गण 7 — मित्रयुवाः
मित्रयुवाः गण भृगु ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब के अनुसार इसका प्रवर है — वाध्र्यश्व। सूत्रों में इसके 2 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 48 नाम दर्ज किए हैं।
संक्षेप में
मित्रयुवाः गण भृगु ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब के अनुसार इसका प्रवर है — वाध्र्यश्व। सूत्रों में इसके 2 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 48 नाम दर्ज किए हैं।
प्रवर
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वाध्र्यश्व | 1 | आश्वलायन, आपस्तम्ब | तालिका का मुख्य |
| भार्गव · वाध्र्यश्व · दैवोदास | 3 | बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
| भार्गव · दैवोदास · वाध्र्यश्व | 3 | आश्वलायन | विकल्प |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Badhryashva, Divodasa”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
इस गण में दर्ज नाम (48)
गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।
- 1अपिशलाःका
- 2अपिशालिःम
- 3आठिकायनाःका
- 4आपिकायनःम
- 5आपिशलाःका
- 6आश्वलायनाःका
- 7उक्षायणाःबो
- 8उरुक्षायणाःबो
- 9ओजायनाःबो
- 10औरुक्षायणाःबो
- 11कैतवायनाःबो
- 12खाण्डवःम
- 13गेष्ठायनःबो
- 14गोपायनाःका
- 15तार्क्ष्यायणाःबो
- 16द्रोणायनःम
- 17द्रोणायनाःका
- 18नाशार्यजनःबो
- 19पाटकायनाःका
- 20पिशालिःम
- 21पुराभिनायाःबो
- 22वाल्याःबो
- 23महावाल्यःबो
- 24माजाधयःबो
- 25माञ्जाधयःबो
- 26मादापयःबो
- 27माल्याःबो
- 28मित्रयुवःबो
- 29मित्रयुवाःआप, आश्व
- 30मैत्रेयःका, म
- 31यावाल्याःबो
- 32रौकपायणाःबो
- 33रौक्मायनःम
- 34रौक्यायणाःबो
- 35रौक्षायनःबो
- 36रौष्ट्यायनःबो
- 37वाञ्जायनाःबो
- 38वाध्र्यश्वाःआप
- 39शाकटाक्षःका, म
- 40शालायनिःम
- 41साकिताक्षाःका
- 42साचर्यःका
- 43सापिण्डिनःबो
- 44सुरभितयःबो
- 45सुराणयाःबो
- 46हंसजिह्वःम
- 47हसजिह्वाःका
- 48हासजिह्वाःका
संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.
भृगु-कुल के अन्य गण
स्रोत
पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 219–220 (archive.org leaf 259–260)।
