FAQ
महर्षि गर्ग — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भरद्वाज-परंपरा के ऋषि। सर्वानुक्रमणी (p. 23) के अनुसार ऋग्वेद 6.47 उनका सूक्त है।
शैन्य गण (गण 25) का: आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, गार्ग्य, शैन्य।
गर्ग के प्रवर में भारद्वाज (गोत्रकार) है, इसलिए बौधायन के नियम से वे भारद्वाज-गोत्र वालों के साथ सगोत्र गिने जाते हैं।
महाभारत (शल्य पर्व 37) में गर्ग नाम के वृद्ध ऋषि को काल और ग्रह-गति का ज्ञाता, और (शान्ति पर्व LIX) राजा पृथु का ज्योतिषी बताया गया है।
ग्रंथ यह स्पष्ट नहीं करते। इसलिए हम दोनों को एक व्यक्ति नहीं कहते, केवल दोनों अभिलेख देते हैं।
