गण 68 — सौमवाहाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · ऐध्मवाह | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन | तालिका का मुख्य |
| आगस्त्य | 1 | आपस्तम्ब | विकल्प |
| आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · सौमवाह | 3 | आश्वलायन | विकल्प |
| आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · सौमवाह | 3 | बौधायन | इस ग्रंथ का मुख्य |
बौधायन यह प्रवर सोमवाहों के लिए बताते हैं.
इस गण में ग्रंथ ने 52 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · अगस्त्य गोत्र
गण 69 — साम्भवाहाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · साम्भवाह | 3 | बौधायन | तालिका का मुख्य |
इस गण में ग्रंथ ने 1 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें
गण 70 — याज्ञवाहाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · याज्ञवाह | 3 | बौधायन | तालिका का मुख्य |
इस गण में ग्रंथ ने 1 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें
गण 71 — मायोभुवाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आगस्त्य · माहेन्द्र · मायोभुव | 3 | कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 202 — “Agastya, Paurnamasa, Parana”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।
मत्स्य पुराण (अ. 202) के अंग्रेज़ी अनुवाद में इस समूह का प्रवर "अगस्त्य, पौर्णमास, पारण" छपा है, पर हिन्दी अनुवाद दो समूह अलग करता है: अगस्त्य, करम्भ, कौसल्य, शकट, सुमेधा, मयोभुव, गान्धारकायण, पौलस्त्य, पौलह, क्रतु → "अगस्त्य, महेन्द्र, मयोभुव"; और पौर्णमास, पारण → "अगस्त्य, पौर्णमास, पारण" — जो ग्रंथ की तालिका से मेल खाता है. मत्स्य के अनुसार पुलह, पुलस्त्य और क्रतु ने अगस्त्य के पुत्रों को गोद लिया था, इसीलिए उनके वंशज अगस्त्य-कुल में गिने जाते हैं.
इस गण में ग्रंथ ने 19 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · अगस्त्य गोत्र · पुलस्त्य गोत्र · पुलह गोत्र · क्रतु गोत्र
गण 72 — पौरणाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आगस्त्य · पौर्णमास · पौरण | 3 | कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 202 — “Agastya, Paurnamasa, Parana”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
इस गण में ग्रंथ ने 2 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें
गण 73 — पाणिकाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आगस्त्य · हैमवर्च · हैमोदक | 3 | प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) | तालिका का मुख्य |
| आगस्त्य · पौनायक · पाणिक | 3 | प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) | इस ग्रंथ का मुख्य |
प्रवरदर्पण पहला रूप शाक्र, शुक, हंस आदि के लिए और दूसरा विमलि, पाणिक, पिनायक आदि के लिए बताता है.
इस गण में ग्रंथ ने 0 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें
