गण 37 — अतिथयः
अतिथयः गण अत्रि ऋषि-कुल का गण है। बौधायन के अनुसार इसका प्रवर है — आत्रेय, आर्चनानस, पौर्वातिथ। सूत्रों में इसके 1 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 22 नाम दर्ज किए हैं।
संक्षेप में
अतिथयः गण अत्रि ऋषि-कुल का गण है। बौधायन के अनुसार इसका प्रवर है — आत्रेय, आर्चनानस, पौर्वातिथ। सूत्रों में इसके 1 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 22 नाम दर्ज किए हैं।
प्रवर
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आत्रेय · आर्चनानस · पौर्वातिथ | 3 | बौधायन | तालिका का मुख्य |
| आत्रेय · आर्चनानस · आतिथ | 3 | आपस्तम्ब | इस ग्रंथ का मुख्य |
बौधायन यह प्रवर मुद्गलों के लिए, और आपस्तम्ब अपना रूप अतिथियों के लिए बताते हैं.
इस गण में दर्ज नाम (22)
गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।
- 1अतिथयःआप
- 2अर्णवःबो
- 3और्णवाःबो
- 4गाविष्ठिरःबो
- 5गौरकयःबो
- 6गौरिवतःबो
- 7गौरिवीतःबो
- 8बोधवाञ्जिकिःबो
- 9बोधाक्षःबो
- 10मुद्गलाःबो
- 11वायपूतिःबो
- 12वायवानःबो
- 13वैतभावःबो
- 14वैतवाहःबो
- 15व्याधिसन्धिःबो
- 16व्यालिसन्धिःबो
- 17व्रीहिमतःबो
- 18शालिमतःबो
- 19शिरीषिःबो
- 20शैतभावयःबो
- 21शैषयःबो
- 22स्वर्णवःबो
संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.
अत्रि-कुल के अन्य गण
स्रोत
पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 251 (archive.org leaf 291)।
