अगस्त्य-कुल के गण और प्रवर

गोत्र-प्रवर ग्रंथों की तालिका में अगस्त्य ऋषि-कुल के 6 गण हैं (गण 68–73)। हर गण का अपना प्रवर है, और कई गणों में अलग-अलग सूत्र प्रवर के अलग रूप बताते हैं। नीचे हर गण का प्रवर, ग्रंथ के अनुसार, दिया गया है।

संक्षेप में

गोत्र-प्रवर ग्रंथों की तालिका में अगस्त्य ऋषि-कुल के 6 गण हैं (गण 68–73)। हर गण का अपना प्रवर है, और कई गणों में अलग-अलग सूत्र प्रवर के अलग रूप बताते हैं। नीचे हर गण का प्रवर, ग्रंथ के अनुसार, दिया गया है।

एक नज़र में

गण 68 — सौमवाहाःआगस्त्य, दार्ढ्यच्युत, ऐध्मवाह · 52 नाम
गण 69 — साम्भवाहाःआगस्त्य, दार्ढ्यच्युत, साम्भवाह · 1 नाम
गण 70 — याज्ञवाहाःआगस्त्य, दार्ढ्यच्युत, याज्ञवाह · 1 नाम
गण 71 — मायोभुवाःआगस्त्य, माहेन्द्र, मायोभुव · 19 नाम
गण 72 — पौरणाःआगस्त्य, पौर्णमास, पौरण · 2 नाम
गण 73 — पाणिकाःआगस्त्य, हैमवर्च, हैमोदक · 0 नाम

गण 68 — सौमवाहाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · ऐध्मवाह3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायनतालिका का मुख्य
आगस्त्य1आपस्तम्बविकल्प
आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · सौमवाह3आश्वलायनविकल्प
आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · सौमवाह3बौधायनइस ग्रंथ का मुख्य

बौधायन यह प्रवर सोमवाहों के लिए बताते हैं.

इस गण में ग्रंथ ने 52 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · अगस्त्य गोत्र

गण 69 — साम्भवाहाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · साम्भवाह3बौधायनतालिका का मुख्य

इस गण में ग्रंथ ने 1 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

गण 70 — याज्ञवाहाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · याज्ञवाह3बौधायनतालिका का मुख्य

इस गण में ग्रंथ ने 1 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

गण 71 — मायोभुवाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आगस्त्य · माहेन्द्र · मायोभुव3कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 202 — “Agastya, Paurnamasa, Parana”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।

मत्स्य पुराण (अ. 202) के अंग्रेज़ी अनुवाद में इस समूह का प्रवर "अगस्त्य, पौर्णमास, पारण" छपा है, पर हिन्दी अनुवाद दो समूह अलग करता है: अगस्त्य, करम्भ, कौसल्य, शकट, सुमेधा, मयोभुव, गान्धारकायण, पौलस्त्य, पौलह, क्रतु → "अगस्त्य, महेन्द्र, मयोभुव"; और पौर्णमास, पारण → "अगस्त्य, पौर्णमास, पारण" — जो ग्रंथ की तालिका से मेल खाता है. मत्स्य के अनुसार पुलह, पुलस्त्य और क्रतु ने अगस्त्य के पुत्रों को गोद लिया था, इसीलिए उनके वंशज अगस्त्य-कुल में गिने जाते हैं.

इस गण में ग्रंथ ने 19 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · अगस्त्य गोत्र · पुलस्त्य गोत्र · पुलह गोत्र · क्रतु गोत्र

गण 72 — पौरणाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आगस्त्य · पौर्णमास · पौरण3कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 202 — “Agastya, Paurnamasa, Parana”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में ग्रंथ ने 2 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

गण 73 — पाणिकाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आगस्त्य · हैमवर्च · हैमोदक3प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)तालिका का मुख्य
आगस्त्य · पौनायक · पाणिक3प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)इस ग्रंथ का मुख्य

प्रवरदर्पण पहला रूप शाक्र, शुक, हंस आदि के लिए और दूसरा विमलि, पाणिक, पिनायक आदि के लिए बताता है.

इस गण में ग्रंथ ने 0 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

अगस्त्य-कुल के गोत्र-पृष्ठ

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 282–285 (archive.org leaf 322–325)। मत्स्य पुराण से मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (1917).