अगस्त्य गोत्र — परिचय
बौधायन का वचन है: "सप्तानां सप्तऋषीणामगस्त्याष्टमानां यदपत्यं तद्गोत्रमित्युच्यते" — यानी सात ऋषियों और आठवें अगस्त्य की संतान गोत्र कहलाती है। इसलिए अगस्त्य गोत्र-परंपरा के मूल आठ ऋषियों में हैं।
ग्रंथ की तालिका में अगस्त्य-कुल के 6 गण हैं — सोमवाह, साम्भवाह, याज्ञवाह, मायोभुव, पौरण और पाणिक। सबके प्रवर में पहला नाम "आगस्त्य" है।
सोमवाह और मायोभुव गण
चारों सूत्र अगस्त्य परिवारों को सोमवाह गण में रखते हैं (प्रवर: आगस्त्य, दार्ढ्यच्युत, ऐध्मवाह)। कात्यायन और मत्स्य पुराण इन्हें मायोभुव गण में रखते हैं, जिसका प्रवर है — आगस्त्य, माहेन्द्र, मायोभुव।
मत्स्य पुराण (अध्याय 202) बताता है कि क्रतु ने अगस्त्य के पुत्र इध्मवाह को गोद लिया, पुलह ने दृढास्य को, और पुलस्त्य ने भी अगस्त्य के एक पुत्र को। इसीलिए इन तीनों के वंशज "अगस्त्य" कहलाते हैं और अगस्त्य-कुल में गिने जाते हैं।
प्रवर — गण 68 (सौमवाहाः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · ऐध्मवाह | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन | तालिका का मुख्य |
| आगस्त्य | 1 | आपस्तम्ब | विकल्प |
| आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · सौमवाह | 3 | आश्वलायन | विकल्प |
| आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · सौमवाह | 3 | बौधायन | इस ग्रंथ का मुख्य |
प्रवर — गण 71 (मायोभुवाः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आगस्त्य · माहेन्द्र · मायोभुव | 3 | कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 202 — “Agastya, Paurnamasa, Parana”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।
पूजा, संकल्प और विवाह में अगस्त्य गोत्र
संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। अगस्त्य गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह अगस्त्यआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप आगस्त्य, दार्ढ्यच्युत, ऐध्मवाह है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन)। यह नाम ग्रंथ में एक से अधिक गणों में है, इसलिए वही प्रवर लें जो आपका परिवार बोलता है।
ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।
