गण 49 — कौशिकाः
कौशिकाः गण विश्वामित्र ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन के अनुसार इसका प्रवर है — वैश्वामित्र, आघमर्षण, कौशिक। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 3 नाम दर्ज किए हैं।
संक्षेप में
कौशिकाः गण विश्वामित्र ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन के अनुसार इसका प्रवर है — वैश्वामित्र, आघमर्षण, कौशिक। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 3 नाम दर्ज किए हैं।
प्रवर
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वैश्वामित्र · आघमर्षण · कौशिक | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन | तालिका का मुख्य |
इस गण के गोत्र-पृष्ठ
इस गण में दर्ज नाम (3)
गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।
- 1अघमर्षणाःआश्व, बो
- 2अघमर्षणाः-कुशिकाःआप
- 3कौशिकाःबो
संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.
विश्वामित्र-कुल के अन्य गण
स्रोत
पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 259 (archive.org leaf 299)।
