कात्यायन गोत्र — परिचय
कत गण (गण 48) के प्रवर "वैश्वामित्र, कात्य, आक्षील" में "कात्य" नाम ही कात्यायन की ओर संकेत करता है। चारों सूत्र यह प्रवर बताते हैं, और मत्स्य पुराण इस समूह के लिए "खिलिखिलि, विद्य, विश्वामित्र" देता है।
कपि गण (गण 26) आङ्गिरस-परंपरा का है, और उसकी कात्यायन-सूची में "कात्यायनः" नाम आता है।
दो कुल, दो प्रवर
इसलिए कात्यायन-गोत्री परिवारों का प्रवर विश्वामित्र-कुल वाला भी हो सकता है और आङ्गिरस-परंपरा वाला भी। दोनों ग्रंथ की सूचियों में हैं।
आपके परिवार में कौन-सा प्रवर बोला जाता है, यह घर के बड़ों या कुल-पुरोहित से ज़रूर पूछ लें।
प्रवर — गण 48 (आक्षीलाः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · कात्य · आक्षील | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन | तालिका का मुख्य |
| साति · सौलिद्धारि · वैश्वामित्र | 3 | मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 198 — “Khilakhila, Vidya, Vishvamitra”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
प्रवर — गण 26 (कपयः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · आमहीयव · औरुक्षय | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
| आङ्गिरस · तैत्तिरि · कापिभुव | 3 | मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Damavahya, Uruksaya · Angira, Titira, Kapibhu”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
पूजा, संकल्प और विवाह में कात्यायन गोत्र
संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। कात्यायन गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह कात्यायनआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप वैश्वामित्र, कात्य, आक्षील है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन)। यह नाम ग्रंथ में एक से अधिक गणों में है, इसलिए वही प्रवर लें जो आपका परिवार बोलता है।
ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।
