महर्षि च्यवन

भृगु के पुत्र, भृगु-कुल के प्रवर-ऋषि

संक्षेप में

महर्षि च्यवन भृगु और पुलोमा के पुत्र हैं। महाभारत (आदि पर्व) के अनुसार माता के गर्भ से गिरने (च्युत होने) के कारण उनका नाम च्यवन पड़ा। उनकी पत्नी राजकुमारी सुकन्या थीं, और पुत्र प्रमति। गोत्र-प्रवर ग्रंथों में भृगु-कुल के कई गणों के प्रवर में "च्यावन" दूसरा ऋषि है।

महाभारत के ऋषि

एक नज़र में

महर्षि च्यवन — एक नज़र में
बातविवरणस्रोत
श्रेणीमहाभारत के ऋषिमहाभारत (Ganguli अनु.), आदि पर्व, Section VI
पितामहर्षि भृगुमहाभारत (Ganguli अनु.), आदि पर्व, Section V–VI

ग्रंथों में

  • राक्षस पुलोमा जब गर्भवती पुलोमा को ले जा रहा था, तब गर्भ से शिशु गिरा और "च्यवन" कहलाया।
  • च्यवन ने पत्नी सुकन्या से प्रमति नाम का पुत्र पाया।
  • सुकन्या ने अनजाने में वल्मीक (बाँबी) में तपस्या कर रहे च्यवन की आँखें काँटों से छेद दीं; बाद में उनका विवाह च्यवन से हुआ।
  • जामदग्न्य वत्स, अजामदग्न्य वत्स, आर्ष्टिषेण और बिद गणों के प्रवर "भार्गव, च्यावन, आप्नवान…" से शुरू होते हैं।

संबंधित ऋषि

च्यवन से जुड़े गोत्र-पृष्ठ

कुल और प्रवर

ऋषि से गोत्र — हर गोत्रकार के प्रवर वाले गण

संबंधित गाथाएँ

स्रोत

महर्षि च्यवन — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न