धन्वन्तरि

समुद्र-मंथन से प्रकट

संक्षेप में

महाभारत (आदि पर्व) के समुद्र-मंथन प्रसंग में धन्वन्तरि अमृत का श्वेत कलश लेकर प्रकट होते हैं, और अनुशासन पर्व की गृहस्थ-बलि विधि में उन्हें आहुति दी जाती है। गोत्र-प्रवर ग्रंथों में "धन्वन्तरिः" नाम बौधायन की सूची में कश्यप-कुल के शण्डिल गण में दर्ज है। दोनों को ग्रंथ आपस में नहीं जोड़ते।

महाभारत के ऋषि

ग्रंथों में

  • समुद्र-मंथन में "दिव्य धन्वन्तरि अमृत का श्वेत कलश हाथ में लिए" प्रकट हुए।
  • गृहस्थ की बलि-विधि में अग्नि, सोम और धन्वन्तरि को आहुति, और ईशान (उत्तर-पूर्व) दिशा में धन्वन्तरि को बलि।
  • "धन्वन्तरिः" (बौधायन) शण्डिल गण में।

धन्वन्तरि से जुड़े गोत्र-पृष्ठ

कुल और प्रवर

ऋषि से गोत्र — हर गोत्रकार के प्रवर वाले गण

स्रोत

धन्वन्तरि — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न