गण 57 — सुवर्णरेतसः

सुवर्णरेतसः गण विश्वामित्र ऋषि-कुल का गण है। प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) के अनुसार इसका प्रवर है — वैश्वामित्र, कापातरस। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 0 नाम दर्ज किए हैं।

संक्षेप में

सुवर्णरेतसः गण विश्वामित्र ऋषि-कुल का गण है। प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट) के अनुसार इसका प्रवर है — वैश्वामित्र, कापातरस। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 0 नाम दर्ज किए हैं।

प्रवर

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वैश्वामित्र · कापातरस2प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)तालिका का मुख्य

इस गण के नाम

ग्रंथ इस गण में कोई अलग गोत्र-नाम नहीं गिनाता — केवल प्रवर बताता है। यह गण किसी सूत्र में नहीं, केवल प्रवरदर्पण (17वीं सदी) में मिलता है।

विश्वामित्र-कुल के अन्य गण

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 261 (archive.org leaf 301)।