शाण्डिल्य गोत्र — परिचय
गोत्र-प्रवर के पुराने ग्रंथ हर गोत्र को किसी "गण" में रखते हैं। एक गण के सब गोत्रों का प्रवर एक जैसा होता है। शाण्डिल्य गोत्र "शण्डिल" गण में है, जो कश्यप ऋषि के कुल के पाँच गणों में से एक है।
मत्स्य पुराण के 199वें अध्याय में महर्षि कश्यप के वंशजों की सूची है। उसमें शाण्डिल्य का नाम आता है, और उनका प्रवर असित, देवल और कश्यप बताया गया है।
एक गोत्र, कई प्रवर — ऐसा क्यों?
प्रवर उन ऋषियों के नाम हैं जिन्हें यज्ञ और संस्कार में गोत्र के साथ याद किया जाता है। अलग-अलग सूत्र-ग्रंथ एक ही गण के लिए अलग प्रवर बताते हैं। शण्डिल गण में यह अंतर सबसे साफ़ दिखता है — बौधायन अकेले चार विकल्प देते हैं।
इसलिए एक ही गोत्र के दो परिवार अलग प्रवर बोल सकते हैं, और दोनों अपनी परंपरा में सही हो सकते हैं। आपके परिवार में कौन-सा प्रवर बोला जाता है, यह घर के बड़ों या कुल-पुरोहित से पूछें।
प्रवर — गण 59 (शण्डिलाः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| शाण्डिल · आसित · दैवल | 3 | आश्वलायन, कात्यायन | तालिका का मुख्य |
| काश्यप · आसित · दैवल | 3 | आश्वलायन, कात्यायन | विकल्प |
| दैवल · आसित | 2 | आपस्तम्ब | इस ग्रंथ का मुख्य |
| काश्यप · दैवल · आसित | 3 | आपस्तम्ब | विकल्प |
| काश्यप · आवत्सार · आसित | 3 | बौधायन | इस ग्रंथ का मुख्य |
| काश्यप · आवत्सार · शाण्डिल्य | 3 | बौधायन | विकल्प |
| काश्यप · आवत्सार · दैवल | 3 | बौधायन | विकल्प |
| शाण्डिल्य · आसित · दैवल | 3 | बौधायन | विकल्प |
| आसित · दैवल · काश्यप | 3 | मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 199 — “Asita, Devala, Kashyapa”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
पूजा, संकल्प और विवाह में शाण्डिल्य गोत्र
संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। शाण्डिल्य गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह शाण्डिल्यआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप शाण्डिल, आसित, दैवल है (आश्वलायन, कात्यायन)।
ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।
