भृगु-कुल के गण और प्रवर

गोत्र-प्रवर ग्रंथों की तालिका में भृगु ऋषि-कुल के 11 गण हैं (गण 1–11)। हर गण का अपना प्रवर है, और कई गणों में अलग-अलग सूत्र प्रवर के अलग रूप बताते हैं। नीचे हर गण का प्रवर, ग्रंथ के अनुसार, दिया गया है।

संक्षेप में

गोत्र-प्रवर ग्रंथों की तालिका में भृगु ऋषि-कुल के 11 गण हैं (गण 1–11)। हर गण का अपना प्रवर है, और कई गणों में अलग-अलग सूत्र प्रवर के अलग रूप बताते हैं। नीचे हर गण का प्रवर, ग्रंथ के अनुसार, दिया गया है।

एक नज़र में

गण 1 — जामदग्न्या वत्साःभार्गव, च्यावन, आप्नवान, और्व, जामदग्न्य · 350 नाम
गण 2 — अजामदग्न्या वत्साःभार्गव, च्यावन, आप्नवान · 0 नाम
गण 3 — आर्ष्टिषेणाःभार्गव, च्यावन, आप्नवान, आर्ष्टिषेण, आनूप · 40 नाम
गण 4 — बिदाःभार्गव, च्यावन, आप्नवान, और्व, बैद · 39 नाम
गण 5 — यस्काः वीतहव्याःभार्गव, वैतहव्य, सावेदस · 122 नाम
गण 6 — श्यैताः अथवा वैन्याःभार्गव, वैन्य, पार्थ · 4 नाम
गण 7 — मित्रयुवाःवाध्र्यश्व · 48 नाम
गण 8 — शुनकाःगार्त्समद · 35 नाम
गण 9 — वत्सपुरोधसौभार्गव, च्यावन, आप्नवान, वात्स, पौरोधस · 0 नाम
गण 10 — वैजवनैमथितौभार्गव, च्यावन, आप्नवान, वैजव, नैमथित · 0 नाम
गण 11 — वेदविश्वज्योतिषःभार्गव, शाठर, माठर · 0 नाम

गण 1 — जामदग्न्या वत्साः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · च्यावन · आप्नवान · और्व · जामदग्न्य5आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
भार्गव · और्व · जामदग्न्य3आपस्तम्बविकल्प

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Chyavana, Apnuvana, Aurva, Jamadagni”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में ग्रंथ ने 350 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · वत्स गोत्र · शौनक गोत्र · माण्डव्य गोत्र · मार्कण्डेय गोत्र · सावर्णि गोत्र · गालव गोत्र

गण 2 — अजामदग्न्या वत्साः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · च्यावन · आप्नवान3आश्वलायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

यह प्रवर आश्वलायन "अजामदग्न्य" वत्सों के लिए, कात्यायन "वात्स्य" के लिए और मत्स्य पुराण "बिद" के लिए बताते हैं. ग्रंथ इस गण में कोई अलग नाम नहीं देता.

इस गण में ग्रंथ ने 0 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · वत्स गोत्र

गण 3 — आर्ष्टिषेणाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · च्यावन · आप्नवान · आर्ष्टिषेण · आनूप5आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
भार्गव · आर्ष्टिषेण · आनूप3आपस्तम्बविकल्प

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Chyavana, Apnuvana, Arshtishena, Rupi”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।

इस गण में ग्रंथ ने 40 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

गण 4 — बिदाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · च्यावन · आप्नवान · और्व · बैद5आश्वलायन, बौधायनतालिका का मुख्य
भार्गव · और्व · जामदग्न्य3कात्यायनइस ग्रंथ का मुख्य
भार्गव · च्यावन · आप्नवान3मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Chyavana, Apnuvana”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में ग्रंथ ने 39 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · पुलस्त्य गोत्र · जमदग्नि गोत्र

गण 5 — यस्काः वीतहव्याः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · वैतहव्य · सावेदस3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Vitahavya, Raivasa, Vaivasa”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।

मत्स्य पुराण के अंग्रेज़ी अनुवाद में तीसरे स्थान पर "रैवस, वैवस" हैं. ग्रंथ की अपनी अशुद्धशोधिनी (p. 44) भी "रैवसवैवसौ" पाठ को "चैव सवेदसः" में सुधारती है — यानी मत्स्य की पाण्डुलिपियों में दोनों पाठ चलते थे.

इस गण में ग्रंथ ने 122 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · सावर्णि गोत्र

गण 6 — श्यैताः अथवा वैन्याः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · वैन्य · पार्थ3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायनतालिका का मुख्य

इस गण में ग्रंथ ने 4 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

गण 7 — मित्रयुवाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वाध्र्यश्व1आश्वलायन, आपस्तम्बतालिका का मुख्य
भार्गव · वाध्र्यश्व · दैवोदास3बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य
भार्गव · दैवोदास · वाध्र्यश्व3आश्वलायनविकल्प

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Badhryashva, Divodasa”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में ग्रंथ ने 48 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

गण 8 — शुनकाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
गार्त्समद1आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायनतालिका का मुख्य
भार्गव · शौनहोत्र · गार्त्समद3आश्वलायनविकल्प
शौनक1बौधायनविकल्प
भार्गव · गार्त्समद2कात्यायन, मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Gritsamada”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में ग्रंथ ने 35 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · शौनक गोत्र

गण 9 — वत्सपुरोधसौ

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · च्यावन · आप्नवान · वात्स · पौरोधस5प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)तालिका का मुख्य
भार्गव · वात्स · पौरोधस3प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)विकल्प

इस गण में ग्रंथ ने 0 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

गण 10 — वैजवनैमथितौ

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · च्यावन · आप्नवान · वैजव · नैमथित5प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)तालिका का मुख्य

इस गण में ग्रंथ ने 0 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

गण 11 — वेदविश्वज्योतिषः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
भार्गव · शाठर · माठर3प्रवरदर्पण (कमलाकर भट्ट)तालिका का मुख्य

इस गण में ग्रंथ ने 0 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें

भृगु-कुल के गोत्र-पृष्ठ

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 207–222 (archive.org leaf 247–262)। मत्स्य पुराण से मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (1917).