गण 41 — औदलाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · दैवरात · औदल | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 198 — “Vishvamitra, Devarata, Uddalaka”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
इस गण में ग्रंथ ने 126 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · विश्वामित्र गोत्र · कौशिक गोत्र · गालव गोत्र
गण 42 — दैवतरसाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · दैवश्रवस · दैवतरस | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन | तालिका का मुख्य |
इस गण में ग्रंथ ने 11 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · विश्वामित्र गोत्र
गण 43 — धानञ्जयाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · माधुच्छन्दस · धानञ्जय | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन | तालिका का मुख्य |
| वैश्वामित्र · माधुच्छन्दस · आघमर्षण | 3 | मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 198 — “Vishvamitra, Madhuchchhanda, Aghamarshana”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।
सूत्र तीसरा ऋषि "धानञ्जय" बताते हैं, जबकि मत्स्य पुराण (अ. 198) धनञ्जय परिवारों के लिए "आघमर्षण" देता है. यह मत्स्य-पाठ ग्रंथ की इस तालिका में नहीं है; वह मत्स्य के अनुवाद से लिया गया है.
इस गण में ग्रंथ ने 12 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · धनञ्जय गोत्र
गण 44 — आजाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · माधुच्छन्दस · आज | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन | तालिका का मुख्य |
| वैश्वामित्र · आश्मरथ्य · वाधुल | 3 | कात्यायन | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 198 — “Kamalayajina, Ashmarathya, Bandhula”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
कात्यायन के रूप में "वाधुल" को ग्रंथ "बन्धुल" के बराबर बताता है.
इस गण में ग्रंथ ने 14 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें
गण 45 — रौहिणाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · माधुच्छन्दस · रौहिण | 3 | आश्वलायन | तालिका का मुख्य |
इस गण में ग्रंथ ने 1 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें
गण 46 — आष्टकाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · माधुच्छन्दस · आष्टक | 3 | आश्वलायन | तालिका का मुख्य |
| वैश्वामित्र · आष्टक | 2 | आपस्तम्ब | इस ग्रंथ का मुख्य |
| वैश्वामित्र · आष्टक · लौहित | 3 | बौधायन | इस ग्रंथ का मुख्य |
| वैश्वामित्र · लौहित · आष्टक | 3 | कात्यायन, मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 198 — “Vishvamitra, Lohita, Ashtaka”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
मत्स्य पुराण के अनुसार आष्टक और लोहित परिवारों में आपस में विवाह नहीं होता.
इस गण में ग्रंथ ने 13 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · लोहित गोत्र
गण 47 — पौरणाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · दैवरात · पौरण | 3 | आश्वलायन | तालिका का मुख्य |
| वैश्वामित्र · पौरण | 2 | आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 198 — “Vishvamitra, Purana”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
इस गण में ग्रंथ ने 6 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · लोहित गोत्र
गण 48 — आक्षीलाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · कात्य · आक्षील | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन | तालिका का मुख्य |
| साति · सौलिद्धारि · वैश्वामित्र | 3 | मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 198 — “Khilakhila, Vidya, Vishvamitra”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
मत्स्य-रूप के पहले दो नाम ग्रंथ में "साति (खिलिखिलि)" और "सौलिद्धारि (विद्य)" छपे हैं — कोष्ठक के नाम मत्स्य की दूसरी पाण्डुलिपियों के हैं.
इस गण में ग्रंथ ने 45 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · कात्यायन गोत्र
गण 49 — कौशिकाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · आघमर्षण · कौशिक | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन | तालिका का मुख्य |
इस गण में ग्रंथ ने 3 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · कौशिक गोत्र
गण 50 — रैवणाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · गाधिन · रैवण | 3 | आश्वलायन | तालिका का मुख्य |
इस गण में ग्रंथ ने 1 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें
गण 51 — क्रथकाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · रौत्थक · रैवण | 3 | बौधायन | तालिका का मुख्य |
| वैश्वामित्र · गाथिन · रैवण | 3 | कात्यायन, मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
| वैश्वामित्र · काथक · क्राथक | 3 | प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 198 — “Vishvamitra, Gathina, Raivana”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
इस गण में ग्रंथ ने 14 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें
गण 52 — वैणवाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · गाथिन · वैणव | 3 | आश्वलायन | तालिका का मुख्य |
इस गण में ग्रंथ ने 1 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें
गण 53 — शालङ्कायनाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · शालङ्कायन · कौशिक | 3 | आश्वलायन | तालिका का मुख्य |
इस गण में ग्रंथ ने 5 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · लोहित गोत्र
गण 54 — इन्द्रकौशिकाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · ऐन्द्र · कौशिक | 3 | आश्वलायन | तालिका का मुख्य |
इस गण में ग्रंथ ने 1 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें
गण 55 — साहुलाः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · साहुल · माहुल | 3 | प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) | तालिका का मुख्य |
इस गण में ग्रंथ ने 0 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें
गण 56 — हिरण्यरेतसः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · हैरण्यरेतस | 2 | प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) | तालिका का मुख्य |
इस गण में ग्रंथ ने 0 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें
गण 57 — सुवर्णरेतसः
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · कापातरस | 2 | प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) | तालिका का मुख्य |
इस गण में ग्रंथ ने 0 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें
