गण 43 — धानञ्जयाः
धानञ्जयाः गण विश्वामित्र ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन के अनुसार इसका प्रवर है — वैश्वामित्र, माधुच्छन्दस, धानञ्जय। सूत्रों में इसके 1 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 12 नाम दर्ज किए हैं।
संक्षेप में
धानञ्जयाः गण विश्वामित्र ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन के अनुसार इसका प्रवर है — वैश्वामित्र, माधुच्छन्दस, धानञ्जय। सूत्रों में इसके 1 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 12 नाम दर्ज किए हैं।
प्रवर
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · माधुच्छन्दस · धानञ्जय | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन | तालिका का मुख्य |
| वैश्वामित्र · माधुच्छन्दस · आघमर्षण | 3 | मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 198 — “Vishvamitra, Madhuchchhanda, Aghamarshana”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।
सूत्र तीसरा ऋषि "धानञ्जय" बताते हैं, जबकि मत्स्य पुराण (अ. 198) धनञ्जय परिवारों के लिए "आघमर्षण" देता है. यह मत्स्य-पाठ ग्रंथ की इस तालिका में नहीं है; वह मत्स्य के अनुवाद से लिया गया है.
इस गण के गोत्र-पृष्ठ
इस गण में दर्ज नाम (12)
गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।
- 1आश्ववताःबो
- 2आश्वावताःबो
- 3उत्स्राक्षाःबो
- 4उष्ट्राक्षाःबो
- 5कारव्याःबो
- 6कारीषयःबो
- 7तारव्याःबो
- 8धनञ्जयाःआश्व, आप, बो
- 9महाक्षाःबो
- 10माधुच्छन्दसाःआप
- 11सैन्धवायनाःबो
- 12स्थूलव्याःबो
संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.
विश्वामित्र-कुल के अन्य गण
स्रोत
पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 255 (archive.org leaf 295)।
