गण 27 — आत्मभुवः
आत्मभुवः गण भारद्वाज (आङ्गिरस) ऋषि-कुल का गण है। मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, मान्त्रवर, आत्मभुव। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 10 नाम दर्ज किए हैं।
संक्षेप में
आत्मभुवः गण भारद्वाज (आङ्गिरस) ऋषि-कुल का गण है। मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, मान्त्रवर, आत्मभुव। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 10 नाम दर्ज किए हैं।
प्रवर
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · मान्त्रवर · आत्मभुव | 5 | मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
इस गण के गोत्र-पृष्ठ
इस गण में दर्ज नाम (10)
गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।
- 1अत्वरिःम
- 2अश्वरिष्कःम
- 3आत्मभवःम
- 4आत्महवःम
- 5ऋक्षःम
- 6क्रथिश्वान्म
- 7भरद्वाजःम
- 8मन्त्रवरःम
- 9मानवःम
- 10मैत्रवरःम
संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.
भारद्वाज (आङ्गिरस)-कुल के अन्य गण
स्रोत
पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 239 (archive.org leaf 279)।
