14 गोत्र और उनके प्राचीन उपनाम
Ratnagiri Gazetteer (1880, p. 111 की टिप्पणी) यह सूची Dr. Wilson की "Indian Caste" से देता है। गोत्रों के नाम ग्रंथ में जैसे छपे हैं, वैसे ही दिए गए हैं:
| गोत्र | अभिलेख में दर्ज प्राचीन उपनाम |
|---|---|
| काश्यप | लेले (Lele), गानू (Ganu), जोग (Jog), लवाटे (Lavate), गोखले (Gokhale) |
| शाण्डिल्य | सोमण (Soman), गांगल (Gangal), भाटे (Bhate), गणपुले (Ganpule), दामले (Damle), जोशी (Joshi), परचुरे (Parchure) |
| वासिष्ठ | साठे (Sathe), बोडस (Bodas), ओक (Ok), बापट (Bapat), बागुल (Bagul), धारू (Dharu), गोगटे (Gogte), भाभे (Bhabhe), पोंक्षे (Pongshe), साठये (Sathaye), गौंडये (Goundye); एक नाम स्कैन में अस्पष्ट |
| विष्णुवर्धन | किडमिडे (Kidmide), नेने (Nene), परांजपे (Paranjpe), मेंहदळे (Menhadale) |
| कौण्डिन्य | पटवर्धन (Patvardhan), फणसे (Phanse) |
| नित्युन्दन | वैशम्पायन (Vaishampayan); एक नाम स्कैन में अस्पष्ट |
| भारद्वाज | आचवल (Achavla), टेणे (Tene), दर्वे (Darve), गांधारे (Gandhare), घांघुरडे (Ghanghurade), रानडे (Ranade) |
| गार्ग्य | कर्वे (Karve), गाडगीळ (Gadgil), लोंढे (Londhe), माठे (Mathe), डाबके (Dabke) |
| कपि | लिमये (Limaye); एक नाम स्कैन में अस्पष्ट |
| जामदग्न्य | पेंडसे (Pendse), कुंटे (Kunte) |
| वत्स | मालसे (Malse) |
| बाभ्रव्य | बाळ (Bal), बेहेरे (Behere) |
| कौशिक | गद्रे (Gadre), बामा (Bama), भावे (Bhave), वाड (Vad), आपटे (Apte) |
| अत्रि | चितळे (Chitale), आठवले (Athavle), भाडभोके (Bhadbhoke) |
प्राचीन और आधुनिक उपनाम
Gazetteer लिखता है कि इन 60 प्राचीन उपनामों के अलावा 244 आधुनिक उपनाम चलन में हैं — कुल 304। प्राचीन उपनामों में 37 आश्वलायन (ऋग्वेद) शाखा के और 23 तैत्तिरीय (कृष्ण यजुर्वेद) शाखा के हैं; आधुनिक उपनामों में 178 आश्वलायन और 66 तैत्तिरीय। पेशवा परिवार का उपनाम "भट" आधुनिक उपनामों में गिना गया है।
स्कैन किए पृष्ठ पर 58 नाम गिने जा सकते हैं, जिनमें 3 पढ़ने योग्य नहीं — इसलिए तालिका में 55 नाम हैं। आधुनिक 244 उपनामों के गोत्र इस अभिलेख में नहीं दिए गए; यदि आपका उपनाम ऊपर नहीं है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि वह चित्पावन उपनाम नहीं।
कुलदेवी, उपासना और तीर्थ
- कुलदेवी: जोगाई या जोगेश्वरी (Enthoven 1920, खंड 1, p. 244)। उसी अभिलेख (p. 243) में चित्पावनों की यह परंपरा भी दर्ज है कि वे निज़ाम के राज्य के अंबा-जोगाई से आए।
- संप्रदाय: सब स्मार्त, यानी शंकराचार्य के अद्वैत मत के अनुयायी; विष्णु, शिव और अन्य देवताओं की समान भाव से उपासना (Gazetteer 1880, p. 113)।
- प्रमुख गृह-देवता: गणपति, अन्नपूर्णा, गोपालकृष्ण, शालिग्राम और सूर्यकांत (Gazetteer, p. 113)।
- प्रमुख तीर्थ: चिपळूण के पास परशुराम, रत्नागिरी में गणपतिपुळे, जंजीरा में हरेश्वर, और काशी, प्रयाग, गया, पंढरपुर, नासिक जैसे सर्व-हिंदू तीर्थ (Gazetteer, p. 113)।
- वेद: आपस्तम्ब (कृष्ण यजुर्वेद) या ऋग्वेदी (Enthoven, p. 244)।
- कुल-पुरोहित: अपनी ही जाति के (Gazetteer, p. 113)।
नाम और क्षेत्र
अभिलेख के अनुसार चित्पावन, चित्पोळ और चिपळूणा नाम रत्नागिरी के चिपळूण नगर से जुड़े हैं, जिसका पुराना नाम "चित्पोलन" बताया जाता है; "कोंकणस्थ" नाम लगभग 1715 से चला (Enthoven, p. 242)। 1880 में रत्नागिरी ज़िले में चिपळूण के पास परशुराम-पर्वत इस समाज का मुख्य केंद्र दर्ज है, और उस समय इसके कोई उप-विभाग नहीं थे — सब आपस में भोजन और विवाह करते थे (Gazetteer, p. 111)। सह्याद्रि-खण्ड इनकी उत्पत्ति परशुराम से जोड़ता है।
विवाह से जुड़ी बातें
- एक गोत्र में विवाह वर्जित है — यह सभी ब्राह्मणों का शास्त्रीय नियम है; ऊपर की तालिका से उपनाम का गोत्र देखा जा सकता है, पर पक्का परिवार से ही करें।
- अभिलेख में दर्ज है कि दक्कन की अधिकतर जातियों के विपरीत चित्पावन मामा की बेटी से विवाह नहीं करते (Enthoven, p. 244)।
- यह ब्रिटिश-काल के अभिलेख (1880 और 1920) की जानकारी है — उस समय और क्षेत्र की स्थिति, आज की नहीं। हर परिवार की परंपरा इससे अलग हो सकती है।
