गण 71 — मायोभुवाः
मायोभुवाः गण अगस्त्य ऋषि-कुल का गण है। कात्यायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आगस्त्य, माहेन्द्र, मायोभुव। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 19 नाम दर्ज किए हैं।
संक्षेप में
मायोभुवाः गण अगस्त्य ऋषि-कुल का गण है। कात्यायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आगस्त्य, माहेन्द्र, मायोभुव। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 19 नाम दर्ज किए हैं।
प्रवर
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आगस्त्य · माहेन्द्र · मायोभुव | 3 | कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 202 — “Agastya, Paurnamasa, Parana”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।
मत्स्य पुराण (अ. 202) के अंग्रेज़ी अनुवाद में इस समूह का प्रवर "अगस्त्य, पौर्णमास, पारण" छपा है, पर हिन्दी अनुवाद दो समूह अलग करता है: अगस्त्य, करम्भ, कौसल्य, शकट, सुमेधा, मयोभुव, गान्धारकायण, पौलस्त्य, पौलह, क्रतु → "अगस्त्य, महेन्द्र, मयोभुव"; और पौर्णमास, पारण → "अगस्त्य, पौर्णमास, पारण" — जो ग्रंथ की तालिका से मेल खाता है. मत्स्य के अनुसार पुलह, पुलस्त्य और क्रतु ने अगस्त्य के पुत्रों को गोद लिया था, इसीलिए उनके वंशज अगस्त्य-कुल में गिने जाते हैं.
इस गण के गोत्र-पृष्ठ
इस गण में दर्ज नाम (19)
गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।
- 1अगस्तयःका, म
- 2करटाःका, म
- 3करम्भयःका, म
- 4कुनाडाःका
- 5कुरुनाड्यःका
- 6कौशल्याःका, म
- 7कौसल्याःका, म
- 8क्रतुःका
- 9क्रतुवंशभवाःम
- 10खगेवसःका
- 11खमेवसःका
- 12गान्धरायणाःका
- 13गान्धारायणाःम
- 14पुलहःका
- 15पौलस्तयःका
- 16पौलस्त्याःम
- 17पौलहाःम
- 18मयोभुवःका, म
- 19सुमेधसःका, म
संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.
अगस्त्य-कुल के अन्य गण
स्रोत
पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 284 (archive.org leaf 324)।
