गण 39 — पुत्रिकापुत्राः
पुत्रिकापुत्राः गण अत्रि ऋषि-कुल का गण है। कात्यायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आत्रेय, वामरथ्य, पौत्रिक। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 14 नाम दर्ज किए हैं।
संक्षेप में
पुत्रिकापुत्राः गण अत्रि ऋषि-कुल का गण है। कात्यायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आत्रेय, वामरथ्य, पौत्रिक। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 14 नाम दर्ज किए हैं।
प्रवर
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आत्रेय · वामरथ्य · पौत्रिक | 3 | कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 197 — “Atri, Vamarathya, Pautri”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
मत्स्य पुराण (अ. 197) के अनुसार ये महर्षि अत्रि की पुत्री के पुत्र माने गए हैं — इसीलिए गण का नाम "पुत्रिकापुत्र".
इस गण में दर्ज नाम (14)
गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।
- 1कालयःका
- 2कालेयःम
- 3केरेयःका
- 4धात्रेयाःम
- 5पुत्रकिःका
- 6पुत्रिकापुत्राःका
- 7मैत्रेयाःम
- 8वामरथ्यःम
- 9वामरथ्यःम
- 10वालेयःका, म
- 11वासरथ्यःम
- 12श्यैभ्रयःका
- 13सौगेयःका
- 14हालेयःका
संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.
अत्रि-कुल के अन्य गण
स्रोत
पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 252 (archive.org leaf 292)।
