्बरीष · यौवनाश्व3आश्वलायन, आपस्तम्बविकल्प
आङ्गिरस · मान्धात्र · कौत्स3आपस्तम्बइस ग्रंथ का मुख्य

इस गण में दर्ज नाम (42)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। कुत्स गोत्र की पंक्तियाँ अलग रंग में है।

  1. 1कारीषयःबो
  2. 2कुत्सःआश्व
  3. 3कुत्साःआप
  4. 4कौतपाःबो
  5. 5कौलयःबो
  6. 6क्षेमवेगःम
  7. 7गवेरणिःम
  8. 8ज्ञात्वायनःम
  9. 9दर्भ्यःबो
  10. 10दर्भःआश्व
  11. 11दर्भःबो
  12. 12नैमिश्रयःबो
  13. 13पिङ्गःआश्व
  14. 14पौगलःम
  15. 15पौडलःबो
  16. 16पौलयःबो
  17. 17भैमगवःआश्व
  18. 18भैमगवःबो
  19. 19भैरवाःबो
  20. 20मण्डकारयःबो
  21. 21माण्डिकारयःबो
  22. 22मत्यायुःबो
  23. 23ममनायुःबो
  24. 24महोदरःबो
  25. 25माण्डिमालाःम
  26. 26माधूयःबो
  27. 27मान्धाताबो
  28. 28मान्धातुःबो
  29. 29मिश्रोदनःबो
  30. 30मिश्रोदराःबो
  31. 31लावादरःबो
  32. 32वालोदरःबो
  33. 33वाश्यःम
  34. 34वास्यमालिःम
  35. 35शङ्खःआश्व
  36. 36शाखदर्भिःम
  37. 37साङ्ख्यःबो
  38. 38सौभागःबो
  39. 39हरिःम
  40. 40हरितःआश्व, बो
  41. 41हरिताःआप
  42. 42हरितवास्यःम

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

गण 32 — यौवनाश्वाः का पूरा पृष्ठ

इसी गण के अन्य गोत्र-पृष्ठ

पूजा, संकल्प और विवाह में कुत्स गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। कुत्स गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह कुत्सआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप आङ्गिरस, आम्बरीष, यौवनाश्व है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, मत्स्य पुराण)।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

कुत्स गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न