गण 35 — श्यावाश्वाः
श्यावाश्वाः गण अत्रि ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आत्रेय, आर्चनानस, श्यावाश्व। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 167 नाम दर्ज किए हैं।
संक्षेप में
श्यावाश्वाः गण अत्रि ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आत्रेय, आर्चनानस, श्यावाश्व। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 167 नाम दर्ज किए हैं।
प्रवर
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आत्रेय · आर्चनानस · श्यावाश्व | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 197 — “Shyavashva, Atri, Archananasa”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
इस गण के गोत्र-पृष्ठ
इस गण में दर्ज नाम (167)
गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।
- 1अङ्गिःबो
- 2अत्रयःआश्व, आप, बो
- 3अत्रिःम
- 4अरुणात्रेयःबो
- 5अर्घपथाःम
- 6अर्घपण्याःम
- 7आङ्गिमान्बो
- 8आत्रिःम
- 9आत्रेयःका
- 10आनङ्गिःबो
- 11आनीलायनाःबो
- 12आनीषायणाःबो
- 13आहायनाःका
- 14इन्द्रातिथिःबो
- 15उद्दालकःम
- 16उरुग्रीविःम
- 17औद्दालकिःबो
- 18औषसःका
- 19कणजिह्वःम
- 20कर्दमायनःम
- 21कर्मर्यायणयःबो
- 22कर्मर्यायनिःबो
- 23कानाजह्वःम
- 24कारग्रीविःका
- 25कार्मर्यायनयःबो
- 26कार्मर्यायनिःका
- 27कार्ष्णायनिःबो
- 28कालापचयाःबो
- 29कालायनिःबो
- 30कालावयःबो
- 31काविष्ठिराःबो
- 32कृष्णात्रेयःबो
- 33कैरजिःका
- 34कैरञ्जिःका
- 35कैरञ्जिःम
- 36कौण्डेयाःबो
- 37कौद्रेयाःबो
- 38गाणिपतयःबो
- 39गाणिष्टतयःबो
- 40गाधिपतिःबो
- 41गाविष्ठिराःबो
- 42गोणिपतःम
- 43गोणीपतिःम
- 44गोपनाःम
- 45गोपवनाःबो
- 46गोपवन्यःबो
- 47गोलेयःबो
- 48गौरागिःबो
- 49गौरग्रीवयःबो
- 50गौरग्रीवाःम
- 51गौरग्रीविःम
- 52गौराङ्गिःबो
- 53गौराजिनःम
- 54गौरात्रेयःबो
- 55गौर्यन्यःम
- 56चन्द्रातिथिःबो
- 57चान्द्रिःबो
- 58चैत्रायणाःम
- 59छगलाःबो
- 60छन्दोगिःबो
- 61छन्दोगेयःम
- 62छागलाःम
- 63छान्द्रिःम
- 64छान्दोगिःम
- 65छान्दोगिःका
- 66जलदःम
- 67जानुकिःका
- 68जैत्रायणाःका
- 69ताकिविन्दवःम
- 70तृणबिन्दवःम
- 71तृणबिन्दुःबो
- 72तैलपःम
- 73तौलेयःका
- 74दत्तात्रेयःबो
- 75दाक्षिःबो
- 76दिविःका
- 77दौराङ्गिःबो
- 78द्रोणगावाःबो
- 79द्रोणनाभःबो
- 80द्रोणभावाःबो
- 81नीलात्रेयाःबो
- 82नीलायनःबो
- 83नैद्राणिःम
- 84पतञ्जनःका
- 85पयनाःका
- 86पुष्टयःबो
- 87पौष्टिकाःबो
- 88प्रगलःम
- 89बालेयःबो
- 90बाहुतन्तःका
- 91बाहुमित्रःका
- 92भगपादःम
- 93भागमादयनःका
- 94भागमानःका
- 95भागम्पथःबो
- 96भाङ्कतयःबो
- 97भाङ्क्तयःबो
- 98भारद्वाजायनःबो
- 99भूमिःबो
- 100भूरयःबो
- 101मङ्गुलयःबो
- 102महात्रेयाःबो
- 103मानङ्गिःबो
- 104मालकयःबो
- 105मालयःबो
- 106मालरुचःबो
- 107माहुलिःबो
- 108मौद्गलाकिःका
- 109मौद्गुलयःबो
- 110रक्तात्रेयःबो
- 111वामरथीनाःबो
- 112वामरथ्याःबो
- 113वामरथ्याःका, म
- 114वालयःबो
- 115वालेयाःबो
- 116वैडालिःम
- 117वैतभावयःबो
- 118वैतभावाःबो
- 119वैदेहाःबो
- 120वैलेयःम
- 121वैलेयाःबो
- 122वौलेयःका
- 123व्यालयःबो
- 124शाकलायनिःम
- 125शाकलायानिःम
- 126शाकिःका
- 127शाखलियःका
- 128शाखेयाःम
- 129शाबव्यायनयःबो
- 130शारायणाःम
- 131शिखुपालः ?बो
- 132शौवाःबो
- 133शौणकर्णिःम
- 134शौद्रेयाःम
- 135शौकतयःम
- 136शौद्रेयाःम
- 137शौनकर्णिःका
- 138शौनकर्णिःम
- 139शौभ्रेयाःबो
- 140शौवाःबो
- 141श्यामात्रेयाःबो
- 142श्वाजानुकिःका
- 143श्वेतात्रेयाःबो
- 144श्योरङ्गिःबो
- 145सञ्चव्यानिःबो
- 146साकेतायनाःबो
- 147साङ्खेयःम
- 148साम्पच्यानेयःबो
- 149सारायणाःम
- 150सुपुष्पिःबो
- 151सैपास्थप्रालाः ?बो
- 152सैष्पयःबो
- 153सोपाच्छरालः ?बो
- 154सौगयःबो
- 155सौतवराःम
- 156सौपुष्पयःका
- 157सौपुष्पिःम
- 158सौभृतिःका
- 159सौभ्रेयःबो
- 160सौरागिःबो
- 161सौराङ्गिःबो
- 162सौश्रुतयःका
- 163स्तैदेहाःबो
- 164स्वेतकिःका
- 165हरप्रीतिःम
- 166हर्यश्वःका
- 167हालेयःबो
संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।
अत्रि-कुल के अन्य गण
स्रोत
पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 247–250 (archive.org leaf 287–290)।
