भारद्वाज गोत्र — परिचय
बौधायन सूत्र गोत्र की परिभाषा में जिन आठ ऋषियों का नाम लेता है, भरद्वाज उनमें से एक हैं। प्रवर में तीन पीढ़ियाँ हैं: अङ्गिरा, बृहस्पति और भरद्वाज।
ग्रंथ की तालिका में "भरद्वाजाः" आश्वलायन और बौधायन के नाम से, "भारद्वाजाः" आपस्तम्ब के नाम से और "भरद्वाजः" कात्यायन के नाम से दर्ज है। मत्स्य पुराण (अध्याय 196) भी यही प्रवर बताता है और कहता है कि इस समूह में आपस में विवाह नहीं होता।
तीन और गणों में भारद्वाज नाम
भारद्वाज नाम ग्रंथ में तीन और गणों की सूची में भी आता है: शौङ्ग-शैशिर गण (कात्यायन), आत्मभुव गण (मत्स्य पुराण) और कपि गण (मत्स्य पुराण)। इन तीनों के प्रवर अलग हैं।
इसलिए ज़्यादातर भारद्वाज परिवार "आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज" बोलते हैं, पर कुछ परिवारों में पाँच ऋषियों वाला प्रवर भी हो सकता है। अपने परिवार का प्रवर घर के बड़ों या कुल-पुरोहित से पूछ लें।
प्रवर — गण 24 (भारद्वाजाः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Brihaspati, Bharadvaja”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
प्रवर — गण 28 (शौङ्गशैशिरयः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · कात्य · आत्कील | 5 | आश्वलायन, आपस्तम्ब | तालिका का मुख्य |
| आङ्गिरस · कात्य · आक्षील | 3 | आपस्तम्ब | विकल्प |
| आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · शौङ्ग · शैशिर | 5 | कात्यायन | इस ग्रंथ का मुख्य |
| आङ्गिरस · भारद्वाज · बार्हस्पत्य · मौद्गल्य · शैशिर | 5 | मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Bharadvaja, Brihaspati, Maudgalya, Shaishira”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
प्रवर — गण 27 (आत्मभुवः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · मान्त्रवर · आत्मभुव | 5 | मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
प्रवर — गण 26 (कपयः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · आमहीयव · औरुक्षय | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
| आङ्गिरस · तैत्तिरि · कापिभुव | 3 | मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Damavahya, Uruksaya · Angira, Titira, Kapibhu”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
पूजा, संकल्प और विवाह में भारद्वाज गोत्र
संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। भारद्वाज गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह भारद्वाजआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण)। यह नाम ग्रंथ में एक से अधिक गणों में है, इसलिए वही प्रवर लें जो आपका परिवार बोलता है।
ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।
