कश्यप-कुल के गण और प्रवर

गोत्र-प्रवर ग्रंथों की तालिका में कश्यप ऋषि-कुल के 5 गण हैं (गण 58–62)। हर गण का अपना प्रवर है, और कई गणों में अलग-अलग सूत्र प्रवर के अलग रूप बताते हैं। नीचे हर गण का प्रवर, ग्रंथ के अनुसार, दिया गया है।

संक्षेप में

गोत्र-प्रवर ग्रंथों की तालिका में कश्यप ऋषि-कुल के 5 गण हैं (गण 58–62)। हर गण का अपना प्रवर है, और कई गणों में अलग-अलग सूत्र प्रवर के अलग रूप बताते हैं। नीचे हर गण का प्रवर, ग्रंथ के अनुसार, दिया गया है।

एक नज़र में

गण 58 — कश्यपाःकाश्यप, आवत्सार, आसित · 1 नाम
गण 59 — शण्डिलाःशाण्डिल, आसित, दैवल · 121 नाम
गण 60 — रेभाःकाश्यप, आवत्सार, रैभ्य · 1 नाम
गण 61 — निध्रुवाःकाश्यप, आवत्सार, नैध्रुव · 382 नाम
गण 62 — लौगाक्षयःकाश्यप, आवत्सार, वासिष्ठ · 39 नाम

गण 58 — कश्यपाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
काश्यप · आवत्सार · आसित3आश्वलायनतालिका का मुख्य

इस गण में ग्रंथ ने 1 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · कश्यप गोत्र

गण 59 — शण्डिलाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
शाण्डिल · आसित · दैवल3आश्वलायन, कात्यायनतालिका का मुख्य
काश्यप · आसित · दैवल3आश्वलायन, कात्यायनविकल्प
दैवल · आसित2आपस्तम्बइस ग्रंथ का मुख्य
काश्यप · दैवल · आसित3आपस्तम्बविकल्प
काश्यप · आवत्सार · आसित3बौधायनइस ग्रंथ का मुख्य
काश्यप · आवत्सार · शाण्डिल्य3बौधायनविकल्प
काश्यप · आवत्सार · दैवल3बौधायनविकल्प
शाण्डिल्य · आसित · दैवल3बौधायनविकल्प
आसित · दैवल · काश्यप3मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 199 — “Asita, Devala, Kashyapa”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में ग्रंथ ने 121 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · धन्वन्तरि गोत्र · कश्यप गोत्र · शाण्डिल्य गोत्र

गण 60 — रेभाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
काश्यप · आवत्सार · रैभ्य3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायनतालिका का मुख्य

इस गण में ग्रंथ ने 1 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

गण 61 — निध्रुवाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
काश्यप · आवत्सार · नैध्रुव3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 199 — “Vatsara, Kashyapa, Nidhruva”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में ग्रंथ ने 382 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · कश्यप गोत्र

गण 62 — लौगाक्षयः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
काश्यप · आवत्सार · वासिष्ठ3बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
वासिष्ठ · आवत्सार · काश्यप3बौधायनविकल्प

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 199 — “Vatsara, Kashyapa, Vasishtha”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

लौगाक्षि "द्व्यामुष्यायण" (दो गोत्र वाले) माने गए हैं — कश्यप और वसिष्ठ दोनों से जुड़े. इसीलिए प्रवर में दोनों कुलों के ऋषि हैं.

इस गण में ग्रंथ ने 39 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

कश्यप-कुल के गोत्र-पृष्ठ

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 261–272 (archive.org leaf 301–312)। मत्स्य पुराण से मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (1917).