गण 8 — शुनकाः
शुनकाः गण भृगु ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन के अनुसार इसका प्रवर है — गार्त्समद। सूत्रों में इसके 3 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 35 नाम दर्ज किए हैं।
संक्षेप में
शुनकाः गण भृगु ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन के अनुसार इसका प्रवर है — गार्त्समद। सूत्रों में इसके 3 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 35 नाम दर्ज किए हैं।
प्रवर
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| गार्त्समद | 1 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन | तालिका का मुख्य |
| भार्गव · शौनहोत्र · गार्त्समद | 3 | आश्वलायन | विकल्प |
| शौनक | 1 | बौधायन | विकल्प |
| भार्गव · गार्त्समद | 2 | कात्यायन, मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 195 — “Bhrigu, Gritsamada”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
इस गण के गोत्र-पृष्ठ
इस गण में दर्ज नाम (35)
गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।
- 1एकायनःम
- 2कर्दमायनाःका
- 3कार्दमायानःम
- 4खदमायनःबो
- 5गाङ्गायनाःबो
- 6गार्त्समदाःआप, बो
- 7गार्भयनःबो
- 8गृत्समदःम
- 9गृत्समदाःका
- 10चक्षुःम
- 11चौक्षाःका
- 12चौक्षिःम
- 13चौक्ष्याः ?बो
- 14तित्तिरीयाःबो
- 15तैत्तिरीयाःबो
- 16पत्पूलाः ?बो
- 17प्रत्यूषाःका
- 18प्रत्यूहःम
- 19भार्गायणाःबो
- 20मत्स्यगन्धःम
- 21मत्स्यगन्धाःबो
- 22मांसगन्धाःका
- 23यज्ञपतिःम
- 24यज्ञपयःबो
- 25याज्ञपयःका
- 26वर्ष्याःबो
- 27शुनकाःआप, आश्व, बो
- 28श्रौण्यःम
- 29श्रोत्रियाःका
- 30श्रौत्रियाःबो
- 31सनकःम
- 32सनयःम
- 33सौकराःका
- 34सौगन्धयःबो
- 35सौरिःम
संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।
भृगु-कुल के अन्य गण
स्रोत
पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 220–221 (archive.org leaf 260–261)।
