जमदग्नि गोत्र — परिचय
बौधायन सूत्र गोत्र की परिभाषा में जिन आठ ऋषियों का नाम लेता है, जमदग्नि उनमें से एक हैं। भृगु-कुल के पहले गण का नाम भी "जामदग्न्य वत्स" है, और उसके प्रवर में जामदग्न्य आते हैं।
पर "जमदग्नि" नाम की अलग पंक्ति ग्रंथ में बिद गण में है, मत्स्य पुराण के नाम से। मत्स्य पुराण (अध्याय 195) में भी जमदग्नि उन नामों में हैं जिनका प्रवर भृगु, च्यवन, आप्नवान है।
बिद गण के प्रवर के तीन रूप
आश्वलायन और बौधायन: भार्गव, च्यावन, आप्नवान, और्व, बैद। कात्यायन: भार्गव, और्व, जामदग्न्य। मत्स्य पुराण: भार्गव, च्यावन, आप्नवान।
तीनों रूप ग्रंथों में मान्य हैं। परिवार में जो चलता आया है, वही अपनाएँ।
प्रवर — गण 4 (बिदाः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| भार्गव · च्यावन · आप्नवान · और्व · बैद | 5 | आश्वलायन, बौधायन | तालिका का मुख्य |
| भार्गव · और्व · जामदग्न्य | 3 | कात्यायन | इस ग्रंथ का मुख्य |
| भार्गव · च्यावन · आप्नवान | 3 | मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Chyavana, Apnuvana”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
पूजा, संकल्प और विवाह में जमदग्नि गोत्र
संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। जमदग्नि गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह जमदग्निआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप भार्गव, च्यावन, आप्नवान, और्व, बैद है (आश्वलायन, बौधायन)।
ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।
