गण 28 — शौङ्गशैशिरयः

शौङ्गशैशिरयः गण भारद्वाज (आङ्गिरस) ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, कात्य, आत्कील। सूत्रों में इसके 3 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 9 नाम दर्ज किए हैं।

संक्षेप में

शौङ्गशैशिरयः गण भारद्वाज (आङ्गिरस) ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, कात्य, आत्कील। सूत्रों में इसके 3 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 9 नाम दर्ज किए हैं।

प्रवर

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · कात्य · आत्कील5आश्वलायन, आपस्तम्बतालिका का मुख्य
आङ्गिरस · कात्य · आक्षील3आपस्तम्बविकल्प
आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · शौङ्ग · शैशिर5कात्यायनइस ग्रंथ का मुख्य
आङ्गिरस · भारद्वाज · बार्हस्पत्य · मौद्गल्य · शैशिर5मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Bharadvaja, Brihaspati, Maudgalya, Shaishira”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

शौङ्ग-शैशिर "द्व्यामुष्यायण" (दो गोत्र वाले) माने गए हैं. मत्स्य वाला रूप ग्रंथ की इस तालिका में नहीं है; वह मत्स्य पुराण (अ. 196) के अंग्रेज़ी और हिन्दी दोनों अनुवादों से लिया गया है.

इस गण के गोत्र-पृष्ठ

इस गण में दर्ज नाम (9)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।

  1. 1ग्राधाःका
  2. 2भरद्वाजाःका
  3. 3भारद्वाजःका
  4. 4शिशिराःका
  5. 5शैशिरेयःका
  6. 6शौङ्गःका
  7. 7शौङ्गशैशिरयःआप, आश्व
  8. 8शौङ्गाःका
  9. 9हुतःका

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

भारद्वाज (आङ्गिरस)-कुल के अन्य गण

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 240 (archive.org leaf 280)।