भारद्वाज गोत्र

भारद्वाज गोत्र का प्रवर आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज है — सभी सूत्र और मत्स्य पुराण एकमत हैं। जानिए भारद्वाज गण के 255 नाम, बाक़ी तीन गणों में यह नाम क्यों आता है, और स्रोत।

संक्षेप में

भारद्वाज गोत्र महर्षि भरद्वाज का गोत्र है, जो आङ्गिरस-परंपरा में आते हैं। इसका प्रवर है — आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन और मत्स्य पुराण — सभी यही प्रवर बताते हैं। भारद्वाज गण में 255 नाम दर्ज हैं, जो ग्रंथ का तीसरा सबसे बड़ा गण है।

मुख्य जानकारी

गोत्रभारद्वाज (Bharadwaj)
अन्य नाम / वर्तनीभरद्वाज, भारद्वाज, Bhardwaj, Bharadvaja
ऋषि-कुलभारद्वाज (आङ्गिरस)
गोत्रकार ऋषिमहर्षि भरद्वाज
गणगण 24 — भारद्वाजाः; गण 28 — शौङ्गशैशिरयः; गण 27 — आत्मभुवः; गण 26 — कपयः
मुख्य प्रवरआङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण)
ग्रंथ-सूची मेंगण 24: "भरद्वाजाः" (आश्वलायन, बौधायन); गण 24: "भारद्वाजाः" (आपस्तम्ब); गण 24: "भरद्वाजः" (कात्यायन); गण 28: "भरद्वाजाः" (कात्यायन); गण 28: "भारद्वाजः" (कात्यायन); गण 27: "भरद्वाजः" (मत्स्य पुराण); गण 26: "भारद्वाजः" (मत्स्य पुराण); गण 26: "भारद्वाजिः" (मत्स्य पुराण)

भारद्वाज गोत्र — परिचय

बौधायन सूत्र गोत्र की परिभाषा में जिन आठ ऋषियों का नाम लेता है, भरद्वाज उनमें से एक हैं। प्रवर में तीन पीढ़ियाँ हैं: अङ्गिरा, बृहस्पति और भरद्वाज।

ग्रंथ की तालिका में "भरद्वाजाः" आश्वलायन और बौधायन के नाम से, "भारद्वाजाः" आपस्तम्ब के नाम से और "भरद्वाजः" कात्यायन के नाम से दर्ज है। मत्स्य पुराण (अध्याय 196) भी यही प्रवर बताता है और कहता है कि इस समूह में आपस में विवाह नहीं होता।

तीन और गणों में भारद्वाज नाम

भारद्वाज नाम ग्रंथ में तीन और गणों की सूची में भी आता है: शौङ्ग-शैशिर गण (कात्यायन), आत्मभुव गण (मत्स्य पुराण) और कपि गण (मत्स्य पुराण)। इन तीनों के प्रवर अलग हैं।

इसलिए ज़्यादातर भारद्वाज परिवार "आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज" बोलते हैं, पर कुछ परिवारों में पाँच ऋषियों वाला प्रवर भी हो सकता है। अपने परिवार का प्रवर घर के बड़ों या कुल-पुरोहित से पूछ लें।

प्रवर — गण 24 (भारद्वाजाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Brihaspati, Bharadvaja”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में दर्ज नाम (255)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। भारद्वाज गोत्र की पंक्तियाँ अलग रंग में है।

  1. 1अग्निवेशाःम
  2. 2अग्निवेशाःबो
  3. 3अग्निवेश्यःम
  4. 4अग्निवेश्याःआश्व, आप, बो
  5. 5अग्निस्तम्भाःबो
  6. 6अधिकारग्रीवःका
  7. 7आक्ताःबो
  8. 8आक्षाःबो
  9. 9आग्निवेश्याःबो
  10. 10आत्राःबो
  11. 11आत्रेयायणाःबो
  12. 12आत्रेयायनिःका, म
  13. 13आपस्तम्बिःका, म
  14. 14आपस्तम्भाःबो
  15. 15आरुणाःबो
  16. 16आश्लाः ?बो
  17. 17आश्वलायनिःका, म
  18. 18इन्द्रस्तम्भाःबो
  19. 19इषुमताःबो
  20. 20उडुपतिःम
  21. 21उद्वहव्याःबो
  22. 22उरूढाःबो
  23. 23ऊर्जायनाःआप
  24. 24ऋक्षाःबो
  25. 25औक्षाःबो
  26. 26औदमेघयःबो
  27. 27औदमेघिःका
  28. 28औपसेयःबो
  29. 29औसेयःबो
  30. 30कक्षलाःबो
  31. 31करभीकयःबो
  32. 32कल्माश्वःबो
  33. 33काक्षलाःबो
  34. 34काचकिःका, म
  35. 35काञ्चकिःका
  36. 36काण्डायनाःबो
  37. 37काण्यविजलिःका
  38. 38काबल्याःबो
  39. 39काम्बोदकाःबो
  40. 40कायनःका
  41. 41कारकिःम
  42. 42कारग्रीविःका
  43. 43कारिषायणाःबो
  44. 44कारुणायनाःबो
  45. 45कारुपथयःबो
  46. 46कावल्याःबो
  47. 47काष्ठोदकाःबो
  48. 48कुकाःआप
  49. 49कुक्षाःबो
  50. 50केशरवयःबो
  51. 51केशस्वेयाःबो
  52. 52कौकाक्षयःबो
  53. 53कौण्डिन्याःबो
  54. 54कौमुदगन्धयःबो
  55. 55कौमुदगन्धिःका
  56. 56कौरुक्षेत्रिःका, म
  57. 57कौरुपतिःम
  58. 58क्रोडायनाःबो
  59. 59क्षाम्यायणाःबो
  60. 60खाङ्गलायनःका
  61. 61खारिग्रीवयःबो
  62. 62खारुडाःबो
  63. 63खालडिःम
  64. 64खेलकाःबो
  65. 65गाङ्गोदकिःका
  66. 66गाङ्गोदधिःम
  67. 67गिरुणकर्णिः ?का
  68. 68गोद्वेषिःका
  69. 69गोमेदगन्धिकःम
  70. 70गोवासीनःबो
  71. 71गोस्वपिङ्गलिःम
  72. 72गौरिवायनाःबो
  73. 73चिकिपिःम
  74. 74चिकीर्षिःम
  75. 75चेलकाःबो
  76. 76चौपिष्टःका
  77. 77जित्यद्रोणिःम
  78. 78जैक्षलायनिःम
  79. 79जैत्यद्रोणिःम
  80. 80जैत्रिःका
  81. 81जैत्वलायनःका
  82. 82जैह्मलायनिःम
  83. 83जैह्वलायनिःम
  84. 84ज्वलयःबो
  85. 85तूर्णकर्णिःका
  86. 86तृणवकर्णिःम
  87. 87तौल्वलिःका
  88. 88त्रैतुटिःका
  89. 89दाभयःबो
  90. 90दार्भवःबो
  91. 91दिष्टाकिःम
  92. 92देवमतयःबो
  93. 93देवयःबो
  94. 94देवरातिःम
  95. 95देवस्थानिःका, म
  96. 96देवागारिःका
  97. 97देवागिरिधिः ?का
  98. 98देवाश्वाःबो
  99. 99दैवमतयःबो
  100. 100द्रोणिःका
  101. 101द्व्याख्येयःम
  102. 102द्व्योगाःबो
  103. 103धान्यायनःबो
  104. 104धूमगन्धाःबो
  105. 105धूमितःम
  106. 106धौताम्बकिःका
  107. 107ध्रागविःका
  108. 108ध्रौगयःका
  109. 109नायकिःम
  110. 110नृत्यायनाःबो
  111. 111नैतुतयःबो
  112. 112पराहरयःबो
  113. 113परिणद्धेधाः ?बो
  114. 114परेपमतिःका
  115. 115पारिणध्येयाः ?बो
  116. 116पुष्पान्वेषिःम
  117. 117पैलःम
  118. 118पौलिःका
  119. 119प्रभुःम
  120. 120प्रवाहणेयाःबो
  121. 121प्रवाहिःम
  122. 122प्राग्वंशयःबो
  123. 123प्रालेपिःम
  124. 124प्रावहिःम
  125. 125प्रावाहणेयःका
  126. 126फलाहारःम
  127. 127बर्हिसादीम
  128. 128बाष्कलाःबो
  129. 129बाष्कलिःम
  130. 130बाहलबाः ?बो
  131. 131ब्रह्मतन्विःम
  132. 132ब्रह्मस्तम्बिःका
  133. 133ब्रह्मस्तम्भाःबो
  134. 134भद्राधयःबो
  135. 135भरद्वाजःका
  136. 136भरद्वाजाःआश्व, बो
  137. 137भरुडेयाःबो
  138. 138भरुण्डेयाःबो
  139. 139भामान्याःबो
  140. 140भारद्वाजाःआप
  141. 141भूरयःबो
  142. 142मगण्डाःबो
  143. 143मङ्गडाःबो
  144. 144मत्स्यकायाःबो
  145. 145मत्स्यक्राधाः ?बो
  146. 146मत्स्याच्छादःम
  147. 147महाकपिःम
  148. 148महावेलाःबो
  149. 149महावैरिलाःबो
  150. 150माणविद्व्याःबो
  151. 151माणभिद्यःबो
  152. 152मात्स्यक्षीपःका
  153. 153माद्रपतयःबो
  154. 154मामन्याःबो
  155. 155मारुतःम
  156. 156मार्कण्डिःका
  157. 157मार्जवृष्टिःम
  158. 158मार्ष्टपिङ्गलिःम
  159. 159मालोहरःका
  160. 160मूलहरःम
  161. 161मैधुनमतिःका
  162. 162मैधुमतिःका
  163. 163मौञ्जवृष्टिःम
  164. 164यज्ञवेदयःका
  165. 165यमस्तम्बाःबो
  166. 166राजस्तम्भयःबो
  167. 167राशुगाःबो
  168. 168रुद्राङ्गपथःबो
  169. 169रौक्षाःबो
  170. 170लभायनिःम
  171. 171वयोक्षिभेदाःबो
  172. 172वलभीकयःबो
  173. 173वाताङ्गिरथिःका
  174. 174वायुस्तम्भाःबो
  175. 175वाराहयःबो
  176. 176वाराहिःम
  177. 177वालटिःका
  178. 178वालभीकयःबो
  179. 179वालिशायनिःका
  180. 180वालिशायनिःम
  181. 181वासिनयानिःका
  182. 182वासिनायनाःबो
  183. 183वाहलवाःबो
  184. 184वाहिःका
  185. 185वाह्यकच्छःम
  186. 186वाह्याःबो
  187. 187विन्धायनाःबो
  188. 188विष्णुस्तम्भाःबो
  189. 189वेदवेलाःबो
  190. 190वेलाःबो
  191. 191वेशाःबो
  192. 192वैयुःका
  193. 193वैलाःबो
  194. 194वैषुःका
  195. 195व्यटाकिःम
  196. 196व्याढाकिःम
  197. 197शठाःबो
  198. 198शालालयःबो
  199. 199शाकलाःबो
  200. 200शार्दूलयःबो
  201. 201शालङ्कायनिःम
  202. 202शालानिःबो
  203. 203शालाहलयःबो
  204. 204शालाहारिःबो
  205. 205शिक्षायनाःबो
  206. 206शिखाग्रीविःम
  207. 207शिखायनाःबो
  208. 208शिलातलिःम
  209. 209शिलास्थलिःम
  210. 210शृङ्गाःबो
  211. 211शैकेयाःबो
  212. 212शौद्धयःबो
  213. 213श्यामेयाःबो
  214. 214श्वारुडाःबो
  215. 215श्वेलकाःबो
  216. 216षारितौचकिः ?का
  217. 217सघोषकृतिःबो
  218. 218सत्यकेयाःबो
  219. 219सघोपकृताःबो
  220. 220सरिद्भविःम
  221. 221साङ्गिःका
  222. 222साज्यङ्किःका
  223. 223सात्यमुग्रिःका
  224. 224सायसुग्रीविःम
  225. 225सामस्ताम्बिःका
  226. 226सारावरिःका
  227. 227सालडिःम
  228. 228सालहिःका
  229. 229सालुष्टिः ?का
  230. 230सिन्धवःबो
  231. 231सूर्यस्तम्भाःबो
  232. 232सेध्यकेयाःबो
  233. 233सैंहिकेयाःबो
  234. 234सोमतन्विःम
  235. 235सोमस्तम्भाःबो
  236. 236सौगेयःका
  237. 237सौङ्गिःका
  238. 238सौजपृश्निःका
  239. 239सौद्धयःबो
  240. 240सौबुद्धिकःका
  241. 241सौरभःबो
  242. 242सौविष्टःका
  243. 243सौविष्ट्यःम
  244. 244स्तनकर्णाःबो
  245. 245स्तम्बस्तम्भशब्दान्ताःआप, बो
  246. 246स्तम्भप्रकृतयःबो
  247. 247स्तैदेहाःबो
  248. 248स्तौज्वलयःबो
  249. 249स्तौदेहाःबो
  250. 250स्वज्यङ्किःका
  251. 251स्वारग्रीविःम
  252. 252स्वोज्वलयःबो
  253. 253हरिकर्णिःका
  254. 254हारिकर्णिःका
  255. 255हालोहरःका

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।

गण 24 — भारद्वाजाः का पूरा पृष्ठ

प्रवर — गण 28 (शौङ्गशैशिरयः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · कात्य · आत्कील5आश्वलायन, आपस्तम्बतालिका का मुख्य
आङ्गिरस · कात्य · आक्षील3आपस्तम्बविकल्प
आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · शौङ्ग · शैशिर5कात्यायनइस ग्रंथ का मुख्य
आङ्गिरस · भारद्वाज · बार्हस्पत्य · मौद्गल्य · शैशिर5मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Bharadvaja, Brihaspati, Maudgalya, Shaishira”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में दर्ज नाम (9)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। भारद्वाज गोत्र की पंक्तियाँ अलग रंग में है।

  1. 1ग्राधाःका
  2. 2भरद्वाजाःका
  3. 3भारद्वाजःका
  4. 4शिशिराःका
  5. 5शैशिरेयःका
  6. 6शौङ्गःका
  7. 7शौङ्गशैशिरयःआप, आश्व
  8. 8शौङ्गाःका
  9. 9हुतःका

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

गण 28 — शौङ्गशैशिरयः का पूरा पृष्ठ

प्रवर — गण 27 (आत्मभुवः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · मान्त्रवर · आत्मभुव5मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

इस गण में दर्ज नाम (10)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। भारद्वाज गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1अत्वरिःम
  2. 2अश्वरिष्कःम
  3. 3आत्मभवःम
  4. 4आत्महवःम
  5. 5ऋक्षःम
  6. 6क्रथिश्वान्म
  7. 7भरद्वाजःम
  8. 8मन्त्रवरःम
  9. 9मानवःम
  10. 10मैत्रवरःम

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

गण 27 — आत्मभुवः का पूरा पृष्ठ

इसी गण के अन्य गोत्र-पृष्ठ

प्रवर — गण 26 (कपयः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · आमहीयव · औरुक्षय3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
आङ्गिरस · तैत्तिरि · कापिभुव3मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Damavahya, Uruksaya · Angira, Titira, Kapibhu”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में दर्ज नाम (76)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। भारद्वाज गोत्र की पंक्तियाँ अलग रंग में है।

  1. 1अध्वासुःका
  2. 2अमावास्यायनःका
  3. 3ऊर्ध्वस्थःका
  4. 4ऊर्वःका
  5. 5ऊर्वसुःका
  6. 6ऐतिशायनाःबो
  7. 7औपीतकिःबो
  8. 8कण्ठरिःका
  9. 9कण्वःम
  10. 10कपयःआप, आश्व, बो
  11. 11कपिःका
  12. 12कपिस्तरिःका
  13. 13कपीतरःम
  14. 14कपैतरःम
  15. 15करखण्डाःबो
  16. 16करसिखण्डाःबो
  17. 17कलशीकण्ठाःम
  18. 18कलसीम, का
  19. 19कात्यःम
  20. 20कात्यायनःका
  21. 21कारीरयःम
  22. 22कुशीदकिःम
  23. 23क्षवजः ?म
  24. 24चैतकिःका
  25. 25जलसन्धिःम
  26. 26जलासिन्धाकिःम
  27. 27जलम्भिम्बिः ?म
  28. 28तरस्विःबो
  29. 29ताण्डिनःबो
  30. 30तित्तिरिःका
  31. 31तिवरथिःका
  32. 32तैवरन्धिःका
  33. 33दण्डिःका
  34. 34दाक्षिःम
  35. 35दाडःम
  36. 36दिक्षःम
  37. 37देवमतिःम
  38. 38धान्यायनिःम
  39. 39पतञ्जलाःबो
  40. 40पतञ्जलिःका, म
  41. 41पौष्टयःबो
  42. 42बिन्दुःम
  43. 43भारद्वाजःम
  44. 44भारद्वाजिःम
  45. 45भावास्यायनिःम
  46. 46भूयसीका, म
  47. 47भोजसयःबो
  48. 48भोजसिनःबो
  49. 49मादःम
  50. 50मैषीतकिःबो
  51. 51राजकेशीम
  52. 52राजिकेशीका
  53. 53रोजटिःम
  54. 54लघ्वीम
  55. 55वान्यायनःका
  56. 56वान्यायनिःम
  57. 57विदिःका
  58. 58विदुःका
  59. 59वैतलायनाःबो
  60. 60वौषडिःम
  61. 61शक्तिःका
  62. 62शम्सपिः ?म
  63. 63शाकरवाःबो
  64. 64शार्भरवाःबो
  65. 65शालिःम
  66. 66सलिःम
  67. 67सागरःबो
  68. 68साम्शयः ?बो
  69. 69सावस्यायनिःम
  70. 70सासविःम
  71. 71सौजरिःम
  72. 72सौबुद्धिःम
  73. 73स्वदांतरःम
  74. 74स्वस्तरिःका
  75. 75स्वस्तितरःम
  76. 76स्वैदतरःम

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।

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इसी गण के अन्य गोत्र-पृष्ठ

पूजा, संकल्प और विवाह में भारद्वाज गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। भारद्वाज गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह भारद्वाजआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण)। यह नाम ग्रंथ में एक से अधिक गणों में है, इसलिए वही प्रवर लें जो आपका परिवार बोलता है।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

भारद्वाज गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न