वत्स गोत्र — परिचय
ग्रंथ की तालिका में "वत्साः" नाम बौधायन की सूची में और "वत्सः" मत्स्य पुराण की सूची में दर्ज है। यह भृगु-कुल का सबसे बड़ा गण है — इसमें 350 नाम हैं।
इस गण का प्रवर पाँच ऋषियों का है, यानी पञ्चार्षेय। आपस्तम्ब एक विकल्प भी देते हैं: भार्गव, और्व, जामदग्न्य — तीन ऋषि।
जामदग्न्य और अजामदग्न्य वत्स
ग्रंथ वत्सों के दो गण बताता है। पहला "जामदग्न्य वत्स" है, जिसके प्रवर में जामदग्न्य का नाम आता है। दूसरा "अजामदग्न्य वत्स" है, जिसका प्रवर तीन ऋषियों का है — भार्गव, च्यावन, आप्नवान।
दूसरे गण में ग्रंथ कोई अलग नाम नहीं गिनाता। आपके परिवार का प्रवर किस गण वाला है, यह घर के बड़ों या कुल-पुरोहित से पूछ लें।
प्रवर — गण 1 (जामदग्न्या वत्साः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| भार्गव · च्यावन · आप्नवान · और्व · जामदग्न्य | 5 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
| भार्गव · और्व · जामदग्न्य | 3 | आपस्तम्ब | विकल्प |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Chyavana, Apnuvana, Aurva, Jamadagni”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
प्रवर — गण 2 (अजामदग्न्या वत्साः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| भार्गव · च्यावन · आप्नवान | 3 | आश्वलायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
पूजा, संकल्प और विवाह में वत्स गोत्र
संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। वत्स गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह वत्सआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप भार्गव, च्यावन, आप्नवान, और्व, जामदग्न्य है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण)। यह नाम ग्रंथ में एक से अधिक गणों में है, इसलिए वही प्रवर लें जो आपका परिवार बोलता है।
ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।
