गण 72 — पौरणाः

पौरणाः गण अगस्त्य ऋषि-कुल का गण है। कात्यायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आगस्त्य, पौर्णमास, पौरण। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 2 नाम दर्ज किए हैं।

संक्षेप में

पौरणाः गण अगस्त्य ऋषि-कुल का गण है। कात्यायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आगस्त्य, पौर्णमास, पौरण। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 2 नाम दर्ज किए हैं।

प्रवर

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आगस्त्य · पौर्णमास · पौरण3कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 202 — “Agastya, Paurnamasa, Parana”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में दर्ज नाम (2)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।

  1. 1पारणाःका, म
  2. 2पूर्णमासाःका, म

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

अगस्त्य-कुल के अन्य गण

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 284 (archive.org leaf 324)।