महर्षि माण्डव्य

अणी-माण्डव्य — महाभारत की कथा

संक्षेप में

महाभारत (आदि पर्व) में माण्डव्य नाम के एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण की कथा है, जिन्हें चोरों के भ्रम में शूल पर चढ़ाया गया और वे "अणी-माण्डव्य" कहलाए। उन्हीं के शाप से धर्मराज विदुर के रूप में जन्मे। गोत्र-प्रवर ग्रंथों में "माण्डव्य" नाम भृगु-कुल के जामदग्न्य वत्स गण में दर्ज है — पर दोनों को ग्रंथ आपस में नहीं जोड़ते।

महाभारत के ऋषि

ग्रंथों में

  • माण्डव्य नाम के ब्राह्मण को चोरों के साथ पकड़कर शूल पर चढ़ाया गया; शूल का अंश शरीर में रह जाने से वे "अणी-माण्डव्य" कहलाए।
  • माण्डव्य के शाप से धर्मराज (यम) शूद्र-योनि में विदुर के रूप में जन्मे।
  • "माण्डव्यः" (कात्यायन, मत्स्य) और "माण्डव्याः" (बौधायन) जामदग्न्य वत्स गण में।

माण्डव्य से जुड़े गोत्र-पृष्ठ

कुल और प्रवर

ऋषि से गोत्र — हर गोत्रकार के प्रवर वाले गण

संबंधित गाथाएँ

स्रोत

महर्षि माण्डव्य — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न