गोत्र, कुल, जाति और उपनाम

गोत्र और कुल, वंश, परिवार, कुलदेवता, जाति, समुदाय और उपनाम (surname) में अंतर; शास्त्र में कुलदेवता-पूजन; और चित्पावन, गौड़ सारस्वत, कऱ्हाडे जैसे समाजों के गोत्र और कुलदेवी — ग्रंथों और 1880–1922 के ऐतिहासिक अभिलेखों से, दोनों को अलग-अलग बताते हुए।

संक्षेप में

गोत्र ऋषि-वंश है; कुल, वंश और परिवार उससे छोटे घेरे हैं; कुलदेवता परिवार का देवता है; और जाति, समुदाय और उपनाम अलग सामाजिक व्यवस्थाएँ हैं। ग्रंथ गोत्र का नियम देते हैं, उपनाम या जाति का नहीं — इसलिए उपनाम से गोत्र तय नहीं होता।

लेख (12)

ब्रिटिश-काल के जनगणना-ग्रंथों (Russell 1916, Crooke 1896, Enthoven 1920–22, Ratnagiri Gazetteer 1880) को हमने केवल ऐतिहासिक अभिलेख के रूप में लिया है — उनकी भाषा उद्धृत नहीं की, और उनकी स्थिति को आज की स्थिति नहीं कहा।

आगे पढ़ें