पुलह गोत्र

पुलह गोत्र कात्यायन और मत्स्य की सूचियों में अगस्त्य-कुल के मायोभुव गण में है। प्रवर: आगस्त्य, माहेन्द्र, मायोभुव। मत्स्य पुराण के अनुसार पुलह ने अगस्त्य के पुत्र दृढास्य को गोद लिया था।

संक्षेप में

पुलह गोत्र अगस्त्य-कुल का गोत्र है। ग्रंथ की तालिका में "पुलहः" कात्यायन की और "पौलहाः" मत्स्य पुराण की सूची में मायोभुव गण में है। इस गण का प्रवर है — आगस्त्य, माहेन्द्र, मायोभुव। मत्स्य पुराण के अनुसार पुलह ने अगस्त्य के पुत्र दृढास्य को गोद लिया था, इसलिए उनके वंशज अगस्त्य-कुल में हैं।

मुख्य जानकारी

गोत्रपुलह (Pulaha)
अन्य नाम / वर्तनीपौलह, पुलह, Paulaha, Pulah
ऋषि-कुलअगस्त्य
गोत्रकार ऋषिमहर्षि अगस्त्य
ऋषि-पृष्ठमहर्षि पुलह
गणगण 71 — मायोभुवाः
मुख्य प्रवरआगस्त्य, माहेन्द्र, मायोभुव (कात्यायन, मत्स्य पुराण)
ग्रंथ-सूची मेंगण 71: "पुलहः" (कात्यायन); गण 71: "पौलहाः" (मत्स्य पुराण)

पुलह गोत्र — परिचय

मायोभुव गण अगस्त्य-कुल का चौथा गण है, जिसमें 19 नाम दर्ज हैं — इनमें पुलह, पुलस्त्य और क्रतु तीनों के वंश आते हैं।

मत्स्य पुराण (अध्याय 202) बताता है कि क्रतु ने अगस्त्य के पुत्र इध्मवाह को गोद लिया, पुलह ने दृढास्य को, और पुलस्त्य ने भी अगस्त्य के एक पुत्र को। इसीलिए इन तीनों के वंशज "अगस्त्य" कहलाते हैं और अगस्त्य-कुल में गिने जाते हैं।

प्रवर — गण 71 (मायोभुवाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आगस्त्य · माहेन्द्र · मायोभुव3कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 202 — “Agastya, Paurnamasa, Parana”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।

इस गण में दर्ज नाम (19)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। पुलह गोत्र की पंक्तियाँ अलग रंग में है।

  1. 1अगस्तयःका, म
  2. 2करटाःका, म
  3. 3करम्भयःका, म
  4. 4कुनाडाःका
  5. 5कुरुनाड्यःका
  6. 6कौशल्याःका, म
  7. 7कौसल्याःका, म
  8. 8क्रतुःका
  9. 9क्रतुवंशभवाःम
  10. 10खगेवसःका
  11. 11खमेवसःका
  12. 12गान्धरायणाःका
  13. 13गान्धारायणाःम
  14. 14पुलहःका
  15. 15पौलस्तयःका
  16. 16पौलस्त्याःम
  17. 17पौलहाःम
  18. 18मयोभुवःका, म
  19. 19सुमेधसःका, म

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

गण 71 — मायोभुवाः का पूरा पृष्ठ

इसी गण के अन्य गोत्र-पृष्ठ

पूजा, संकल्प और विवाह में पुलह गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। पुलह गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह पुलहआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप आगस्त्य, माहेन्द्र, मायोभुव है (कात्यायन, मत्स्य पुराण)।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

पुलह गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न