कौशिक गोत्र

कौशिक गोत्र विश्वामित्र-कुल का है। बौधायन और आपस्तम्ब इसे अघमर्षण गण में रखते हैं (प्रवर: वैश्वामित्र, आघमर्षण, कौशिक); "कुशिक" नाम औदल गण में भी है। दोनों प्रवर और स्रोत।

संक्षेप में

कौशिक गोत्र महर्षि विश्वामित्र के कुल का गोत्र है। बौधायन "कौशिकाः" को और आपस्तम्ब "अघमर्षण-कुशिकाः" को अघमर्षण गण में रखते हैं, जिसका प्रवर है — वैश्वामित्र, आघमर्षण, कौशिक। "कुशिक" नाम आश्वलायन और बौधायन की औदल-गण सूची में भी है, जिसका प्रवर वैश्वामित्र, दैवरात, औदल है।

मुख्य जानकारी

गोत्रकौशिक (Kaushik)
अन्य नाम / वर्तनीकौशिक, कुशिक, Kaushika, Koushik
ऋषि-कुलविश्वामित्र
गोत्रकार ऋषिमहर्षि विश्वामित्र
गणगण 49 — कौशिकाः; गण 41 — औदलाः
मुख्य प्रवरवैश्वामित्र, आघमर्षण, कौशिक (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन)
ग्रंथ-सूची मेंगण 49: "कौशिकाः" (बौधायन); गण 49: "अघमर्षणाः-कुशिकाः" (आपस्तम्ब); गण 41: "कुशिकः" (आश्वलायन); गण 41: "कुशिकाः" (बौधायन)

कौशिक गोत्र — परिचय

परंपरा में विश्वामित्र को "कौशिक" भी कहा जाता है, और ग्रंथ में कौशिक नाम विश्वामित्र-कुल के गणों में ही मिलता है। अघमर्षण गण का प्रवर आश्वलायन, आपस्तम्ब और बौधायन — तीनों बताते हैं।

विश्वामित्र-कुल के कई और गणों के प्रवर में भी "कौशिक" आता है — जैसे शालङ्कायन गण (वैश्वामित्र, शालङ्कायन, कौशिक) और इन्द्रकौशिक गण (वैश्वामित्र, ऐन्द्र, कौशिक)।

कौशिक और कुशिक

ग्रंथ में "कौशिकाः" अघमर्षण गण में है, और "कुशिकः" / "कुशिकाः" औदल गण में। दोनों गणों के प्रवर अलग हैं।

इसलिए कौशिक-गोत्री परिवारों में प्रवर अलग-अलग हो सकता है। अपना प्रवर घर के बड़ों या कुल-पुरोहित से पूछ लें।

प्रवर — गण 49 (कौशिकाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वैश्वामित्र · आघमर्षण · कौशिक3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायनतालिका का मुख्य

इस गण में दर्ज नाम (3)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। कौशिक गोत्र की पंक्तियाँ अलग रंग में है।

  1. 1अघमर्षणाःआश्व, बो
  2. 2अघमर्षणाः-कुशिकाःआप
  3. 3कौशिकाःबो

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

गण 49 — कौशिकाः का पूरा पृष्ठ

प्रवर — गण 41 (औदलाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वैश्वामित्र · दैवरात · औदल3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 198 — “Vishvamitra, Devarata, Uddalaka”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में दर्ज नाम (126)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। कौशिक गोत्र की पंक्तियाँ अलग रंग में है।

  1. 1अनूतकिःबो
  2. 2अनूनतन्तवःबो
  3. 3अपगहनयःका
  4. 4अभयःम
  5. 5आनभिम्लाः ?बो
  6. 6आपघव्यः ?बो
  7. 7आयतायनःम
  8. 8आलकिःआप
  9. 9आलविःबो
  10. 10आलोप्याःका
  11. 11आश्वःम
  12. 12आश्वतापनःम
  13. 13उत्सरयःबो
  14. 14उदस्वरिःबो
  15. 15उदरिः ?बो
  16. 16उलूकःआप
  17. 17उलूपाःम
  18. 18औदलिःबो
  19. 19औपगवयःम
  20. 20औपगहयाःम
  21. 21औपदहनयःबो
  22. 22औलकिःआप
  23. 23औलोकिःआप
  24. 24औलोप्याःम
  25. 25करीपाःम
  26. 26कामन्तकिःबो
  27. 27कारीपिःम
  28. 28कारीषीम
  29. 29कार्षिसम्मत्याः ?का
  30. 30कालःआश्व, आप
  31. 31कालायनःबो
  32. 32कुशिकःआश्व
  33. 33कुशिकाःबो
  34. 34क्षग्णापः ?का
  35. 35क्षरपापाःम
  36. 36क्षरयः ?म
  37. 37खरवाच्यः ?म
  38. 38गालवःआश्व, म
  39. 39गौराःबो
  40. 40चिकितःआश्व, आप
  41. 41चिकिताःबो
  42. 42चित्रन्तवयःबो
  43. 43चिन्तितःबो
  44. 44चैत्रेयाःबो
  45. 45जाबालःका
  46. 46जाबालयःबो
  47. 47जाबालाःम
  48. 48डोलीका
  49. 49तन्तुः ?आप
  50. 50तारकायनः ?बो
  51. 51तार्क्वताः ?बो
  52. 52तात्वावताः ?बो
  53. 53देवरातःआप, म
  54. 54धुवलयः ?बो
  55. 55पयोदजनाःम
  56. 56पर्णजङ्घाःबो
  57. 57पाडलिःम
  58. 58पादपाःम
  59. 59पापेदिरयःका
  60. 60पारक्याःबो
  61. 61पार्णर्यःका
  62. 62पार्योदरयःम
  63. 63पार्षयःम
  64. 64प्ययः ?का
  65. 65प्रास्रोदरयःम
  66. 66बद्धकथः ?बो
  67. 67बभ्रुःआप
  68. 68बवःआश्व, आप
  69. 69बाभ्रव्यःका
  70. 70बाभ्रव्याःबो, म
  71. 71बृहदग्निःआप, बो
  72. 72भलीभावाःम
  73. 73भाष्टकिःबो
  74. 74भाष्ठेयाःबो
  75. 75भोवनिःबो
  76. 76मनुःआप
  77. 77मनुतन्तुःआश्व, आप
  78. 78मनुशब्दान्ताःबो
  79. 79मयूराःबो
  80. 80माणिःबो
  81. 81मान्तवःबो
  82. 82यज्ञवल्कःआप
  83. 83यमदूताःबो
  84. 84यमह्वताःबो
  85. 85याज्ञवल्क्याःबो, का, म
  86. 86राघहिः ?बो
  87. 87लाभकायनाःबो
  88. 88लामकायनाःबो
  89. 89लोकाःबो
  90. 90वतण्डःम
  91. 91वारक्याःबो
  92. 92वालकायनःबो
  93. 93वालकिःआप
  94. 94वास्तुकौशिकाःम
  95. 95वितन्तुःबो
  96. 96विदडाःबो
  97. 97विश्वामित्रःम
  98. 98वृकायनःम
  99. 99वैकृतिःम
  100. 100शलङ्कुःम
  101. 101शालङ्कायनःआप
  102. 102शालङ्कायनाःबो
  103. 103शालावतःआप
  104. 104शाविनिःआप
  105. 105श्यामायनाःम
  106. 106श्यामेयाःबो
  107. 107श्वेत्यन्तायनःबो
  108. 108श्वोवलाःबो
  109. 109संश्रुतःम
  110. 110संश्रुत्यःम
  111. 111संसृतःम
  112. 112संसृत्यःम
  113. 113सलङ्कुःम
  114. 114साङ्कायनाःबो
  115. 115साधिताःम
  116. 116सैन्धवायनःका
  117. 117सैन्धवायनाःम
  118. 118सौगतयःबो
  119. 119सौगन्तयःबो
  120. 120सौमत्याःबो
  121. 121सौमित्याःबो
  122. 122सौश्रयःबो
  123. 123सौश्रुताःका
  124. 124सौश्रुतिःबो
  125. 125स्येतन्तायनाःबो
  126. 126हलयमाःम

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।

गण 41 — औदलाः का पूरा पृष्ठ

इसी गण के अन्य गोत्र-पृष्ठ

पूजा, संकल्प और विवाह में कौशिक गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। कौशिक गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह कौशिकआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप वैश्वामित्र, आघमर्षण, कौशिक है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन)। यह नाम ग्रंथ में एक से अधिक गणों में है, इसलिए वही प्रवर लें जो आपका परिवार बोलता है।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

कौशिक गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न