गण 51 — क्रथकाः
क्रथकाः गण विश्वामित्र ऋषि-कुल का गण है। बौधायन के अनुसार इसका प्रवर है — वैश्वामित्र, रौत्थक, रैवण। सूत्रों में इसके 2 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 14 नाम दर्ज किए हैं।
संक्षेप में
क्रथकाः गण विश्वामित्र ऋषि-कुल का गण है। बौधायन के अनुसार इसका प्रवर है — वैश्वामित्र, रौत्थक, रैवण। सूत्रों में इसके 2 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 14 नाम दर्ज किए हैं।
प्रवर
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · रौत्थक · रैवण | 3 | बौधायन | तालिका का मुख्य |
| वैश्वामित्र · गाथिन · रैवण | 3 | कात्यायन, मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
| वैश्वामित्र · काथक · क्राथक | 3 | प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 198 — “Vishvamitra, Gathina, Raivana”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
इस गण में दर्ज नाम (14)
गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।
- 1अथकःका
- 2उदवेणुःम
- 3उद्दालकिःम
- 4औदोवाहिःम
- 5औद्दालकिःम
- 6कथकःम
- 7क्रथकःका, म
- 8चोदोहलाःबो
- 9नखोद्वहयःका
- 10रौक्षकाःबो
- 11रौथकाःबो
- 12सोहहलाःबो
- 13सौद्धहलाःबो
- 14स्वैतरत्यःका
संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.
विश्वामित्र-कुल के अन्य गण
स्रोत
पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 259–260 (archive.org leaf 299–300)।
