अगस्त्य गोत्र

बौधायन सूत्र अगस्त्य को सात ऋषियों के बाद आठवाँ गोत्रकार मानता है। अगस्त्य गोत्र का प्रवर आगस्त्य, दार्ढ्यच्युत, ऐध्मवाह है (चारों सूत्र)। जानिए अगस्त्य-कुल के 6 गण और स्रोत।

संक्षेप में

अगस्त्य गोत्र महर्षि अगस्त्य का गोत्र है। बौधायन सूत्र गोत्र की परिभाषा में सात ऋषियों के बाद अगस्त्य को आठवाँ गोत्रकार गिनता है। ग्रंथ में "अगस्तयः" आश्वलायन, आपस्तम्ब और बौधायन की सूची में है, जिसका प्रवर है — आगस्त्य, दार्ढ्यच्युत, ऐध्मवाह। आपस्तम्ब विकल्प में केवल "आगस्त्य" भी देते हैं।

मुख्य जानकारी

गोत्रअगस्त्य (Agastya)
अन्य नाम / वर्तनीआगस्त्य, अगस्ति, Agasthya, Agastya
ऋषि-कुलअगस्त्य
गोत्रकार ऋषिमहर्षि अगस्त्य
ऋषि-पृष्ठमहर्षि पुलस्त्य, महर्षि पुलह, महर्षि क्रतु
गणगण 68 — सौमवाहाः; गण 71 — मायोभुवाः
मुख्य प्रवरआगस्त्य, दार्ढ्यच्युत, ऐध्मवाह (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन)
ग्रंथ-सूची मेंगण 68: "अगस्तयः" (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन); गण 71: "अगस्तयः" (कात्यायन, मत्स्य पुराण)

अगस्त्य गोत्र — परिचय

बौधायन का वचन है: "सप्तानां सप्तऋषीणामगस्त्याष्टमानां यदपत्यं तद्गोत्रमित्युच्यते" — यानी सात ऋषियों और आठवें अगस्त्य की संतान गोत्र कहलाती है। इसलिए अगस्त्य गोत्र-परंपरा के मूल आठ ऋषियों में हैं।

ग्रंथ की तालिका में अगस्त्य-कुल के 6 गण हैं — सोमवाह, साम्भवाह, याज्ञवाह, मायोभुव, पौरण और पाणिक। सबके प्रवर में पहला नाम "आगस्त्य" है।

सोमवाह और मायोभुव गण

चारों सूत्र अगस्त्य परिवारों को सोमवाह गण में रखते हैं (प्रवर: आगस्त्य, दार्ढ्यच्युत, ऐध्मवाह)। कात्यायन और मत्स्य पुराण इन्हें मायोभुव गण में रखते हैं, जिसका प्रवर है — आगस्त्य, माहेन्द्र, मायोभुव।

मत्स्य पुराण (अध्याय 202) बताता है कि क्रतु ने अगस्त्य के पुत्र इध्मवाह को गोद लिया, पुलह ने दृढास्य को, और पुलस्त्य ने भी अगस्त्य के एक पुत्र को। इसीलिए इन तीनों के वंशज "अगस्त्य" कहलाते हैं और अगस्त्य-कुल में गिने जाते हैं।

प्रवर — गण 68 (सौमवाहाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · ऐध्मवाह3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायनतालिका का मुख्य
आगस्त्य1आपस्तम्बविकल्प
आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · सौमवाह3आश्वलायनविकल्प
आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · सौमवाह3बौधायनइस ग्रंथ का मुख्य

इस गण में दर्ज नाम (52)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। अगस्त्य गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1अगवाःका
  2. 2अगस्तयःआश्व, आप, बो
  3. 3अर्बुदाःका
  4. 4अवतानःका
  5. 5उपकुलःका
  6. 6औदहयनःबो
  7. 7औपदहनयःबो
  8. 8कल्माषःका
  9. 9कालायनाःबो
  10. 10कुल्माषःबो
  11. 11क्षौमितिःका
  12. 12खलायनाःबो
  13. 13गौव्यवाःका
  14. 14गौव्याभिःका
  15. 15दण्डिःबो
  16. 16दारुतापायनाःका
  17. 17देवताःका
  18. 18द्वारिग्रीवाःबो
  19. 19धारिणिःका
  20. 20निर्वैरिणिःका
  21. 21पार्थोद्धताःबो
  22. 22पार्थोह्वताःबो
  23. 23पारिणिःका
  24. 24ववदयःबो
  25. 25बुधोदयःबो
  26. 26बुधोदरिःबो
  27. 27मेदिनपञ्चकःका
  28. 28मोक्षतिःका
  29. 29मौजिकयःबो
  30. 30मौञ्जिकयःबो
  31. 31मौशलयःबो
  32. 32मौसलयःबो
  33. 33रोहिःबो
  34. 34रोहिष्याःबो
  35. 35लाप्यःबो
  36. 36लावर्णिःबो
  37. 37लाव्यःबो
  38. 38वावर्णाःबो
  39. 39वरण्डिःबो
  40. 40वित्तपःका
  41. 41विशालाद्याःबो
  42. 42वैरणयःबो
  43. 43वैरण्डिःबो
  44. 44वैरिणिःका
  45. 45शाल्यातपाःबो
  46. 46शैरिषःका
  47. 47सुकुलिः ?का
  48. 48सैवपथयःबो
  49. 49सोमवाहाःबो
  50. 50सौरिभागःका
  51. 51हारिग्रीवाःबो
  52. 52हैमवहवाःबो

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।

गण 68 — सौमवाहाः का पूरा पृष्ठ

प्रवर — गण 71 (मायोभुवाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आगस्त्य · माहेन्द्र · मायोभुव3कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 202 — “Agastya, Paurnamasa, Parana”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।

इस गण में दर्ज नाम (19)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। अगस्त्य गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1अगस्तयःका, म
  2. 2करटाःका, म
  3. 3करम्भयःका, म
  4. 4कुनाडाःका
  5. 5कुरुनाड्यःका
  6. 6कौशल्याःका, म
  7. 7कौसल्याःका, म
  8. 8क्रतुःका
  9. 9क्रतुवंशभवाःम
  10. 10खगेवसःका
  11. 11खमेवसःका
  12. 12गान्धरायणाःका
  13. 13गान्धारायणाःम
  14. 14पुलहःका
  15. 15पौलस्तयःका
  16. 16पौलस्त्याःम
  17. 17पौलहाःम
  18. 18मयोभुवःका, म
  19. 19सुमेधसःका, म

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

गण 71 — मायोभुवाः का पूरा पृष्ठ

इसी गण के अन्य गोत्र-पृष्ठ

पूजा, संकल्प और विवाह में अगस्त्य गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। अगस्त्य गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह अगस्त्यआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप आगस्त्य, दार्ढ्यच्युत, ऐध्मवाह है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन)। यह नाम ग्रंथ में एक से अधिक गणों में है, इसलिए वही प्रवर लें जो आपका परिवार बोलता है।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

अगस्त्य गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न