अत्रि-कुल के गण और प्रवर

गोत्र-प्रवर ग्रंथों की तालिका में अत्रि ऋषि-कुल के 6 गण हैं (गण 35–40)। हर गण का अपना प्रवर है, और कई गणों में अलग-अलग सूत्र प्रवर के अलग रूप बताते हैं। नीचे हर गण का प्रवर, ग्रंथ के अनुसार, दिया गया है।

संक्षेप में

गोत्र-प्रवर ग्रंथों की तालिका में अत्रि ऋषि-कुल के 6 गण हैं (गण 35–40)। हर गण का अपना प्रवर है, और कई गणों में अलग-अलग सूत्र प्रवर के अलग रूप बताते हैं। नीचे हर गण का प्रवर, ग्रंथ के अनुसार, दिया गया है।

एक नज़र में

गण 35 — श्यावाश्वाःआत्रेय, आर्चनानस, श्यावाश्व · 167 नाम
गण 36 — गविष्ठिराःआत्रेय, गाविष्ठिर, पौर्वातिथ · 29 नाम
गण 37 — अतिथयःआत्रेय, आर्चनानस, पौर्वातिथ · 22 नाम
गण 38 — वाग्भूतकाःआत्रेय, आर्चनानस, वाग्भूतक · 2 नाम
गण 39 — पुत्रिकापुत्राःआत्रेय, वामरथ्य, पौत्रिक · 14 नाम
गण 40 — सुमङ्गलाःआत्रेय, सौमङ्गल, श्यावाश्व · 0 नाम

गण 35 — श्यावाश्वाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आत्रेय · आर्चनानस · श्यावाश्व3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 197 — “Shyavashva, Atri, Archananasa”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में ग्रंथ ने 167 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · अत्रि गोत्र · कृष्णात्रेय गोत्र

गण 36 — गविष्ठिराः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आत्रेय · गाविष्ठिर · पौर्वातिथ3आश्वलायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
आत्रेय · आर्चनानस · गाविष्ठिर3आपस्तम्ब, बौधायनइस ग्रंथ का मुख्य

इस गण में ग्रंथ ने 29 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

गण 37 — अतिथयः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आत्रेय · आर्चनानस · पौर्वातिथ3बौधायनतालिका का मुख्य
आत्रेय · आर्चनानस · आतिथ3आपस्तम्बइस ग्रंथ का मुख्य

बौधायन यह प्रवर मुद्गलों के लिए, और आपस्तम्ब अपना रूप अतिथियों के लिए बताते हैं.

इस गण में ग्रंथ ने 22 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

गण 38 — वाग्भूतकाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आत्रेय · आर्चनानस · वाग्भूतक3बौधायनतालिका का मुख्य

इस गण में ग्रंथ ने 2 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

गण 39 — पुत्रिकापुत्राः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आत्रेय · वामरथ्य · पौत्रिक3कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 197 — “Atri, Vamarathya, Pautri”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

मत्स्य पुराण (अ. 197) के अनुसार ये महर्षि अत्रि की पुत्री के पुत्र माने गए हैं — इसीलिए गण का नाम "पुत्रिकापुत्र".

इस गण में ग्रंथ ने 14 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

गण 40 — सुमङ्गलाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आत्रेय · सौमङ्गल · श्यावाश्व3प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)तालिका का मुख्य

इस गण में ग्रंथ ने 0 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

अत्रि-कुल के गोत्र-पृष्ठ

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 247–252 (archive.org leaf 287–292)। मत्स्य पुराण से मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (1917).