गण 73 — पाणिकाः
पाणिकाः गण अगस्त्य ऋषि-कुल का गण है। प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) के अनुसार इसका प्रवर है — आगस्त्य, हैमवर्च, हैमोदक। सूत्रों में इसके 1 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 0 नाम दर्ज किए हैं।
संक्षेप में
पाणिकाः गण अगस्त्य ऋषि-कुल का गण है। प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) के अनुसार इसका प्रवर है — आगस्त्य, हैमवर्च, हैमोदक। सूत्रों में इसके 1 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 0 नाम दर्ज किए हैं।
प्रवर
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आगस्त्य · हैमवर्च · हैमोदक | 3 | प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) | तालिका का मुख्य |
| आगस्त्य · पौनायक · पाणिक | 3 | प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) | इस ग्रंथ का मुख्य |
प्रवरदर्पण पहला रूप शाक्र, शुक, हंस आदि के लिए और दूसरा विमलि, पाणिक, पिनायक आदि के लिए बताता है.
इस गण के नाम
ग्रंथ इस गण में कोई अलग गोत्र-नाम नहीं गिनाता — केवल प्रवर बताता है। यह गण किसी सूत्र में नहीं, केवल प्रवरदर्पण (17वीं सदी) में मिलता है।
अगस्त्य-कुल के अन्य गण
स्रोत
पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 284–285 (archive.org leaf 324–325)।
