गण 68 — सौमवाहाः

सौमवाहाः गण अगस्त्य ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन के अनुसार इसका प्रवर है — आगस्त्य, दार्ढ्यच्युत, ऐध्मवाह। सूत्रों में इसके 3 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 52 नाम दर्ज किए हैं।

संक्षेप में

सौमवाहाः गण अगस्त्य ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन के अनुसार इसका प्रवर है — आगस्त्य, दार्ढ्यच्युत, ऐध्मवाह। सूत्रों में इसके 3 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 52 नाम दर्ज किए हैं।

प्रवर

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · ऐध्मवाह3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायनतालिका का मुख्य
आगस्त्य1आपस्तम्बविकल्प
आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · सौमवाह3आश्वलायनविकल्प
आगस्त्य · दार्ढ्यच्युत · सौमवाह3बौधायनइस ग्रंथ का मुख्य

बौधायन यह प्रवर सोमवाहों के लिए बताते हैं.

इस गण के गोत्र-पृष्ठ

इस गण में दर्ज नाम (52)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।

  1. 1अगवाःका
  2. 2अगस्तयःआश्व, आप, बो
  3. 3अर्बुदाःका
  4. 4अवतानःका
  5. 5उपकुलःका
  6. 6औदहयनःबो
  7. 7औपदहनयःबो
  8. 8कल्माषःका
  9. 9कालायनाःबो
  10. 10कुल्माषःबो
  11. 11क्षौमितिःका
  12. 12खलायनाःबो
  13. 13गौव्यवाःका
  14. 14गौव्याभिःका
  15. 15दण्डिःबो
  16. 16दारुतापायनाःका
  17. 17देवताःका
  18. 18द्वारिग्रीवाःबो
  19. 19धारिणिःका
  20. 20निर्वैरिणिःका
  21. 21पार्थोद्धताःबो
  22. 22पार्थोह्वताःबो
  23. 23पारिणिःका
  24. 24ववदयःबो
  25. 25बुधोदयःबो
  26. 26बुधोदरिःबो
  27. 27मेदिनपञ्चकःका
  28. 28मोक्षतिःका
  29. 29मौजिकयःबो
  30. 30मौञ्जिकयःबो
  31. 31मौशलयःबो
  32. 32मौसलयःबो
  33. 33रोहिःबो
  34. 34रोहिष्याःबो
  35. 35लाप्यःबो
  36. 36लावर्णिःबो
  37. 37लाव्यःबो
  38. 38वावर्णाःबो
  39. 39वरण्डिःबो
  40. 40वित्तपःका
  41. 41विशालाद्याःबो
  42. 42वैरणयःबो
  43. 43वैरण्डिःबो
  44. 44वैरिणिःका
  45. 45शाल्यातपाःबो
  46. 46शैरिषःका
  47. 47सुकुलिः ?का
  48. 48सैवपथयःबो
  49. 49सोमवाहाःबो
  50. 50सौरिभागःका
  51. 51हारिग्रीवाःबो
  52. 52हैमवहवाःबो

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।

अगस्त्य-कुल के अन्य गण

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 282–283 (archive.org leaf 322–323)।