धन्वन्तरि गोत्र

धन्वन्तरि गोत्र बौधायन की सूची में कश्यप-कुल के शण्डिल (शाण्डिल्य) गण में है। इस गण के प्रवर पर सूत्रों में बहुत मतभेद है — सभी रूप, गण के 121 नाम और स्रोत।

संक्षेप में

धन्वन्तरि गोत्र कश्यप-कुल का गोत्र है। ग्रंथ की तालिका में "धन्वन्तरिः" बौधायन की सूची में शण्डिल (शाण्डिल्य) गण में है। आश्वलायन और कात्यायन इस गण का प्रवर बताते हैं — शाण्डिल, आसित, दैवल। पर इस गण के प्रवर के कई रूप हैं; बौधायन स्वयं "काश्यप, आवत्सार, आसित" देते हैं।

मुख्य जानकारी

गोत्रधन्वन्तरि (Dhanvantari)
अन्य नाम / वर्तनीधन्वंतरि, धन्वन्तरी, Dhanwantari, Dhanvantri
ऋषि-कुलकश्यप
गोत्रकार ऋषिमहर्षि कश्यप
ऋषि-पृष्ठधन्वन्तरि
गणगण 59 — शण्डिलाः
मुख्य प्रवरशाण्डिल, आसित, दैवल (आश्वलायन, कात्यायन)
ग्रंथ-सूची मेंगण 59: "धन्वन्तरिः" (बौधायन)

धन्वन्तरि गोत्र — परिचय

धन्वन्तरि नाम शण्डिल गण की बौधायन-सूची में 48वें स्थान पर है। इसलिए इस गोत्र का प्रवर वही है जो शाण्डिल्य गोत्र का है।

शण्डिल गण में सूत्रों के बीच प्रवर पर सबसे अधिक मतभेद है — अकेले बौधायन चार रूप देते हैं। धन्वन्तरि बौधायन की सूची में है, इसलिए बौधायन के रूप इस गोत्र के लिए सबसे सीधे लागू होते हैं।

प्रवर — गण 59 (शण्डिलाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
शाण्डिल · आसित · दैवल3आश्वलायन, कात्यायनतालिका का मुख्य
काश्यप · आसित · दैवल3आश्वलायन, कात्यायनविकल्प
दैवल · आसित2आपस्तम्बइस ग्रंथ का मुख्य
काश्यप · दैवल · आसित3आपस्तम्बविकल्प
काश्यप · आवत्सार · आसित3बौधायनइस ग्रंथ का मुख्य
काश्यप · आवत्सार · शाण्डिल्य3बौधायनविकल्प
काश्यप · आवत्सार · दैवल3बौधायनविकल्प
शाण्डिल्य · आसित · दैवल3बौधायनविकल्प
आसित · दैवल · काश्यप3मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 199 — “Asita, Devala, Kashyapa”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में दर्ज नाम (121)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। धन्वन्तरि गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1उत्तरःका, म
  2. 2उदमेघःका
  3. 3उपलोधःका
  4. 4औदमेघयःबो
  5. 5औदमेघाःबो
  6. 6कर्दमःम
  7. 7कामशयाः ?बो
  8. 8कारेयःबो
  9. 9काश्यपःम
  10. 10कुलहःम
  11. 11कुहलःका
  12. 12केवलाःम
  13. 13केशीलःका
  14. 14कैरातःम
  15. 15कोकिलःका
  16. 16कोपयःबो
  17. 17कौकण्ठयःबो
  18. 18कौतुण्डेयःबो
  19. 19कौरडजाः ?का
  20. 20कौवलयःका
  21. 21कौश्रेयःबो
  22. 22कौलहाःबो
  23. 23खार्दतीमुखाःबो
  24. 24खार्दभीमुखाःबो
  25. 25गर्दभीमुखःका, म
  26. 26गाङ्गयनाः ?बो
  27. 27गाङ्गायनाःबो
  28. 28गोबिलःम
  29. 29गोभिलाःबो
  30. 30गोमूत्राःबो
  31. 31गोविदाःबो
  32. 32चलुभिःका
  33. 33चैरनाभःका
  34. 34जलन्धरःम
  35. 35जलन्धवःका
  36. 36जलम्भःका
  37. 37जाणवंशाःबो
  38. 38जानन्तारिःबो
  39. 39जानन्धरिःबो
  40. 40जलन्धरिःबो
  41. 41तदपासःम
  42. 42तृणबिन्दुःका
  43. 43तौवरिःम
  44. 44तौवारिपःम
  45. 45दाणवन्तानिःबो
  46. 46देवतातपःका
  47. 47देवजातयःम
  48. 48धन्वन्तरिःबो
  49. 49नभःम
  50. 50निदाघःम
  51. 51परिवारिःका
  52. 52पर्याःका
  53. 53पर्वःम
  54. 54पर्वकाःबो
  55. 55पर्वमौञ्जिमःका
  56. 56पायकाःबो
  57. 57पायिकाःबो
  58. 58पावकाःबो
  59. 59पिप्पलःम
  60. 60पिप्पलादिःम
  61. 61पूपरिः ?का
  62. 62पूर्यःम
  63. 63पैप्पलःका
  64. 64पैप्पलादिःम
  65. 65पैल्यःका
  66. 66बलिःम
  67. 67बहुमिण्डःका
  68. 68बहुमिन्दःका
  69. 69बहूदरयःबो
  70. 70बाह्यायनःबो
  71. 71भत्स्याःम
  72. 72भागुरिःबो
  73. 73भार्वमानयःबो
  74. 74भुजातपूरःम
  75. 75मसृणःम
  76. 76महाकैरलियःम
  77. 77महान्तःम
  78. 78महोदकयःबो
  79. 79माहोदकयःबो
  80. 80मृगकेतुःम
  81. 81मौञ्जिमःका
  82. 82मौञ्जायनाःबो
  83. 83लायुःका
  84. 84वत्सभातयःबो
  85. 85वलिःम
  86. 86वाक्यशठाःबो
  87. 87वाच्यशुष्माःबो
  88. 88वात्यषण्डाःबो
  89. 89वात्सभातयःबो
  90. 90वारिःका
  91. 91वाह्यायनाःबो
  92. 92वृकखण्डःका
  93. 93वृषखण्डःम
  94. 94वेदपातयःम
  95. 95वेदयातयःम
  96. 96वेदायनाःबो
  97. 97वैदानवःबो, का, म
  98. 98वैलायनाःबो
  99. 99शण्डिलाःआश्व, आप, म, बो
  100. 100शाखिलःका
  101. 101शोभनःम
  102. 102शैष्टिकयःबो
  103. 103सम्पचःका
  104. 104सम्पवःका
  105. 105सम्पातिःम
  106. 106सम्यातिःम
  107. 107सादनवाःबो
  108. 108सावचसःबो
  109. 109सावर्चसःबो
  110. 110सुकेतुःका
  111. 111सुञ्जातमानःम
  112. 112सुदानुःका
  113. 113सुवत्स्योगःम
  114. 114सौदानवःका, म
  115. 115स्तौक्षिमहाकयः ?बो
  116. 116स्तैदेहाःबो
  117. 117हिरण्यबाहुःम
  118. 118हिरिण्यबाहुःका
  119. 119हिरिण्यभाहुःबो
  120. 120हेपुरःका
  121. 121हैपुरःका

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।

गण 59 — शण्डिलाः का पूरा पृष्ठ

इसी गण के अन्य गोत्र-पृष्ठ

पूजा, संकल्प और विवाह में धन्वन्तरि गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। धन्वन्तरि गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह धन्वन्तरिआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप शाण्डिल, आसित, दैवल है (आश्वलायन, कात्यायन)।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

धन्वन्तरि गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न