जमदग्नि गोत्र

जमदग्नि गोत्र भृगु-कुल का है। मत्स्य पुराण इसे बिद गण में रखता है, जिसके प्रवर के तीन रूप मिलते हैं। जानिए जमदग्नि और जामदग्न्य वत्स का संबंध, गण के 39 नाम और स्रोत।

संक्षेप में

जमदग्नि गोत्र महर्षि भृगु के कुल का गोत्र है। गोत्र-प्रवर ग्रंथों में "जमदग्निः" नाम मत्स्य पुराण की बिद-गण सूची में है। इस गण का प्रवर आश्वलायन और बौधायन के अनुसार है — भार्गव, च्यावन, आप्नवान, और्व, बैद। मत्स्य पुराण इसका प्रवर "भार्गव, च्यावन, आप्नवान" बताता है।

मुख्य जानकारी

गोत्रजमदग्नि (Jamadagni)
अन्य नाम / वर्तनीजामदग्न्य, जमदग्नी, Jamdagni, Jamadagnya
ऋषि-कुलभृगु
गोत्रकार ऋषिमहर्षि जमदग्नि
ऋषि-पृष्ठमहर्षि च्यवन
गणगण 4 — बिदाः
मुख्य प्रवरभार्गव, च्यावन, आप्नवान, और्व, बैद (आश्वलायन, बौधायन)
ग्रंथ-सूची मेंगण 4: "जमदग्निः" (मत्स्य पुराण)

जमदग्नि गोत्र — परिचय

बौधायन सूत्र गोत्र की परिभाषा में जिन आठ ऋषियों का नाम लेता है, जमदग्नि उनमें से एक हैं। भृगु-कुल के पहले गण का नाम भी "जामदग्न्य वत्स" है, और उसके प्रवर में जामदग्न्य आते हैं।

पर "जमदग्नि" नाम की अलग पंक्ति ग्रंथ में बिद गण में है, मत्स्य पुराण के नाम से। मत्स्य पुराण (अध्याय 195) में भी जमदग्नि उन नामों में हैं जिनका प्रवर भृगु, च्यवन, आप्नवान है।

बिद गण के प्रवर के तीन रूप

आश्वलायन और बौधायन: भार्गव, च्यावन, आप्नवान, और्व, बैद। कात्यायन: भार्गव, और्व, जामदग्न्य। मत्स्य पुराण: भार्गव, च्यावन, आप्नवान।

तीनों रूप ग्रंथों में मान्य हैं। परिवार में जो चलता आया है, वही अपनाएँ।

प्रवर — गण 4 (बिदाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · च्यावन · आप्नवान · और्व · बैद5आश्वलायन, बौधायनतालिका का मुख्य
भार्गव · और्व · जामदग्न्य3कात्यायनइस ग्रंथ का मुख्य
भार्गव · च्यावन · आप्नवान3मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Chyavana, Apnuvana”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में दर्ज नाम (39)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। जमदग्नि गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1अभयजातःम
  2. 2अभयजाताःका, बो
  3. 3अभयदाताःबो
  4. 4अर्कायणाःबो
  5. 5अवटाःबो, का
  6. 6आर्कायणाःबो
  7. 7और्वेयाःम
  8. 8काण्डरथयःबो
  9. 9कामलाःबो
  10. 10कायनिःम
  11. 11क्रौङ्कायनाःका
  12. 12क्रौञ्चायनाःबो, का
  13. 13जमदग्निःम
  14. 14जामलाःबो
  15. 15ताम्रायणाःबो
  16. 16ताग्रायनाःबो
  17. 17त्रैतायनाःका
  18. 18नार्वायणाःबो
  19. 19पुलस्तयःबो
  20. 20पौलस्त्यःम
  21. 21पौलस्त्याःका
  22. 22प्राचीनयोग्याःबो, का
  23. 23बिदःम
  24. 24बिदाःबो
  25. 25भञ्जायनाःका
  26. 26भवजातःम
  27. 27भुजायनाःबो
  28. 28भ्रदत्यः ?का
  29. 29भ्राजाःका
  30. 30मारुताःम
  31. 31मार्कायणाःबो
  32. 32लामलाःबो
  33. 33विदाःबो
  34. 34वेदभृतःका
  35. 35वैजभृत्म
  36. 36वैतभृतयःबो
  37. 37वैतभृताःबो
  38. 38शाकटायनःम
  39. 39शैलाःबो

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।

गण 4 — बिदाः का पूरा पृष्ठ

इसी गण के अन्य गोत्र-पृष्ठ

पूजा, संकल्प और विवाह में जमदग्नि गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। जमदग्नि गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह जमदग्निआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप भार्गव, च्यावन, आप्नवान, और्व, बैद है (आश्वलायन, बौधायन)।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

जमदग्नि गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न