गण 48 — आक्षीलाः

आक्षीलाः गण विश्वामित्र ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन के अनुसार इसका प्रवर है — वैश्वामित्र, कात्य, आक्षील। सूत्रों में इसके 1 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 45 नाम दर्ज किए हैं।

संक्षेप में

आक्षीलाः गण विश्वामित्र ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन के अनुसार इसका प्रवर है — वैश्वामित्र, कात्य, आक्षील। सूत्रों में इसके 1 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 45 नाम दर्ज किए हैं।

प्रवर

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वैश्वामित्र · कात्य · आक्षील3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायनतालिका का मुख्य
साति · सौलिद्धारि · वैश्वामित्र3मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 198 — “Khilakhila, Vidya, Vishvamitra”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

मत्स्य-रूप के पहले दो नाम ग्रंथ में "साति (खिलिखिलि)" और "सौलिद्धारि (विद्य)" छपे हैं — कोष्ठक के नाम मत्स्य की दूसरी पाण्डुलिपियों के हैं.

इस गण के गोत्र-पृष्ठ

इस गण में दर्ज नाम (45)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।

  1. 1इन्दुपरिःका
  2. 2इषिःम
  3. 3उदुम्बरिःम
  4. 4औदुम्बरायणाःबो
  5. 5औदुम्बरिःका
  6. 6कताःआश्व, आप, बो, का
  7. 7करभावाःबो
  8. 8करम्भाःबो
  9. 9करीरामिःम
  10. 10करीराम्भिःका
  11. 11करीराशिःम
  12. 12कात्यायनिःका, म
  13. 13कारिलादिःका
  14. 14कारिलालिःका
  15. 15कौकुल्याःबो
  16. 16कौक्रल्याःबो
  17. 17जायमानाःबो
  18. 18तारुष्यायणिःका
  19. 19तार्क्ष्यायणिःका, म
  20. 20तार्यायणिःका
  21. 21तैकायनिःका
  22. 22त्रैकायनिःका
  23. 23नाराद्याःबो
  24. 24नारायणाःबो
  25. 25नैकायनिःका
  26. 26पिण्डग्रीवाःबो
  27. 27मौजहायनाःका
  28. 28मौञ्जायनिःम
  29. 29मौञ्जायनिःका
  30. 30रैकायनिःका
  31. 31लावकःम
  32. 32लवकिःका, म
  33. 33लावलिःका
  34. 34वाजायनःबो
  35. 35शास्त्यायनःम
  36. 36शालङ्कायनिःका, म
  37. 37शैशिरिःका
  38. 38शैशिरेयाःबो
  39. 39शैशिलिःबो
  40. 40संहितेयाःबो
  41. 41सांहितेयाःबो
  42. 42सालङ्कायनःका
  43. 43सैरन्धाःबो
  44. 44सैरिन्धाःबो
  45. 45सैसवटिःम

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

विश्वामित्र-कुल के अन्य गण

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 258–259 (archive.org leaf 298–299)।