धन्वन्तरि गोत्र — परिचय
धन्वन्तरि नाम शण्डिल गण की बौधायन-सूची में 48वें स्थान पर है। इसलिए इस गोत्र का प्रवर वही है जो शाण्डिल्य गोत्र का है।
शण्डिल गण में सूत्रों के बीच प्रवर पर सबसे अधिक मतभेद है — अकेले बौधायन चार रूप देते हैं। धन्वन्तरि बौधायन की सूची में है, इसलिए बौधायन के रूप इस गोत्र के लिए सबसे सीधे लागू होते हैं।
प्रवर — गण 59 (शण्डिलाः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| शाण्डिल · आसित · दैवल | 3 | आश्वलायन, कात्यायन | तालिका का मुख्य |
| काश्यप · आसित · दैवल | 3 | आश्वलायन, कात्यायन | विकल्प |
| दैवल · आसित | 2 | आपस्तम्ब | इस ग्रंथ का मुख्य |
| काश्यप · दैवल · आसित | 3 | आपस्तम्ब | विकल्प |
| काश्यप · आवत्सार · आसित | 3 | बौधायन | इस ग्रंथ का मुख्य |
| काश्यप · आवत्सार · शाण्डिल्य | 3 | बौधायन | विकल्प |
| काश्यप · आवत्सार · दैवल | 3 | बौधायन | विकल्प |
| शाण्डिल्य · आसित · दैवल | 3 | बौधायन | विकल्प |
| आसित · दैवल · काश्यप | 3 | मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 199 — “Asita, Devala, Kashyapa”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
पूजा, संकल्प और विवाह में धन्वन्तरि गोत्र
संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। धन्वन्तरि गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह धन्वन्तरिआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप शाण्डिल, आसित, दैवल है (आश्वलायन, कात्यायन)।
ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।
