गण 23 — मातवचसः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · वान्दन · मातवचस | 5 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन | तालिका का मुख्य |
| आङ्गिरस · वान्दन · मातवच | 3 | आपस्तम्ब | विकल्प |
आश्वलायन और आपस्तम्ब यह प्रवर "ऋक्ष" परिवारों के लिए, और बौधायन "रौक्षायण" के लिए बताते हैं. प्रवरदर्पण में उद्धृत मत्स्य-सूची (p. 164) रौक्षायण के साथ कपिल, शबल, शिपिल आदि नाम भी गिनाती है.
इस गण में ग्रंथ ने 11 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · कपिल गोत्र
गण 24 — भारद्वाजाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Brihaspati, Bharadvaja”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
इस गण में ग्रंथ ने 255 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · भारद्वाज गोत्र
गण 25 — शैन्याः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · गार्ग्य · शैन्य | 5 | आश्वलायन, बौधायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
| आङ्गिरस · शैन्य · गार्ग्य | 3 | आश्वलायन, बौधायन | विकल्प |
| आङ्गिरस · शैन्य · गार्ग्य | 3 | कात्यायन | इस ग्रंथ का मुख्य |
| आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · शैन्य · गार्ग्य | 5 | कात्यायन | विकल्प |
| आङ्गिरस · गार्ग्य · शैन्य | 3 | आपस्तम्ब | इस ग्रंथ का मुख्य |
| भारद्वाज · गार्ग्य · शैन्य | 3 | आपस्तम्ब | विकल्प |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Brihaspati, Bharadvaja, Garga, Sainya”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
कात्यायन पाँच ऋषियों वाला रूप आत्रेयायणि आदि परिवारों के लिए देते हैं, और तीन ऋषियों वाला "आङ्गिरस, शैन्य, गार्ग्य" गर्ग, तित्तिरि, कपिभू, खण्डित आदि के लिए.
इस गण में ग्रंथ ने 126 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · गर्ग गोत्र
गण 26 — कपयः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · आमहीयव · औरुक्षय | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
| आङ्गिरस · तैत्तिरि · कापिभुव | 3 | मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Damavahya, Uruksaya · Angira, Titira, Kapibhu”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
मत्स्य पुराण दूसरा रूप तित्तिरि, कपिभू और गार्ग्य परिवारों के लिए बताता है.
इस गण में ग्रंथ ने 76 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · कात्यायन गोत्र · भारद्वाज गोत्र · कपि गोत्र
गण 27 — आत्मभुवः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · मान्त्रवर · आत्मभुव | 5 | मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
इस गण में ग्रंथ ने 10 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · मानव गोत्र · भारद्वाज गोत्र
गण 28 — शौङ्गशैशिरयः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · कात्य · आत्कील | 5 | आश्वलायन, आपस्तम्ब | तालिका का मुख्य |
| आङ्गिरस · कात्य · आक्षील | 3 | आपस्तम्ब | विकल्प |
| आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · शौङ्ग · शैशिर | 5 | कात्यायन | इस ग्रंथ का मुख्य |
| आङ्गिरस · भारद्वाज · बार्हस्पत्य · मौद्गल्य · शैशिर | 5 | मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Bharadvaja, Brihaspati, Maudgalya, Shaishira”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
शौङ्ग-शैशिर "द्व्यामुष्यायण" (दो गोत्र वाले) माने गए हैं. मत्स्य वाला रूप ग्रंथ की इस तालिका में नहीं है; वह मत्स्य पुराण (अ. 196) के अंग्रेज़ी और हिन्दी दोनों अनुवादों से लिया गया है.
इस गण में ग्रंथ ने 9 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · भारद्वाज गोत्र
